जिसने समर्थन किया उसी को धोखा देने चले ट्रंप? ड्राफ्ट से छेड़छाड़ करने का पाकिस्तान ने लगा दिया आरोप

गाज़ा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पेश की गई शांति योजना पर पाकिस्तान ने शुरुआत में समर्थन जताया, लेकिन देश के अंदरूनी माहौल ने सरकार को अपना रुख बदलने पर मजबूर कर दिया है.

America Peace plan for gaza ceasefire with israel pakistan did not like the draft
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गाज़ा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पेश की गई शांति योजना पर पाकिस्तान ने शुरुआत में समर्थन जताया, लेकिन देश के अंदरूनी माहौल ने सरकार को अपना रुख बदलने पर मजबूर कर दिया है.

मंगलवार को जिन 8 मुस्लिम देशों ने ट्रंप की योजना को लेकर सहमति जताई, उनमें पाकिस्तान भी शामिल था. हालांकि, कुछ ही घंटों में राजनीतिक दलों, धार्मिक संगठनों और आम जनता की तीखी आलोचना के बाद, पाकिस्तानी हुकूमत ने बैकफुट पर आते हुए अब योजना में कई बिंदुओं पर असहमति जताई है.

इशाक डार का पलटवार: “ये हमारी भाषा नहीं है”

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका द्वारा पेश किए गए प्लान से वे पूरी तरह सहमत नहीं हैं. उन्होंने कहा, “यह ड्राफ्ट हमारी ओर से भेजा गया दस्तावेज़ नहीं है. इसमें कई अहम मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है. अगर हमारे सुझाए गए संशोधन शामिल नहीं किए गए, तो इसे स्वीकार करना मुश्किल होगा.”डार ने आगे बताया कि पाकिस्तान उन आठ मुस्लिम देशों में शामिल है, जिन्होंने एक संयुक्त संशोधन प्रस्ताव भेजा है. उन्होंने ट्रंप की योजना में दर्शाई गई "टेक्नोक्रेट फिलिस्तीनी सरकार" और एक अंतरराष्ट्रीय निगरानी बल की अवधारणा पर भी सवाल उठाए हैं.

विरोध में उतरे इमरान खान और कई दल

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई समेत कई विपक्षी दलों और धार्मिक संस्थाओं ने ट्रंप की योजना को फिलिस्तीनी अधिकारों के खिलाफ बताया है. सोशल मीडिया पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या अमेरिका और इज़राइल को यह अधिकार है कि वे फिलिस्तीन के भविष्य को अकेले तय करें?

नेतन्याहू की दखल से बदला प्लान?

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और सलाहकार स्टीव विटकॉफ के साथ वाइट हाउस में एक लंबी बैठक की. इस मीटिंग के बाद, ट्रंप के शांति प्रस्ताव में कई अंतिम समय के बदलाव किए गए. यही वो बदलाव हैं, जिन पर इशाक डार ने अप्रत्यक्ष रूप से नाराज़गी जताई है. उनका मानना है कि इन संशोधनों से पाकिस्तान समेत मुस्लिम देशों के विचारों की अनदेखी हुई है.

अब आगे क्या?

ट्रंप की योजना में 20 बिंदुओं के ज़रिये गाज़ा में संघर्षविराम, बंधकों की रिहाई और पुनर्निर्माण की रूपरेखा पेश की गई है. लेकिन इस योजना में जमीन, प्रशासन और सेना की भूमिका जैसे विवादित मुद्दों पर कोई स्पष्टता नहीं दी गई है. ऐसे में पाकिस्तान की ओर से समर्थन पर सस्पेंस बना हुआ है. विदेश मंत्री का बयान इस ओर इशारा करता है कि जब तक प्रस्ताव में आवश्यक बदलाव नहीं होते, पाकिस्तान इस योजना के साथ पूरी तरह खड़ा नहीं होगा.

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