Delhi News: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने एक नई कानूनी अर्जी के जरिए कोर्ट से अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण की अनुमति मांगी है. यह अर्जी दिल्ली शराब नीति से जुड़े बहुचर्चित मामले की सुनवाई के दौरान राउज एवेन्यू कोर्ट में गुरुवार को दाखिल की गई. केजरीवाल की ओर से उनके वकील ने अदालत को जानकारी दी कि उनका पासपोर्ट वर्ष 2018 में ही एक्सपायर हो चुका है और अब वह इसका नवीनीकरण कराना चाहते हैं. साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि यह प्रक्रिया केवल पासपोर्ट की नियमित रिन्युअल से जुड़ी है और इसका विदेश यात्रा की किसी योजना से कोई लेना-देना नहीं है.
ED और CBI को कोर्ट का नोटिस
अर्जी पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि उन्हें इस नवीनीकरण को लेकर कोई आपत्ति है या नहीं. इन जांच एजेंसियों से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर अदालत 4 जून को इस मुद्दे पर निर्णय लेगी. गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली शराब घोटाले मामले में नामजद आरोपी हैं. ईडी और सीबीआई दोनों इस केस की जांच कर रही हैं, हालांकि अभी तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है.
सीबीआई बहस को तैयार, कोर्ट ने जताई चिंता
सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि वह आरोप तय करने के मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है. वहीं एजेंसी ने लगातार दाखिल हो रही याचिकाओं की संख्या को लेकर भी चिंता जाहिर की. सूत्रों के मुताबिक, कोर्ट पहले ही संकेत दे चुकी है कि अब इस मामले में और नई याचिकाएं नहीं ली जाएंगी, बावजूद इसके कई अर्जियां अभी लंबित हैं. 23 मई को हुई सुनवाई में भी इसी मुद्दे पर चर्चा हुई थी.
केजरीवाल और अन्य आरोपी वर्चुअल रूप से पेश
गुरुवार को इस मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, बीआरएस नेता के. कविता सहित अन्य आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए. विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने पहले ही एक अहम तकनीकी मुद्दे का समाधान कर दिया है, जिसकी वजह से यह मामला लंबे समय से रुका हुआ था. अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के बीच दस्तावेजों की जांच और तर्कों की सूची को लेकर पिछले 10 महीनों में 25 बार स्थगन हो चुका है.
क्या मिलेगा पासपोर्ट नवीनीकरण की मंजूरी?
अब सबकी निगाहें 4 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब अदालत यह तय करेगी कि अरविंद केजरीवाल को पासपोर्ट नवीनीकरण की अनुमति दी जा सकती है या नहीं. यह फैसला इस हाई-प्रोफाइल केस में एक अहम मोड़ हो सकता है.
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