फुकेट से दिल्ली आ रहे एअर इंडिया के विमान एआई-2379 में टर्बुलेंस के दौरान यात्रियों को अचानक तेज झटके का सामना करना पड़ा. प्राथमिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, विमान कुछ ही सेकेंड में तेजी से नीचे आया और महज 30 सेकेंड के भीतर करीब 425 फीट की ऊंचाई गंवा बैठा. इस दौरान सीट बेल्ट नहीं लगाए यात्रियों के उछलकर छत से टकराने और गिरने की घटनाएं हुईं, जिससे विमान के भीतर कुछ समय के लिए अफरातफरी मच गई.
1600 फीट प्रति मिनट तक पहुंची नीचे आने की रफ्तार
जांच में सामने आया है कि घटना के दौरान विमान की लंबवत गति माइनस 1600 फीट प्रति मिनट तक पहुंच गई थी. इसका मतलब है कि विमान औसतन हर सेकेंड करीब आठ मीटर नीचे आ रहा था. घटना के समय विमान ओडिशा के रेंगाली जलाशय के ऊपर लगभग 36 हजार फीट की ऊंचाई पर करीब 480 नॉट की रफ्तार से उड़ रहा था. सुबह करीब 9:33:17 बजे विमान को अचानक तेज झटका लगा और इसके बाद करीब 175 फीट की ऊंचाई में कमी दर्ज की गई.
30 सेकेंड में बदली विमान की ऊंचाई और रफ्तार
प्राथमिक जांच के अनुसार, शुरुआती झटके के बाद अगले 30 सेकेंड में विमान की ऊंचाई करीब 425 फीट कम हो गई. इसी दौरान उसकी गति में भी लगभग 22 नॉट की गिरावट दर्ज की गई. अचानक हुए इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर उन यात्रियों पर पड़ा, जिन्होंने सीट बेल्ट नहीं बांधी थी. विमान के तेजी से नीचे आने के दौरान कुछ यात्री अपनी सीट से उछलकर छत से जा टकराए, जबकि कुछ सीटों और गलियारे में गिर पड़े.
कुछ पलों के लिए भारहीनता जैसा महसूस हुआ
विशेषज्ञों के मुताबिक, विमान की इतनी तेज लंबवत गति के कारण केबिन में कुछ क्षणों के लिए यात्रियों को भारहीनता जैसी स्थिति महसूस हो सकती है. जब विमान अचानक नीचे की ओर तेजी से बढ़ता है, तो सीट बेल्ट नहीं लगाए यात्रियों का शरीर अपनी सीट से ऊपर उठ सकता है. यही वजह है कि टर्बुलेंस के दौरान बिना बेल्ट बैठे यात्रियों को गंभीर चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है. घटना में कई यात्रियों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी, हालांकि विमान बाद में सुरक्षित रूप से दिल्ली पहुंच गया.
मानसून में क्यों बढ़ जाता है टर्बुलेंस का खतरा?
एविएशन विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान हल्का या मध्यम टर्बुलेंस सामान्य माना जाता है. हालांकि, क्यूम्यलोनिंबस यानी सीबी बादलों के भीतर या उनके आसपास बनने वाले तेज ऊर्ध्वाधर वायु प्रवाह गंभीर टर्बुलेंस पैदा कर सकते हैं. ऐसी परिस्थितियों में विमान की ऊंचाई और गति दोनों में अचानक बदलाव हो सकता है. विशेषज्ञों ने गंभीर टर्बुलेंस की स्थिति की तुलना तेज रफ्तार कार के अचानक गहरे गड्ढे में उतरने से की है.
सीट बेल्ट ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच
विशेषज्ञों का कहना है कि टर्बुलेंस को हमेशा पूरी तरह पहले से भांप पाना संभव नहीं होता. ऐसे में यात्रियों के लिए सबसे अहम सुरक्षा उपाय सीट बेल्ट बांधे रखना है, खासकर उड़ान के दौरान जब यात्री अपनी सीट पर बैठे हों. एआई-2379 की प्राथमिक जांच में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि कुछ ही सेकेंड में विमान की ऊंचाई में बड़ा बदलाव हो सकता है और सीट बेल्ट न लगाने पर यात्री गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं.
ये भी पढ़ें: Census 2027: नाम से लेकर आधार और जाति तक, जनगणना में पूछे जाएंगे वाले 40 सवाल, नोटिफिकेशन जारी