नेपाल के बाद इस देश में भी बैन हुए सोशल मीडिया एप्स! YouTube, X, Instagram और WhatsApp पर लगी पाबंदी

Social Media Apps Ban: तुर्किए में एक बार फिर से राजनीतिक उथल-पुथल ने डिजिटल दुनिया को हिलाकर रख दिया है. सरकार ने यूट्यूब, एक्स, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अस्थायी पाबंदी लगा दी, जिसने पूरे देश में हलचल मचा दी.

After Nepal Turkiye bans X WhatsApp and other social media sites
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Social Media Apps Ban: तुर्किए में एक बार फिर से राजनीतिक उथल-पुथल ने डिजिटल दुनिया को हिलाकर रख दिया है. सरकार ने यूट्यूब, एक्स, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अस्थायी पाबंदी लगा दी, जिसने पूरे देश में हलचल मचा दी. यह कदम उस समय उठाया गया जब इस्तांबुल में विपक्षी रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी (सीएचपी) के मुख्यालय पर पुलिस और समर्थकों के बीच तनाव भड़क उठा. यह घटना न केवल तुर्किए की राजनीतिक अस्थिरता को दर्शाती है, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी पर बढ़ते सरकारी नियंत्रण की ओर भी इशारा करती है. आइए, इस घटनाक्रम की गहराई में जाएं और समझें कि क्या है इसका सच.

सोशल मीडिया पर अचानक पाबंदी

तुर्किए में रविवार, 7 सितंबर 2025 की रात से ही सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स की पहुंच सीमित कर दी गई. इंटरनेट वॉचडॉग नेटब्लॉक्स के अनुसार, एक्स, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बैंडविड्थ थ्रॉटलिंग शुरू हुई, जो सोमवार तक 12 घंटे से अधिक समय तक जारी रही. इस दौरान इस्तांबुल में सीएचपी मुख्यालय के आसपास पुलिस की बैरिकेडिंग और प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प के बाद यह कदम उठाया गया. कई यूजर्स ने वीपीएन का सहारा लिया ताकि इस पाबंदी से बचा जा सके, लेकिन इंटरनेट की अस्थिरता ने आम जनजीवन, खासकर स्कूलों के फिर से खुलने के पहले दिन, को प्रभावित किया.

सीएचपी मुख्यालय पर तनाव

Euronews की रिपोर्ट के मुताबिक, सीएचपी के इस्तांबुल मुख्यालय को कई दिनों से पार्टी समर्थकों ने घेर रखा था ताकि सरकार द्वारा नियुक्त ट्रस्टी गुरसेल टेकिन को दफ्तर का नियंत्रण लेने से रोका जा सके. टेकिन को सितंबर 2023 में चुने गए ओज़गुर सेलिक की जगह नियुक्त किया गया था, जिसे सीएचपी ने अवैध करार दिया. रविवार रात से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में समर्थकों ने पुलिस की बैरिकेडिंग का विरोध किया, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया. सीएचपी नेता ओज़गुर ओज़ल ने इसे “घेराबंदी” करार देते हुए समर्थकों से मुख्यालय की रक्षा करने की अपील की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाई गई.

सरकारी दबाव और विपक्ष पर निशाना

मार्च 2025 से तुर्किए सरकार ने विपक्षी दल सीएचपी पर दबाव बढ़ा दिया है. इस्तांबुल के मेयर और 2028 के राष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार एकरेम इमामोग्लू की गिरफ्तारी ने देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भड़काए थे. इमामोग्लू पर भ्रष्टाचार और आतंकवादी संगठन से संबंधों जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, जिन्हें सीएचपी ने राजनीति से प्रेरित बताया. इसके बाद 100 से अधिक लोगों, जिसमें पत्रकार और व्यवसायी शामिल थे, को हिरासत में लिया गया. इस घटना के बाद से सरकार ने बार-बार सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिसे आलोचक अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला मानते हैं.

सूचना प्रौद्योगिकी प्राधिकरण की चुप्पी

आम तौर पर तुर्किए की सूचना और संचार प्रौद्योगिकी प्राधिकरण (BTK) सोशल मीडिया या वेबसाइट्स पर प्रतिबंध की स्थिति में आधिकारिक बयान जारी करती है, लेकिन इस बार कोई घोषणा नहीं हुई. BTK की वेबसाइट पर भी प्रतिबंधों का कोई उल्लेख नहीं मिला. फिर भी, सोमवार शाम 5 बजे तक इस्तांबुल में प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच पूरी तरह बंद थी, हालांकि कुछ अन्य प्रांतों में यूजर्स ने इन सेवाओं के चलने की बात कही. यह स्थिति तुर्किए में इंटरनेट सेंसरशिप के बढ़ते चलन को दर्शाती है, जहां सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के नाम पर डिजिटल नियंत्रण बढ़ा रही है.

विपक्षी नेतृत्व पर संकट

सीएचपी के भीतर नेतृत्व को लेकर भी तनाव गहरा रहा है. सितंबर 2023 में चुने गए मौजूदा पार्टी प्रमुख ओज़गुर ओज़ल के खिलाफ अदालत में एक मामला चल रहा है, जिसमें उनकी नियुक्ति को रद्द करने और पूर्व नेता केमल किलिचदारोग्लू को फिर से पार्टी की कमान सौंपने की मांग की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किलिचदारोग्लू की वापसी होती है, तो सीएचपी में और अधिक अंतर्कलह बढ़ सकती है. हालांकि, 21 सितंबर को होने वाली असाधारण कांग्रेस में ओज़ल अभी भी मजबूत स्थिति में हैं. इस बीच, सरकार की ओर से विपक्षी नेताओं और समर्थकों पर लगातार कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है.

डिजिटल सेंसरशिप का इतिहास

तुर्किए में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध कोई नई बात नहीं है. मार्च 2025 में इमामोग्लू की गिरफ्तारी के बाद भी एक्स, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर पाबंदी लगाई गई थी. इसके अलावा, अक्टूबर 2024 में एक बम विस्फोट और फरवरी 2023 में भूकंप जैसी घटनाओं के बाद भी सरकार ने इंटरनेट नियंत्रण को कड़ा किया था. आलोचकों का कहना है कि तुर्किए का कानून नंबर 5651 सरकार को अस्पष्ट आधारों पर सामग्री को ब्लॉक करने की अनुमति देता है, जिसका इस्तेमाल अक्सर विपक्षी आवाजों को दबाने के लिए होता है. प्रेस स्वतंत्रता पर नजर रखने वाली संस्था रिपोटर्स विदाउट बॉर्डर्स के अनुसार, तुर्किए 2025 में विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में 180 देशों में 159वें स्थान पर है.

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