हमास के बाद हिजबुल्लाह का खात्मा तय! उधार की जिंदगी जी रहे आतंकी; क्या इजरायल बरतेगा नरमी?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आते ही इजराइल को पूरी तरह से समर्थन देने का ऐलान किया था, और इसके बाद से इजराइल ने हमास और हिजबुल्लाह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है.

After Hamas Hezbollah end is certain Terrorists are living on debt Israel
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: Freepik

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आते ही इजराइल को पूरी तरह से समर्थन देने का ऐलान किया था, और इसके बाद से इजराइल ने हमास और हिजबुल्लाह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. इजराइल गाजा और लेबनान में लगातार हवाई हमले कर रहा है, और इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन इजराइल को सैन्य और आर्थिक मदद लगातार जारी रखे हुए है. इन हमलों के परिणामस्वरूप हिजबुल्लाह अब हथियारों की कटौती और बातचीत के लिए तैयार हो गया है.

इजराइल का मुख्य उद्देश्य: दुश्मनों का खात्मा

इजराइल का सबसे बड़ा लक्ष्य भविष्य में आने वाले किसी भी दुश्मन के खतरे को खत्म करना है, और इसके लिए हिजबुल्लाह और हमास जैसी संगठनों की सैन्य ताकत को नष्ट करना जरूरी है. इस कड़ी कार्रवाई के बाद हिजबुल्लाह ने अब बातचीत का रास्ता अपनाने का विचार किया है और हथियारों पर चर्चा करने के लिए तैयार है.

हिजबुल्लाह की निरस्त्रीकरण की मांग

न्यूज एजेंसी रायटर्स के सूत्रों के अनुसार, हिजबुल्लाह ने इजराइल से एक शर्त रखी है. हिजबुल्लाह ने कहा है कि अगर इजराइल दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना हटा लेता है और हमले रोकता है, तो वह अपने हथियारों पर बातचीत करने के लिए तैयार है. अगर ऐसा होता है तो यह ईरान के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है, क्योंकि ईरान की मध्य पूर्व में प्रभावी पकड़ कमजोर हो जाएगी.

लेबनान के नए राष्ट्रपति का इरादा

लेबनान के नये अमेरिकी समर्थित राष्ट्रपति जोसेफ औन ने जनवरी में सत्ता संभालते ही हथियारों के नियंत्रण पर राज्य का एकाधिकार स्थापित करने का संकल्प लिया था. राष्ट्रपति औन का कहना है कि वह जल्द ही हिजबुल्लाह के साथ हथियारों के मुद्दे पर बातचीत शुरू करेंगे, ताकि लेबनान की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और वहां की राजनीति में स्थिरता बनी रहे.

ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया भी बदल रहा है रुख

लेबनान में हिजबुल्लाह अकेला नहीं है, बल्कि ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया समूह भी अब अपने हथियारों को छोड़ने पर विचार कर रहे हैं. रॉयटर्स से बातचीत में इराक के 10 वरिष्ठ अधिकारियों और कमांडरों ने बताया कि ईरान समर्थित कई शक्तिशाली मिलिशिया समूह, जो पहले अमेरिकी ट्रंप प्रशासन के साथ संघर्ष कर रहे थे, अब बढ़ते संघर्ष के खतरे को टालने के लिए हथियारों का त्याग करने को तैयार हैं.

यह बदलाव ईरान और उसकी समर्थक ताकतों के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है, क्योंकि यह मध्य पूर्व में उनके प्रभाव को कमजोर कर सकता है और उनकी रणनीतियों पर सवाल उठा सकता है.

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