फिल्म ‘धुरंधर’ ने रिलीज़ के साथ ही दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. रणवीर सिंह, आर. माधवन, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी इस फिल्म में अगर किसी ने सबसे ज्यादा चुपचाप असर छोड़ा है, तो वह हैं अक्षय खन्ना.
‘रहमान डकैत’ के किरदार में उनका ठहरा हुआ, गंभीर और भीतर तक बेचैन कर देने वाला अभिनय फिल्म की आत्मा बन गया है. दिलचस्प बात यह है कि यह यादगार किरदार अक्षय खन्ना ने शुरू में ठुकरा दिया था. सवाल है—आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने बाद में हामी भर दी?
कास्टिंग की सबसे मुश्किल लड़ाई
मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने हाल ही में खुलासा किया कि ‘धुरंधर’ की स्टार कास्ट को एक साथ लाना किसी जंग से कम नहीं था. जब वह इस प्रोजेक्ट से जुड़े, तब तक रणवीर सिंह फिल्म के लिए फाइनल हो चुके थे.आमतौर पर इंडस्ट्री में यह माना जाता है कि एक बड़े स्टार के बाद दूसरे कलाकार पीछे हट जाते हैं, लेकिन छाबड़ा ने इस सोच को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया. उन्होंने हर किरदार को बराबरी की अहमियत दी—चाहे वह मुख्य भूमिका हो या सपोर्टिंग कैरेक्टर.
‘आदित्य को लगा मैं जरूरत से ज्यादा ऊंचा सोच रहा हूं’
जब ‘रहमान डकैत’ के रोल के लिए मुकेश छाबड़ा ने अक्षय खन्ना का नाम सुझाया, तो निर्देशक आदित्य धर थोड़े असमंजस में पड़ गए.छाबड़ा के मुताबिक, आदित्य को लगा कि वह कुछ ज्यादा ही बड़ा दांव खेल रहे हैं. लेकिन छाबड़ा को अपने फैसले पर पूरा भरोसा था. उनका मानना था कि यह किरदार जितना शांत है, उतना ही गहरा भी—और अक्षय खन्ना से बेहतर इसे कोई नहीं निभा सकता.
पहली फोन कॉल… और डांट
अक्षय खन्ना से संपर्क करना ही अपने आप में एक चुनौती थी. मुकेश छाबड़ा ने बताया कि पहली फोन कॉल बिल्कुल भी सहज नहीं रही.उन्होंने हंसते हुए कहा कि अक्षय खन्ना ने कॉल उठाते ही उन्हें फटकार लगा दी और कहा, “क्या पागल हो गया है?”यह वही छवि थी, जिसके लिए अक्षय जाने जाते हैं—बेहद निजी, चयनशील और फिल्मी दुनिया से दूरी बनाए रखने वाले.
स्क्रिप्ट सुनाने की एक जिद
डांट खाने के बावजूद छाबड़ा पीछे नहीं हटे. उन्होंने अक्षय खन्ना से सिर्फ एक ही गुजारिश की—रोल ठुकराने से पहले स्क्रिप्ट सुन लें.काफी सोच-विचार के बाद अक्षय मिलने के लिए राजी हुए, लेकिन शर्त के साथ. मुंबई की चकाचौंध से दूर रहने वाले अक्षय ने साफ कहा कि मुलाकात की जगह और माहौल उनके मुताबिक होना चाहिए.
चार घंटे की खामोशी ने बदल दिया फैसला
अक्षय खन्ना, मुकेश छाबड़ा और आदित्य धर की वह मुलाकात करीब चार घंटे चली.छाबड़ा के मुताबिक, अक्षय खन्ना ने पूरी स्क्रिप्ट लगभग बिना टोके सुनी. वह बस चुपचाप बैठे रहे, सिगरेट पीते रहे और कहानी में डूबते चले गए.जब नरेशन खत्म हुआ, तो कमरे में एक पल की खामोशी छा गई—और फिर अक्षय खन्ना ने कहा, “वाह… ये तो बहुत मज़ेदार है. इसमें बहुत मजा आएगा.”
दो दिन की चुप्पी और फिर ‘हां’
स्क्रिप्ट सुनने के बाद भी फैसला तुरंत नहीं आया. दो दिन तक कोई जवाब नहीं मिला.फिर अचानक मुकेश छाबड़ा का फोन बजा. दूसरी तरफ अक्षय खन्ना थे. उन्होंने बस इतना कहा “चलो करते हैं भाई.”इतना कहकर उन्होंने कॉल काट दी.
रहमान डकैत: कम बोलकर ज़्यादा असर
आज जब दर्शक ‘धुरंधर’ में रहमान डकैत को देखते हैं, तो यह यकीन करना मुश्किल है कि यह रोल कभी अक्षय खन्ना के हाथ से निकल सकता था. उनका संयमित अभिनय, आंखों की खामोशी और भीतर छिपा तूफान इस किरदार को अमर बना देता है. कभी-कभी सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस वही होती है, जो लगभग बनने से रह गई हो—और शायद यही वजह है कि रहमान डकैत आज भी दर्शकों के जेहन में गूंज रहा है.
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