बीत गया 1 अक्टूबर, लेकिन अभी तक नहीं लागू हुआ 100% फार्मा टैरिफ... क्या बदल गया है ट्रंप का मूड?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यह घोषणा की थी कि 1 अक्टूबर 2025 से देश में आयातित ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा.

America 100% pharma tariff has not yet been implemented
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में यह घोषणा की थी कि 1 अक्टूबर 2025 से देश में आयातित ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा. इस फैसले का मुख्य उद्देश्य अमेरिका को फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना था.

हालांकि, निर्धारित तारीख बीत जाने के बावजूद यह टैरिफ लागू नहीं हुआ, जिससे सवाल उठने लगे हैं कि क्या ट्रंप प्रशासन की योजना में बदलाव आ गया है? या फिर इसके पीछे कोई रणनीतिक वजह है? आइए विस्तार से समझते हैं कि टैरिफ लागू होने में आखिर क्या अड़चनें आ रही हैं और इसकी वर्तमान स्थिति क्या है.

क्या है टैरिफ लागू करने में हो रही देरी की वजह?

ट्रंप प्रशासन ने शुरुआत में जिस कड़े रुख के साथ यह ऐलान किया था, उसके बाद यह अपेक्षा की जा रही थी कि 1 अक्टूबर से नया टैरिफ प्रभावी हो जाएगा. लेकिन अब साफ हो गया है कि सरकार फिलहाल दवा कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है.

व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, सरकार चाहती है कि दवा कंपनियां पहले अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स अमेरिका में स्थापित करें, उत्पादन प्रक्रिया को पटरी पर लाएं और दवाओं की कीमतों में कमी पर भी सहमति बनाएं. जब तक इन चर्चाओं का कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता, तब तक टैरिफ को स्थगित रखा गया है.

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया, "अभी कई कंपनियों से बातचीत जारी है. वे अपनी उत्पादन क्षमता को अमेरिका में लाना चाहती हैं और कुछ दवाओं की कीमतों में कटौती के प्रस्ताव भी दिए गए हैं. ऐसे में टैरिफ को तत्काल लागू करने से पहले हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इससे मरीजों पर अनावश्यक बोझ न पड़े."

अगर टैरिफ लागू होता है तो क्या होगा असर?

यदि 100% टैरिफ लागू होता है, तो इसका सबसे बड़ा असर विदेशों से आयात की जाने वाली दवाओं की कीमतों पर पड़ेगा. ऐसी दवाएं अमेरिकी बाजार में काफी महंगी हो सकती हैं, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा.

विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर असर पड़ सकता है. कई देशों के साथ अमेरिका के संबंधों में खटास आ सकती है, खासकर उन देशों के साथ जो फार्मास्यूटिकल उत्पादों का बड़े पैमाने पर अमेरिका को निर्यात करते हैं. इसके साथ ही, ग्लोबल सप्लाई चेन में भी रुकावट आने की आशंका है, जिससे दवाओं की उपलब्धता और समय पर डिलीवरी प्रभावित हो सकती है.

फाइजर ने अमेरिकी सरकार के साथ डील की

टैरिफ की घोषणा के बाद फार्मास्यूटिकल सेक्टर की दिग्गज कंपनी फाइजर ने ट्रंप सरकार के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है. इस समझौते के तहत कंपनी अमेरिका में 70 अरब डॉलर का निवेश करेगी. इसके साथ ही, फाइजर ने यह भी वादा किया है कि वह दवाओं की कीमतों में कटौती पर भी विचार करेगी.

इस डील से यह साफ होता है कि फाइजर अब अमेरिका में अपने संचालन का विस्तार करना चाहती है. संभव है कि अन्य दवा कंपनियां भी इस मॉडल को अपनाकर सरकार से समझौते की दिशा में आगे बढ़ें, ताकि उन्हें टैरिफ के दायरे से बाहर रखा जा सके.

'TrumpRx' वेबसाइट लॉन्च की तैयारी

इस बीच एक और दिलचस्प पहलू यह सामने आया है कि ट्रंप प्रशासन एक नई वेबसाइट लॉन्च करने की योजना पर काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य मरीजों को डिस्काउंट पर दवाएं उपलब्ध कराना है.

संभावना है कि इस वेबसाइट का नाम 'TrumpRx' रखा जाएगा. यह एक सर्च टूल की तरह काम करेगा, जिसके जरिए लोग यह पता कर सकेंगे कि कौन सी दवाई किस प्लेटफॉर्म पर कितने डिस्काउंट में मिल रही है. इस वेबसाइट की मदद से ट्रंप प्रशासन देश के नागरिकों को यह दिखाना चाहता है कि सरकार महंगी दवाओं पर लगाम लगाने के लिए सक्रिय प्रयास कर रही है.

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