Bagram Air Base: अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी भले ही 2021 में खत्म हो गई हो, लेकिन अब एक बार फिर बगराम एयरबेस को लेकर हलचल तेज हो रही है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार अफगानिस्तान के रणनीतिक रूप से अहम बगराम एयरबेस पर दोबारा नियंत्रण पाने की कोशिश में है.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर के साथ आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, "हम इसे वापस चाहते हैं, क्योंकि यह चीन के उस क्षेत्र के बेहद करीब है, जहां न्यूक्लियर हथियार बनाए जाते हैं." ट्रंप ने यह बयान ऐसे समय दिया है जब चीन और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है.
एक बार फिर चर्चा में क्यों?
काबुल से करीब 44 किलोमीटर दूर स्थित बगराम एयरबेस अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा था, जहां से अफगानिस्तान युद्ध के दौरान अमेरिकी और नाटो सेनाएं संचालित होती थीं. लेकिन अगस्त 2021 में बाइडेन प्रशासन ने अचानक वापसी का फैसला लिया, जिसके बाद यह बेस तालिबान के नियंत्रण में चला गया.
अब ट्रंप का दावा है कि बाइडेन की इस रणनीतिक चूक ने चीन को फायदा पहुंचाया है. उनका कहना है कि अफगानिस्तान की मौजूदा सरकार को अमेरिका की दोबारा जरूरत है और यही मौका है बगराम को फिर से अपने नियंत्रण में लेने का.
चीन, तालिबान और रणनीतिक आशंकाएं
डोनाल्ड ट्रंप का आरोप है कि चीन बगराम एयरबेस का किसी न किसी रूप में इस्तेमाल कर रहा है, हालांकि अफगान और तालिबान अधिकारियों ने इसे "बिना सबूत वाला बयान" बताया है. मार्च 2025 में तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने ट्रंप के बयानों को खारिज करते हुए कहा था कि "ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर भावनात्मक बयानबाज़ी से बचना चाहिए."
फिर से सैन्य हस्तक्षेप? जानकार क्या कहते हैं
अमेरिकी सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका बगराम एयरबेस पर दोबारा कब्ज़ा करना चाहता है, तो इसके लिए 10,000 से अधिक सैनिकों और अडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स की जरूरत पड़ेगी. इसका मतलब है, .एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन, जो शायद दुनिया में फिर से अस्थिरता ला सकता है.
2021 की वापसी और बाइडेन की आलोचना
बगराम से वापसी के बाद अमेरिका को तालिबान की मदद से ही अपने नागरिकों और सैनिकों की निकासी करनी पड़ी थी. इस निर्णय को रिपब्लिकन पार्टी लगातार बाइडेन प्रशासन की "सबसे बड़ी विफलताओं" में से एक मानती है. हालांकि बाइडेन प्रशासन का कहना है कि यह अमेरिका के इतिहास की "सबसे सुरक्षित और सुव्यवस्थित निकासी" थी.
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