नई दिल्ली: भारत की वायुसेना (IAF) ने स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों को मजबूती देने के लिए अब पारंपरिक और धीमी प्रक्रियाओं को पीछे छोड़ते हुए सीधा और निर्णायक रास्ता अपनाया है. तेजस MK1A के लिए इंजन खरीद की प्रक्रिया को तेज करते हुए अब भारतीय वायुसेना और अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) मिलकर सीधे यह सौदा पूरा करेंगे. इसका असर सिर्फ तेजस पर ही नहीं, बल्कि भविष्य के विमान जैसे तेजस MK2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) पर भी पड़ेगा, जिनमें GE के और भी ज्यादा शक्तिशाली इंजन लगाए जाएंगे.
पहले, सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय और लंबी कागजी प्रक्रियाओं के कारण तेजस कार्यक्रम में देरी हो रही थी. अब भारतीय वायुसेना ने यह तय किया है कि वह सीधे GE के साथ मिलकर F-404 इंजन की खरीद और उसके रख-रखाव की योजना को अंजाम देगी. इसका एक बड़ा फायदा यह होगा कि देरी से बचा जा सकेगा और तेजस MK1A की तैनाती को समय पर पूरा किया जा सकेगा.
इंजन की मरम्मत और सेवा भारत में ही होगी
इंजन खरीद के साथ ही भारत में ही Maintenance, Repair & Overhaul (MRO) फैसिलिटी स्थापित करने की योजना पर भी काम चल रहा है. इसका उद्देश्य विदेशी मरम्मत केंद्रों पर निर्भरता को कम करना है. इससे न केवल लागत घटेगी, बल्कि विमानों की उपलब्धता भी अधिक समय तक बनी रहेगी.
तेजस की क्षमताएं जिससे पड़ोसी देश हैं परेशान
LCA तेजस MK1A एक हल्का, बहुउद्देश्यीय और सभी मौसमों में काम करने वाला फाइटर जेट है. यह विमान 4.5 पीढ़ी की आधुनिक तकनीकों से लैस है, जिसमें AESA रडार, हवा में ईंधन भरने की क्षमता, उन्नत हथियार प्रणाली, और अत्याधुनिक एवियोनिक्स शामिल हैं. यह सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे पहाड़ी इलाकों में त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम है. चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के लिए यह चिंता का विषय बनता जा रहा है क्योंकि भारत का स्वदेशी रक्षा उत्पादन लगातार आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है.
GE F-404 और F-414 इंजन
तेजस MK1A में इस्तेमाल होने वाला GE F404-IN20 इंजन पहले भी भारतीय नौसेना और वायुसेना में परीक्षण में सफल रहा है. यह बेहद भरोसेमंद और शक्तिशाली इंजन है. वायुसेना ने अब तक 83 तेजस MK1A जेट का ऑर्डर दिया है, जिनमें 73 एकल-सीट फाइटर और 10 दोहरी-सीट ट्रेनर संस्करण शामिल हैं, ये सभी इसी इंजन से संचालित होंगे.
भविष्य में, तेजस MK2 और AMCA जैसे अधिक उन्नत फाइटर जेट्स में इससे भी अधिक शक्तिशाली GE F414 इंजन लगाए जाएंगे. भारत और GE के बीच हुए समझौते के तहत ये इंजन 80% तकनीकी ट्रांसफर (ToT) के साथ भारत में बनाए जाएंगे. इससे भारत में उच्च तकनीक निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा.
इंजन डिलीवरी की वर्तमान स्थिति और योजना
पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा आने के कारण F-404 इंजन की डिलीवरी में दो साल से अधिक की देरी हुई थी. अब GE द्वारा वर्ष 2025 में 12 इंजनों की डिलीवरी की संभावना जताई गई है, और 2026 से हर वर्ष 20 इंजन भारत भेजे जाएंगे. इस समयबद्ध योजना के आधार पर HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) 2025 के अंत तक छह लड़ाकू और दो ट्रेनर विमान भारतीय वायुसेना को सौंप सकेगा.
Approved batch of 97 Tejas Mk-1A fighters to feature GaN-based AESA radar, an integrated GaN based EW suite (SRK), Meteor capability, and likely full integration of the Astra family and light Rudram variants effectively making this configuration an LCA Mk-1B in all but name. pic.twitter.com/XtbNw5bcF0
— Alpha Defense™🇮🇳 (@alpha_defense) September 21, 2025
तेजस MK1A से स्क्वाड्रन का निर्माण कैसे होगा?
हर तेजस स्क्वाड्रन में 16 लड़ाकू और 2 ट्रेनर विमान होते हैं. जैसे-जैसे GE द्वारा इंजन की सप्लाई होती जाएगी, HAL द्वारा इन विमानों का उत्पादन तेज होगा और भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन क्षमता तेजी से बढ़ेगी. इन विमानों से पुराने हो चुके मिग-21 विमानों की जगह ली जा रही है, जिससे भारत की वायु सुरक्षा और भी मजबूत होगी.
भारत सरकार अब लगभग 113 अतिरिक्त F-404 इंजन खरीदने की योजना बना रही है. इससे पहले 2021 में 99 इंजन का ऑर्डर दिया गया था. अगर यह नया ऑर्डर भी पूरा होता है, तो भारत एशिया में F-404 इंजन से संचालित विमानों का सबसे बड़ा ऑपरेटर बन जाएगा. यह उपलब्धि भारतीय वायुसेना की ताकत और आत्मनिर्भरता का बड़ा प्रतीक मानी जाएगी.
ये भी पढ़ें- इजरायल का वजूद बचाने के लिए हत्याएं, होलोकॉस्ट का डर... जानें कैसे काम करती है खुफिया एजेंसी मोसाद?