फिलीस्तीन का सालों पुरानी मांग होगी पूरी! फ्रांस के बाद ब्रिटेन ने किया समर्थन, अब क्या करेंगे नेतन्याहू?

Britain On palestine: मध्य पूर्व में बदलते समीकरण अब यूरोप की राजधानी तक गूंजने लगे हैं. फ्रांस, स्पेन और आयरलैंड के बाद अब ब्रिटेन भी उस दिशा में कदम बढ़ा रहा है .

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Britain On palestine: मध्य पूर्व में बदलते समीकरण अब यूरोप की राजधानी तक गूंजने लगे हैं. फ्रांस, स्पेन और आयरलैंड के बाद अब ब्रिटेन भी उस दिशा में कदम बढ़ा रहा है जो इजरायल के लिए राजनीतिक झटका और अमेरिका के लिए कूटनीतिक असहजता बन सकता है, फिलीस्तीन को राज्य के रूप में मान्यता देना.

ब्रिटिश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने हाल ही में पुष्टि की है कि 2029 से पहले, यानी मौजूदा संसद कार्यकाल के दौरान ही, यूनाइटेड किंगडम फिलीस्तीन को औपचारिक मान्यता दे सकता है. यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब गाजा में युद्ध और मानवीय संकट ने यूरोप में राजनीतिक हलचल तेज़ कर दी है.

"इस संसद में ही मान्यता संभव" 

ब्रिटेन के व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने यह स्पष्ट किया है कि फिलीस्तीन को मान्यता देने का विचार सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह सरकार की एक "कथित रणनीतिक प्राथमिकता" है. जब उनसे पूछा गया कि क्या यह कदम मौजूदा संसद के दौरान ही उठाया जाएगा, तो उनका सीधा जवाब था, "हां, अगर इससे हमें वह सफलता मिलती है जिसकी हमें ज़रूरत है." यह बयान यह दर्शाता है कि अब ब्रिटेन फिलीस्तीन को लेकर अपनी ऐतिहासिक भूमिका और नैतिक ज़िम्मेदारी को टालने के मूड में नहीं है.

गाज़ा संकट ने बदली सोच

गाज़ा में बच्चों की मौत, भूखमरी, और मानवीय त्रासदी ने ब्रिटेन की जनता और सांसदों के भीतर गहरी बेचैनी पैदा की है. लेबर पार्टी के भीतर भी प्रधानमंत्री कीर स्टारमर पर दबाव बढ़ रहा है कि वे ‘टू-स्टेट सलूशन’ को सिर्फ विचार तक सीमित न रखें, बल्कि उसे एक ठोस कदम में तब्दील करें. हालांकि स्टारमर पहले इस मुद्दे को "प्रदर्शनकारी" और "प्रतीकात्मक" बताते रहे हैं, पर अब संसद में 250 से अधिक सांसद उनकी सोच से असहमति जता चुके हैं.

फ्रांस के बाद ब्रिटेन भी?

अब तक स्पेन, नॉर्वे, आयरलैंड और फ्रांस जैसे देश फिलीस्तीन को मान्यता दे चुके हैं. ब्रिटेन की एंट्री इस सूची में सिर्फ एक और नाम नहीं होगी, बल्कि यह एक ऐतिहासिक कदम होगा क्योंकि इजरायल की स्थापना में ब्रिटेन की भूमिका ऐतिहासिक रही है. ब्रिटेन अभी भी वैश्विक कूटनीति में अमेरिका के बाद सबसे मजबूत पश्चिमी आवाज़ माना जाता है. यह कदम इजरायल की नीतियों पर पश्चिमी असहमति का खुला संकेत होगा. ब्रिटिश संसद की विदेश मामलों की समिति पहले ही सरकार से कह चुकी है कि वो अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर "साहसिक और निर्णायक" कार्रवाई करे.

इजरायल पर प्रतिबंध और राहत एजेंसी को फंड बहाली

इस साल की शुरुआत में ब्रिटेन ने फिलीस्तीनी राहत एजेंसी के लिए फंड बहाल किया और कुछ इजरायली कट्टरपंथी नेताओं पर प्रतिबंध भी लगाए. इजरायल ने इन कदमों की कड़ी आलोचना की थी, लेकिन अब ब्रिटेन एक कदम और आगे बढ़ने की तैयारी में है. गाज़ा संकट पर ब्रिटेन की आपातकालीन कैबिनेट बैठक बुलाना यह दर्शाता है कि फिलीस्तीन की मान्यता सिर्फ भावनात्मक नहीं, बल्कि रणनीतिक और अंतरराष्ट्रीय नीति का हिस्सा बनती जा रही है.

क्या ब्रिटेन से बदलेगा पश्चिम एशिया का संतुलन?

यदि ब्रिटेन भी फिलीस्तीन को मान्यता देता है, तो यह इजरायल-अमेरिका के गठबंधन के लिए एक कूटनीतिक चेतावनी जैसा होगा. यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश भी देगा कि गाज़ा में हो रहे अत्याचारों पर अब चुप्पी नहीं रहेगी. साथ ही यह संकेत भी मिल सकता है कि यूरोप अब अमेरिका के दबाव से हटकर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाने की दिशा में सोच रहा है.

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