कश्मीर पर पाकिस्तान को बड़ा झटका, अमेरिका ने भारत के खिलाफ जाने से किया इनकार, कैसे हुआ खुलासा?

अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर सामने आए एक गोपनीय राजनयिक दस्तावेज ने दोनों देशों के बीच मौजूद अविश्वास और मतभेदों की परतें खोल दी हैं.

America will not support Pakistan on Kashmir by going against India
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अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों को लेकर सामने आए एक गोपनीय राजनयिक दस्तावेज ने दोनों देशों के बीच मौजूद अविश्वास और मतभेदों की परतें खोल दी हैं. लीक हुए डिप्लोमैटिक केबल्स से संकेत मिला है कि पाकिस्तान लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका से खुला समर्थन चाहता रहा, लेकिन वॉशिंगटन ने इस मामले में हमेशा संतुलित और सीमित रुख अपनाया. यही वजह है कि पाकिस्तान के भीतर अमेरिकी नीति को लेकर लगातार असंतोष बना रहा.

साल 2022 के एक गोपनीय दस्तावेज के मुताबिक पाकिस्तान के तत्कालीन अमेरिकी राजदूत आसद मजीद खान ने अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू से मुलाकात के दौरान साफ तौर पर नाराजगी जताई थी. पाकिस्तान का आरोप था कि अमेरिका उससे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग की उम्मीद करता है, लेकिन जब बात कश्मीर की आती है तो वह पाकिस्तान के पक्ष में खुलकर नहीं बोलता.

कश्मीर पर पाकिस्तान की पुरानी शिकायत

लीक दस्तावेजों के अनुसार पाकिस्तान ने अमेरिका पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. इस बातचीत में पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान के साथ अलग-अलग व्यवहार करता है. पाकिस्तान को यह शिकायत थी कि यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने रूस के साथ अपने संबंध बनाए रखे, इसके बावजूद अमेरिका ने नई दिल्ली के प्रति अपेक्षाकृत नरम रवैया अपनाया. वहीं पाकिस्तान पर ज्यादा दबाव बनाया गया.

राजदूत आसद मजीद खान ने अमेरिकी अधिकारियों से कहा कि अमेरिकी सीनेट में भारत के पक्ष में दिए गए बयान पाकिस्तान में गलत संदेश देते हैं. पाकिस्तान को महसूस होता है कि अमेरिका रणनीतिक कारणों से भारत को प्राथमिकता देता है, जबकि पाकिस्तान की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता.

अमेरिका ने भारत को क्यों दी प्राथमिकता?

मुलाकात के दौरान डोनाल्ड लू ने कथित तौर पर यह स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत को मुख्य रूप से चीन के खिलाफ अपनी रणनीतिक नीति के हिस्से के रूप में देखता है. अमेरिका के लिए भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार बन चुका है और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में उसकी बड़ी भूमिका मानी जाती है.

यही कारण है कि वॉशिंगटन की विदेश नीति में भारत का महत्व लगातार बढ़ा है. दूसरी ओर पाकिस्तान को अमेरिका अब मुख्य रूप से सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में देखता है. इस अंतर ने दोनों देशों के रिश्तों में दूरी और अविश्वास को और बढ़ाया है.

फिर चर्चा में क्यों आया पुराना दस्तावेज?

यह दस्तावेज ऐसे समय दोबारा चर्चा में आया है जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान पाकिस्तान को लेकर नीति पर अंदरूनी बहस तेज बताई जा रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका के रक्षा और खुफिया तंत्र का एक वर्ग पाकिस्तान के साथ व्यावहारिक सहयोग जारी रखने के पक्ष में है, जबकि कई रणनीतिक विशेषज्ञ भारत के साथ मजबूत साझेदारी को ज्यादा अहम मानते हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में भरोसे की कमी अभी भी बनी हुई है. पाकिस्तान लगातार कश्मीर और क्षेत्रीय राजनीति में अमेरिकी समर्थन चाहता रहा है, लेकिन अमेरिका की प्राथमिकता लंबे समय से भारत-केंद्रित रणनीतिक ढांचे पर टिकी हुई है.

भारत का रुख पहले से स्पष्ट

भारत हमेशा यह कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और इसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की कोई आवश्यकता नहीं है. नई दिल्ली लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यही दोहराती रही है कि पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद और द्विपक्षीय समझौतों के दायरे में ही मुद्दों को उठाना चाहिए.

इसी वजह से अमेरिका सहित अधिकांश बड़े देशों ने कश्मीर मुद्दे पर खुलकर पाकिस्तान का समर्थन करने से दूरी बनाए रखी है. हालांकि अमेरिका पाकिस्तान के साथ सैन्य और सुरक्षा सहयोग बनाए रखता है, लेकिन रणनीतिक स्तर पर उसका झुकाव भारत की ओर ज्यादा दिखाई देता है.

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