नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच बयानबाज़ी का सिलसिला कोई नया नहीं है, लेकिन जब पड़ोसी देश की सेना का प्रमुख परमाणु हथियारों के नाम पर धमकियां देने लगे और वो भी किसी तटस्थ देश की जमीन से, तो उस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आना लाजमी हो जाता है. इस बार पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर के विवादित बयान ने एक बार फिर हिंदुस्तान में हलचल मचा दी है.
हैदराबाद से सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुनीर की भाषा पर न केवल गहरा ऐतराज जताया है, बल्कि उन्हें "सड़कछाप" अंदाज में बयानबाज़ी करने वाला तक कह डाला. ओवैसी ने केंद्र सरकार से कड़ा रुख अपनाने की भी अपील की है और मांग की है कि भारत इस पूरे मुद्दे को अमेरिका के सामने मजबूती से उठाए, जहां से मुनीर ने ये धमकियां दी हैं.
भारत को परमाणु धमकी देना कितना खतरनाक?
पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं. इस दौरान उन्होंने फ्लोरिडा में पाकिस्तानी समुदाय को संबोधित करते हुए भारत को लेकर जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया और जिस अंदाज़ में परमाणु हथियारों की धमकी दी, उसने न सिर्फ भारतीय रणनीतिक हलकों को चौंका दिया, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी आक्रोश फैला दिया.
मुनीर ने कहा, "अगर पाकिस्तान को लगा कि उसका अस्तित्व खतरे में है, तो हम आधी दुनिया को ले डूबेंगे. हम एक परमाणु शक्ति हैं और किसी भी खतरे का जवाब देने में सक्षम हैं." यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी मज़बूती की ओर बढ़ रही है और दोनों देश मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में काम कर रहे हैं.
ओवैसी का पलटवार: 'मुनीर की भाषा सड़कछाप जैसी'
ओवैसी ने असीम मुनीर के इस बयान को शर्मनाक करार देते हुए कहा कि इस तरह की भाषा एक जिम्मेदार सेना प्रमुख को शोभा नहीं देती. उन्होंने कहा, "मुनीर सड़कछाप आदमी की तरह बात कर रहे हैं." उनके मुताबिक, यह निंदनीय है कि ऐसे बयान अमेरिका जैसी ज़मीन से दिए जा रहे हैं, जो कि भारत का रणनीतिक सहयोगी है.
उन्होंने दो टूक कहा कि अगर पाकिस्तान की डीप स्टेट और सेना बार-बार इस तरह की भाषा बोल रही है, तो भारत को भी अपनी सैन्य तैयारियों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए. ओवैसी ने कहा, "इस तरह के लगातार खतरों के मद्देनजर भारत को अपना डिफेंस बजट और तैयारियां बढ़ानी होंगी, ताकि किसी भी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके."
अमेरिका से धमकी भारत के लिए चिंता का विषय
ओवैसी की सबसे बड़ी आपत्ति इस बात पर रही कि पाकिस्तान का सेना प्रमुख अमेरिकी धरती से भारत को धमकी दे रहा है. उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाज़ी केवल भारत की संप्रभुता पर ही सवाल नहीं उठाती, बल्कि यह अमेरिका की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा करती है.
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि यह मामला सिर्फ विदेश मंत्रालय के औपचारिक बयान तक सीमित न रह जाए. ओवैसी ने कहा, "भारत सरकार को चाहिए कि वह इस मुद्दे को अमेरिका के समक्ष मजबूती से रखे और कूटनीतिक स्तर पर विरोध दर्ज कराए." उन्होंने आगे कहा कि यह समय सख्त राजनीतिक जवाब देने का है, ताकि पाकिस्तान को यह एहसास हो कि भारत अब न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग की रणनीति को बर्दाश्त नहीं करेगा.
मुनीर की रणनीतिक संतुलन बिगाड़ने की साजिश?
जनरल असीम मुनीर के इस बयान को सिर्फ एक घबराए हुए पड़ोसी की चीख नहीं माना जा सकता. जब कोई सेना प्रमुख खुलेआम यह कहे कि "अगर हम डूबे तो आधी दुनिया को ले डूबेंगे," तो यह वैश्विक स्थिरता के लिए भी खतरे की घंटी है.
विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक आर्थिक बदहाली, राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरती साख को छिपाने के लिए भारत के खिलाफ उकसावे की राजनीति कर रहा है. और अब जब अमेरिका में ट्रंप के दोबारा सक्रिय होने की संभावनाएं हैं, तो यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह सब किसी अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है?
ओवैसी ने इस संदर्भ में कहा कि "मुनीर के बयान ट्रंप के इशारे पर हो सकते हैं." उनका इशारा साफ है कि ट्रंप और पाकिस्तान की सेना के बीच जो पुराना रिश्ता रहा है, वह कहीं न कहीं आज भी रणनीतिक रूप से जिंदा है.
भारत का जवाब: 'परमाणु ब्लैकमेलिंग नहीं चलेगी'
भारत सरकार ने असीम मुनीर के इस बयान को गंभीरता से लिया है. विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि परमाणु धमकियों को वह किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेगा.
मंत्रालय ने कहा, "परमाणु हथियारों का डर दिखाना पाकिस्तान की पुरानी आदत है. भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए हर स्तर पर तैयार है." यह जवाब भले ही कूटनीतिक भाषा में दिया गया हो, लेकिन उसका संदेश पाकिस्तान और दुनिया को बहुत साफ है.
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