कुछ बड़ा करने की तैयारी में अमेरिका? ईरान की ओर बढ़ रहा USS अब्राहम लिंकन, जानें इस सुपर कैरियर की ताकत

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है. इस बीच, अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी नौसैनिक ताकत को मिडल ईस्ट में भेजने का निर्णय लिया है. पेंटागन ने साउथ चाइना सी में तैनात एक शक्तिशाली कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को अब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) क्षेत्र में भेजने का आदेश दिया है.

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    वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच चुका है. इस बीच, अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी नौसैनिक ताकत को मिडल ईस्ट में भेजने का निर्णय लिया है. पेंटागन ने साउथ चाइना सी में तैनात एक शक्तिशाली कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को अब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) क्षेत्र में भेजने का आदेश दिया है. इसमें शामिल है USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर और इसकी सहायक वॉरशिप. इस बेड़े को मिडल ईस्ट तक पहुंचने में लगभग एक सप्ताह का समय लगेगा, और इसकी तैनाती के साथ अमेरिका अपनी सैन्य ताकत का स्पष्ट संदेश देना चाहता है.

    USS अब्राहम लिंकन: एक शक्तिशाली नौसैनिक युद्ध समूह

    USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर दुनिया के सबसे शक्तिशाली नौसैनिक बेड़ों में गिना जाता है. यह न्यूक्लियर पावर से चलने वाला एक विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर है, जिसका वजन 1 लाख टन से भी ज्यादा है. इस पर लगभग 5,000 सैनिक तैनात रहते हैं, और इसमें 60 से 75 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर शामिल होते हैं, जिनमें F/A-18 फाइटर जेट, रडार निगरानी विमान और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरणों से लैस एयरक्राफ्ट होते हैं. यह एकमात्र कैरियर किसी छोटे देश की वायुसेना जैसी ताकत रखता है और महीनों तक बिना किसी जमीनी बेस के ऑपरेशन करने में सक्षम है.

    स्ट्राइक ग्रुप की ताकत

    USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर केवल एक प्रमुख घटक है, बल्कि इसके साथ कई अन्य शक्तिशाली युद्धपोत भी तैनात होते हैं. इनमें मिसाइल से लैस डिस्ट्रॉयर्स, क्रूजर्स और एक अटैक सबमरीन शामिल होती हैं. ये जहाज लंबी दूरी की टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें, एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम और पनडुब्बी रोधी हथियारों से लैस होते हैं. यह युद्ध समूह दुश्मन पर हवाई हमले करने, समुद्री रास्तों की सुरक्षा, नो-फ्लाई जोन लागू करने और बड़े सैन्य अभियान चलाने के लिए तैयार है. ऐसे में किसी भी क्षेत्र में इसकी तैनाती अमेरिकी सैन्य शक्ति की गंभीर चेतावनी मानी जाती है.

    ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन

    यह सैन्य तैनाती ऐसे समय में हो रही है, जब ईरान में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं. महंगाई, खराब आर्थिक स्थिति और शासन के खिलाफ गुस्से के कारण ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए प्रदर्शन अब 18वें दिन में प्रवेश कर चुके हैं, जिसमें 617 से ज्यादा प्रदर्शन और 18,470 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. इसके साथ ही, अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि यदि प्रदर्शनकारियों पर हमले होते हैं तो वे ईरान पर हमले की योजना बना सकते हैं.

    सेंट्रल कमांड क्षेत्र: अमेरिका की सैन्य प्रभावक्षेत्र

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कार्यक्षेत्र लगभग 40 लाख वर्ग मील में फैला हुआ है, जिसमें मिस्र, इराक, अफगानिस्तान, ईरान, पाकिस्तान जैसे महत्वपूर्ण देश शामिल हैं. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इस सैन्य तैनाती का उद्देश्य अभी तक स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन यह तैनाती निश्चित रूप से अमेरिका की सैन्य ताकत और अपनी रणनीतिक स्थिति को दर्शाती है.

    कतर और सऊदी अरब में सुरक्षा उपाय

    अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डे, कतर के अल-उदीद एयर बेस से कुछ कर्मचारियों को सुरक्षा कारणों से निकालने का आदेश दिया गया है. इसके साथ ही, सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास ने अपने कर्मचारियों को अधिक सतर्क रहने और सैन्य ठिकानों पर अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है. इन सुरक्षा उपायों से स्पष्ट होता है कि अमेरिका ईरान के आसपास बढ़ते तनाव के मद्देनज़र अपनी तैयारियों को मजबूत कर रहा है.

    अमेरिकी राष्ट्रपति को दिए गए सैन्य विकल्प

    इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों के बारे में जानकारी दी गई है. इन विकल्पों में हवाई हमलों के अलावा, सैन्य, साइबर और मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन भी शामिल हैं. अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारियों ने यह जानकारी दी, जिससे साफ है कि अमेरिका अपने कूटनीतिक कदमों के साथ-साथ सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है.

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