Bihar News: बिहार में नशे के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है. आर्थिक अपराध इकाई और सीआईडी से अलग करके एक नए “मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो” का गठन किया गया है. इस नई व्यवस्था का उद्देश्य शराबबंदी और मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों पर एक साथ और ज्यादा सख्ती से नियंत्रण करना है. अब सरकार इस ब्यूरो को राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है.
सरकार की योजना है कि साइबर थानों की तर्ज पर राज्य के हर जिले में अलग नारकोटिक्स थाना स्थापित किया जाए. इससे ड्रग्स से जुड़े मामलों की जांच में तेजी आएगी और अभियुक्तों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी जल्द पूरी हो सकेगी. अभी तक ऐसे मामलों की जांच अलग-अलग इकाइयों के जरिए होती थी, जिससे समन्वय में देरी होती थी. नई व्यवस्था से यह समस्या काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है.
नई कमांड स्ट्रक्चर से बढ़ेगी प्रभावशीलता
हाल ही में राज्य सरकार ने एक नई कमांड संरचना तैयार की है, जिसमें आर्थिक अपराध इकाई से नारकोटिक्स और सीआईडी से मद्य निषेध से जुड़े मामलों को अलग कर एक ही ब्यूरो के अधीन लाया गया है. यह ब्यूरो अब शराब और ड्रग्स दोनों के खिलाफ कार्रवाई करेगा. राज्य स्तर पर थाने की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन अधिसूचना की प्रक्रिया अभी जारी है. इसी वजह से फिलहाल नारकोटिक्स से जुड़े केस अभी भी आर्थिक अपराध इकाई में दर्ज किए जा रहे हैं.
जिला स्तर पर फोकस, जांच और निगरानी होगी तेज
सरकार का अगला बड़ा कदम जिला स्तर पर इस व्यवस्था को लागू करना है. हर जिले में अलग नारकोटिक्स थाना खोलने का प्रस्ताव भेजा गया है. इससे न सिर्फ जांच की रफ्तार तेज होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर निगरानी भी मजबूत होगी. जिला स्तर पर त्वरित कार्रवाई से ड्रग नेटवर्क को शुरुआती स्तर पर ही तोड़ा जा सकेगा.
एडीजी की निगरानी में चलेगा पूरा अभियान
नवगठित ब्यूरो एडीजी (मद्य निषेध) के नेतृत्व में मिशन मोड पर काम करेगा. राज्यभर में सक्रिय 218 एंटी लीकर टास्क फोर्स (ALTF), जो जिला और अनुमंडल स्तर पर काम कर रही हैं, अब इसी ब्यूरो के अधीन होंगी. इससे शराब और ड्रग्स के खिलाफ अभियान का पूरा नियंत्रण एक ही कमांड के पास आ जाएगा, जिससे रणनीति और कार्रवाई दोनों में एकरूपता आएगी.
नए पद सृजित, विशेषज्ञों की होगी भर्ती
इस मिशन को मजबूत करने के लिए सरकार ने 88 नए पदों का सृजन किया है. साथ ही 229 पुराने पदों का स्थानांतरण भी तेजी से किया जा रहा है. इसके अलावा संविदा के आधार पर विशेषज्ञों की भर्ती की तैयारी है, ताकि तकनीकी और खुफिया स्तर पर ड्रग तस्करी के नेटवर्क को तोड़ा जा सके. आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों की मदद से जांच और भी सटीक और प्रभावी हो सकेगी.
तकनीकी अड़चनें जल्द होंगी दूर
फिलहाल राज्य स्तरीय थाने की अधिसूचना लंबित होने के कारण केस दर्ज करने में कुछ तकनीकी बाधाएं सामने आ रही हैं. लेकिन जैसे ही जिला स्तर पर नारकोटिक्स थाने सक्रिय हो जाएंगे, बिहार पुलिस को ड्रग पेडलर्स और बड़े सिंडिकेट के खिलाफ सीधे और तेज कार्रवाई करने का अधिकार मिल जाएगा.
नशे के खिलाफ सबसे बड़ा अभियान साबित हो सकता है कदम
सरकार जल्द ही जिला स्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की संरचना और कार्यप्रणाली को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी करने वाली है. माना जा रहा है कि यह पहल बिहार में नशे के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और व्यापक प्रशासनिक कार्रवाई साबित हो सकती है, जो राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करेगी.
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