भारत के बाद कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका की डाक सेवाएं रोकी, क्या है सर्विस सस्पेंड करने की वजह

भारत समेत कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका को भेजी जाने वाली डाक सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है.

After India, many European countries stopped US postal services
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

नई दिल्ली/वाशिंगटन: भारत समेत कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका को भेजी जाने वाली डाक सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है. इसका कारण अमेरिका द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए टैरिफ नियम हैं, जो अंतरराष्ट्रीय डाक और पार्सल सेवाओं को प्रभावित कर रहे हैं.

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका ने 30 जुलाई 2025 को एक नया कार्यकारी आदेश (Executive Order No. 14324) जारी किया, जिसमें पहले से लागू duty-free threshold को समाप्त कर दिया गया है. इस आदेश के तहत 800 डॉलर (लगभग ₹70,000) तक के सामान पर मिलने वाली टैरिफ छूट अब 29 अगस्त से बंद हो जाएगी.

भारत की प्रतिक्रिया

भारत के संचार मंत्रालय ने घोषणा की है कि अमेरिका के नए टैरिफ ढांचे में स्पष्टता की कमी के कारण भारतीय डाक विभाग (India Post) ने अमेरिका के लिए डाक और पार्सल बुकिंग को 25 अगस्त 2025 से अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया है. इस फैसले का प्रभाव केवल पार्सल और वस्तुओं के आदान-प्रदान पर होगा. सामान्य पत्राचार, जो केवल कागज आधारित होता है, उसकी सेवाएं संभवतः जारी रहेंगी.

मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका द्वारा लागू की जा रही नई सीमा शुल्क प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है, जिससे डाक सेवाओं के जरिए भेजे जा रहे पार्सलों पर कितना शुल्क लगेगा, यह अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है. ऐसे में अनावश्यक परेशानियों से बचने के लिए यह अस्थायी कदम उठाया गया है.

यूरोप के कई देशों ने भी सेवाएं रोकीं

अमेरिका के इस निर्णय का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड्स, ऑस्ट्रिया जैसे कई यूरोपीय देशों ने भी अमेरिका के लिए डाक सेवाएं या तो पूरी तरह से रोक दी हैं या फिर उनमें भारी कटौती की है.

ब्रिटेन की रॉयल मेल (Royal Mail) ने अमेरिका के लिए सभी प्रकार के पैकेज भेजने पर अस्थायी रोक लगा दी है. इसके अलावा, $100 से अधिक मूल्य वाले सामान पर अब 10% अतिरिक्त शुल्क भी लगाया जा रहा है.

जर्मनी की डॉयचे पोस्ट (Deutsche Post) ने कहा है कि निजी और व्यावसायिक दोनों तरह के ग्राहकों के लिए अमेरिका को भेजे जाने वाले पार्सल की सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दी गई हैं.

फ्रांस और नीदरलैंड्स के डाक विभागों ने भी टैरिफ वसूली की स्पष्ट प्रक्रिया नहीं होने के चलते अमेरिका को डाक सेवाएं बंद कर दी हैं.

इटली के डाक विभाग ने 23 अगस्त से अमेरिका जाने वाले पार्सल्स पर रोक लगा दी है, हालांकि सामान्य पत्राचार की अनुमति अभी दी जा रही है.

टैरिफ बदलाव का कारण और प्रभाव

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम देश के आर्थिक हितों और घरेलू उत्पादकों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है. नए आदेश को इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) के तहत लागू किया गया है, जिसके तहत सरकार को आपातकालीन आर्थिक निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है.

इस निर्णय के कारण अब अमेरिका में डाक के जरिए भेजे गए हर प्रकार के सामान पर मूल्य के आधार पर सीमा शुल्क लगेगा, चाहे वह कितनी भी कम कीमत का क्यों न हो. पहले, $800 तक के पार्सल पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगता था, जिससे दुनिया भर से छोटे व्यापारियों को अमेरिका में अपने ग्राहक तक सामान भेजना आसान था. अब यह प्रक्रिया महंगी और जटिल हो जाएगी.

छोटे व्यापारियों पर असर

इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित वे छोटे और मध्यम व्यापारी होंगे जो भारत या यूरोप से अमेरिका को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए छोटे पैकेट्स भेजते थे. अब उन्हें न केवल हर पार्सल पर कस्टम ड्यूटी देनी होगी, बल्कि पार्सल के भीतर भेजे गए सामान की कीमत, श्रेणी और टैक्स कैटेगरी को भी स्पष्ट रूप से घोषित करना होगा.

इसके अलावा, ग्राहक पक्ष को भी अब पार्सल रिसीव करते समय अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है, जिससे उपभोक्ता अनुभव पर नकारात्मक असर पड़ेगा.

ये भी पढ़ें- नौसेना के लिए 6 पनडुब्बियां और वायुसेना के लिए रेम्पेज मिसाइल खरीदेगा भारत, देखें दोनों की ताकत