नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने बालाकोट एयर स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक में बदली सैन्य रणनीति पर कुछ ऐसी बातें सामने रखी हैं, जो सशस्त्र सेना का दर्द भी बयां कर रही हैं. भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह की हालिया टिप्पणी ने दर्द को उजागर किया.
उन्होंने बेहद साफ और सधे शब्दों में बता दिया कि कैसे बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद सेना को अपने ही देश में शक की निगाहों से देखा गया. वहीं, ऑपरेशन सिंदूर में चीजें बदलीं और शायद पहली बार ऐसा हुआ जब सेना को पूरा भरोसा और आज़ादी मिली, जिसके नतीजे सबके सामने हैं.
जब सेना से पूछा गया, "अंदर हुआ क्या?"
दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने खुलकर बताया कि बालाकोट स्ट्राइक के बाद भारतीय वायुसेना को किस तरह के सवालों का सामना करना पड़ा. उन्होंने बड़ी साफगोई से कहा कि जब हमला हुआ और आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया गया, तब देश में ही कुछ लोग ऐसे थे जो आंखों से 'प्रूफ' मांगने लगे.
उन्होंने कहा, "पिछली बार जब बालाकोट में स्ट्राइक हुई थी, तो बार-बार पूछा जाता था कि दिख क्या रहा है?" एयरफोर्स के पास सैटेलाइट से मिली तस्वीरें थीं, लेकिन वो सिर्फ ‘डॉट्स’ दिखा रही थीं. अंदर की तबाही की तस्वीरें नहीं थीं, और यही वजह थी कि कुछ लोगों ने सेना की उपलब्धि को ही शक के दायरे में खड़ा कर दिया.
#WATCH | Delhi: On Operation Sindoor, Indian Air Force chief Air Chief Marshal AP Singh says, "Last time, when the Balakot strike happened, the Air Force was repeatedly asked, we ask our own people more, but we think less about others, so it was repeatedly asked that nothing is… pic.twitter.com/TpfGb5pXO1
— ANI (@ANI) September 19, 2025
लेकिन एयरफोर्स ने हार नहीं मानी. ह्यूमन इंटेलिजेंस से पता लगाया गया कि वहां कितने आतंकवादियों का अंत हुआ. 'क्रिया-कर्म' की गिनती से अंदर के हालात समझ में आए, लेकिन तब तक बहुत से लोग अपनी राय बना चुके थे.
ऑपरेशन सिंदूर: भरोसा मिला तो नतीजे आए
बालाकोट के अनुभव के बाद, ऑपरेशन सिंदूर में कुछ ऐसा हुआ जो पहले कम ही देखने को मिला था. इस बार राजनीतिक नेतृत्व ने सेना को खुली छूट दी. न कोई बंधन, न कोई राजनीतिक दखल बस एक स्पष्ट निर्देश कि "जो करना है, करो... लेकिन देश की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए."
एयर चीफ ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में सबसे अच्छी बात यह थी कि हमें पूरी आज़ादी मिली. हम अपनी रणनीति खुद बना सके, बिना किसी रुकावट या संकोच के. यह आज़ादी न सिर्फ वायुसेना को मिली, बल्कि थल सेना और नौसेना को भी बराबर का सहयोग मिला.
इस बार, जब हमला हुआ, तो उसकी तस्वीरें भी सामने आईं. फिर चाहे वह मुरीदके में आतंकवादी ठिकानों पर हमला हो या ड्रोन और मिसाइलों से हुई तबाही, अब आलोचकों को जवाब मिल चुका था. अब 'डॉट्स' नहीं, पूरी तस्वीर थी.
जब तीनों सेनाएं बनीं एक ताकत
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने इस बात को भी बड़े गर्व से साझा किया कि ऑपरेशन सिंदूर में केवल एक सेना नहीं, तीनों सेनाओं और एजेंसियों ने मिलकर ऐसा तालमेल दिखाया जो पहले शायद ही कभी हुआ हो.
उन्होंने कहा कि सभी एक साथ बैठते थे, प्लानिंग करते थे, चर्चा करते थे. CDS (Chief of Defence Staff), NSA (National Security Advisor) और अन्य सभी एजेंसियां मिलकर इस मिशन की रूपरेखा तैयार कर रही थीं. यही वजह रही कि इस बार न सिर्फ लक्ष्य तय हुए, बल्कि वह पूरा भी हुआ बिना एक भी सैनिक को नुकसान पहुंचाए.
यह वह भारत था, जहां सेना और सरकार के बीच तालमेल इतना गहरा था कि परिणाम साफ दिखा.
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