कुवैत स्थित अमेरिकी बेस पर मार्च 2026 में हुए ईरान के हमले को लेकर अब अमेरिकी सैनिकों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. यह वही बेस था, जहां एक जुझारू हमला हुआ था, जिसमें छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे. इस हमले को अमेरिका ने कभी भी हार के रूप में स्वीकार नहीं किया था, लेकिन अब सैनिकों के इंटरव्यू के जरिए इसका एक अलग ही पक्ष सामने आया है.
सैनिकों ने खोली सच्चाई की परतें
कुवैत के इस बेस पर तैनात रहे सैनिकों ने सीबीएस न्यूज को दिए गए एक इंटरव्यू में यह खुलासा किया कि ईरान ने इस हमले को पूरी योजना के तहत अंजाम दिया था. सैनिकों ने स्वीकार किया कि यह हमला इतना जोरदार था कि वे बचने में नाकाम रहे. इस हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए थे और बीस अन्य घायल हुए थे. सैनिकों ने इस बात को माना कि यह हमला अमेरिका के लिए एक गंभीर हार थी और इसे नकारा नहीं जा सकता.
ट्रंप प्रशासन के बयान की असलियत
इस हमले के बाद, जब अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि बेस किलेबंद था और एक ड्रोन गलती से बेस तक पहुंच गया था, तो यह बयान सैनिकों के इंटरव्यू से बिलकुल अलग साबित हुआ. सैनिकों ने बताया कि यह हमला एक 'गलती' नहीं, बल्कि ईरान की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा था. उन्होंने कहा कि उस दिन की स्थिति इतनी गंभीर थी कि उनकी जान बचाना असंभव हो गया था.
हमला था अप्रत्याशित और जानलेवा
अमेरिकी सैनिकों के अनुसार, हमला उस दिन हुआ जब वे गोला-बारूद के बारे में डेटा एकत्रित कर रहे थे. उसी समय शाहेद ड्रोन ने बेस पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया. इस हमले में छह सैनिकों की मौके पर ही मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए. सैनिकों ने बताया कि हमले के बाद चारों ओर आग की लपटें उठ रही थीं और स्थिति बेहद भयावह थी. यह हमला 1 मार्च को हुआ था, जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या कर दी थी.
किलेबंदी का दावा हुआ झूठा
रक्षा मंत्री द्वारा की गई किलेबंदी की बात पर सैनिकों ने कड़ा विरोध जताया. एक सैनिक ने इस बारे में बताया कि वहाँ एक साधारण दीवार जरूर थी, जो आमने-सामने की गोलीबारी में काम आ सकती थी, लेकिन हवाई हमले से बचने के लिए वहां कुछ भी नहीं था. सैनिकों के अनुसार, इस बेस पर तैनात 60 जवान खुले मैदान में थे और उन्हें बचने का कोई रास्ता नहीं मिला.
कुवैत बेस की बर्बादी
कुवैत के दक्षिणी हिस्से में स्थित यह बेस, जो शुरू से ही ईरान की रडार पर था, अब पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है. सैनिकों का कहना है कि इस हमले ने न सिर्फ अमेरिकी सेना की तैयारी और सुरक्षा पर सवाल उठाए, बल्कि ट्रंप प्रशासन की रणनीति की भी पोल खोल दी.
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