Pakistan Fake News On Rafale: भारत के आतंकवाद विरोधी अभियान ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को जो हार झेलनी पड़ी, उसके बाद से पाकिस्तान ने फिर वही रणनीति अपनाई है, जिसमें वह माहिर माना जाता है, झूठ और फर्जी खबरों के सहारे भ्रम फैलाना. लेकिन इस बार उसका प्रोपेगेंडा इतनी आसानी से बेनकाब हो गया कि उसे खुद सफाई देनी पड़ी.
पाकिस्तानी मीडिया और प्रोपेगेंडा अकाउंट्स ने 26/11 की बरसी के मौके पर भारत विरोधी माहौल बनाने के लिए एक नया हथकंडा अपनाया. उन्होंने दावा किया कि राफेल फाइटर जेट की डिलीवरी भारतीय नौसेना को केवल 10 सप्ताह के पायलट ट्रेनिंग के बाद ही होगी. इस झूठ को फैलाने के लिए उन्होंने फ्रांस की प्रसिद्ध विमान निर्माण कंपनी डसॉल्ट एविएशन का फर्जी लेटर शेयर किया.
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— D-Intent Data (@dintentdata) November 26, 2025
ANALYSIS: Fake
FACT: Pakistani propaganda accounts are circulating a fake and fabricated statement falsely claiming that Dassault Aviation has said the delivery of Rafale jets to the Indian Navy will take place only after 10 weeks of pilot training. (1/5) pic.twitter.com/S24tlofxoR
पाकिस्तान का झूठ और फैक्ट चेक
D-Intent Data और अन्य विश्लेषणों के मुताबिक, यह पूरी खबर 100% मनगढ़ंत और फर्जी है. डसॉल्ट एविएशन ने कभी ऐसा कोई बयान नहीं जारी किया. इस झूठ का मकसद साफ था, भारत की सैन्य क्षमता पर शक डालना. ऑपरेशन सिंदूर में मिली हार के बाद भारतीय सेना की छवि को धूमिल करना. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के सैन्य उपकरणों के भरोसे को कमजोर दिखाना.
असलियत यह है कि राफेल जेट की डिलीवरी और पायलट ट्रेनिंग का समय पूरी तरह से भारत और फ्रांस के बीच हुए समझौते के तहत निर्धारित किया गया है और इसमें कोई बदलाव या शर्त नहीं है. भारतीय नौसेना के पायलट प्रशिक्षण की अवधि पहले से तय शेड्यूल के अनुसार चल रही है और इसे लेकर किसी भी कंपनी ने ऐसा बयान नहीं दिया.
पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा का पैटर्न
विशेषज्ञ बताते हैं कि पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा अकाउंट्स लगातार वही रणनीति अपनाते रहे हैं:
ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह वही रणनीति थी, लेकिन diesmal फैक्ट चेकिंग और मीडिया की सतर्कता के कारण झूठ जल्दी ही बेनकाब हो गया.
भारत की प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय सच्चाई
फ्रांस सरकार ने स्पष्ट किया कि डसॉल्ट एविएशन ने कोई भी ऐसा बयान जारी नहीं किया. इसके साथ ही भारत ने भी अपने माध्यमों के जरिए सच्चाई को सार्वजनिक किया. विशेषज्ञों के अनुसार, यह पाकिस्तान के फर्जी प्रचार अभियान की पोल खोलने का एक और उदाहरण है, जो यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय और सोशल मीडिया पर सतर्क रहने की जरूरत कितनी महत्वपूर्ण है.
इस घटना से यह भी साफ हो गया कि पाकिस्तान का झूठ न केवल अपनी जनता को भ्रमित करने के लिए है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को प्रभावित करने की कोशिश भी है. लेकिन जैसे-जैसे सच सामने आता है, ऐसे प्रयास हमेशा ही विफल साबित होते हैं.
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