Suryakumar Yadav: 2025 एशिया कप में भारत को एक हार मिली थी और इस हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) द्वारा एक नई शिकायत की गई, इस बार निशाना बन गया है भारतीय टीम का स्टार बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव. PCB ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) को इस संबंध में शिकायत भेजी है कि सूर्यकुमार द्वारा दिए गए बयानों से खेल की छवि को नुकसान पहुंचा है. ICC ने इस मामले को मैच रेफरी रिची रिचर्डसन को सौंपा है, जिन्होंने भारतीय टीम को एक औपचारिक ई‑मेल भेजकर विवरण मांगा है.
रिपोर्ट के अनुसार, PCB ने सूर्यकुमार के पुरस्कार समारोह के दौरान और बाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयानों को आधार बनाकर दो शिकायतें दर्ज करवाई हैं. ICC ने इन शिकायतों की जांच हेतु दो अलग-अलग रिपोर्ट्स मैच रेफरी को सौंपी हैं. रिची रिचर्डसन की ओर से भारतीय टीम को भेजे गए मेल में कहा गया है कि मैंने दोनों रिपोर्ट्स और उनसे जुड़े सबूतों का अध्ययन किया है. निष्कर्ष है कि सूर्यकुमार के बयान "खेल की छवि को क्षति पहुंचाने वाले" हैं. मेल में लिखा गया है कि अगर सूर्यकुमार इन आरोपों को स्वीकार नहीं करते हैं, तो एक सुनवाई होगी जिसमें वे स्वयं और PCB के प्रतिनिधि उपस्थित होंगे.
क्या कहा था सूर्यकुमार यादव?
लीग स्टेज जीत पर बयान:
भारत ने एशिया कप के लीग मैच में पाकिस्तान को हराया. जीत के बाद सूर्यकुमार यादव ने कहा कि यह जीत पुलवामा आतंकी हमले के पीड़ितों को समर्पित है.
हाथ न मिलाने का बयान:
प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सरकार और BCCI से निर्देश मिले थे कि जीत के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ न मिलाएं. यह बयान विवादास्पद विषय बन गया.
ये दोनों बयान PCB की ओर से कथित रूप से “खेल की गरिमा और खेल भावना के विरुद्ध” माने जा रहे हैं.
क्या हो सकता है दंड? ICC नियम क्या कहते हैं?
ICC की व्यवहारी नियमावली (Code of Conduct) में उल्लंघन के स्तर अलग-अलग हैं, लेवल 1 से लेवल 4 तक. इस मामले में यदि मामला लेवल‑1 उल्लंघन माना जाता है, तो प्रतिबंध (बैन) नहीं लग सकता. सामान्यत: ऐसे मामलों में मैच फीस का जुर्माना (fine) लगाया जाता है. बैन केवल तब संभव है जब उल्लंघन लेवल 2, 3 या 4 में आता हो, जैसे कि भावनात्मक या घृणा फैलाने वाला भाषण, जातिगत हिंसा आदि. तो, अगर ICC मामले को लेवल‑1 ही मानता है, तो सूर्यकुमार यादव को बैन की बजाय आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है.
क्या यह रणनीति विवाद नहीं बढ़ाएगी?
यह मामला सिर्फ क्रिकेट विवाद नहीं है, बल्कि राजनीतिक भाषण, राष्ट्रीय भावना और खेल नीति के बीच की सीमा पर खड़ा है. यदि युद्ध-आधारित या संवेदनशील विषयों को खेल मैदान में घसीटा जाए तो निष्पक्षता की धारणा प्रभावित हो सकती है. खिलाड़ियों को यह अधिकार है कि वे अपने भाव व्यक्त करें, लेकिन जब वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर हों, उनके बयान खेल और प्रतियोगिता की स्वायत्तता को प्रभावित न करें. बीसीसीआई और ICC के बीच यह मामला यह तय करेगा कि भविष्य में खिलाड़ियों की अभिव्यक्ति की सीमाएँ कैसे बनेंगी.
यह भी पढ़ें- IND vs WI: इन 5 खिलाड़ियों को टीम में नहीं दी गई जगह, अय्यर ने टेस्ट सीरीज खेलने से किया मना, जानें क्यों