काबुल: अफगानिस्तान को हाल के महीनों में गंभीर दवा संकट का सामना करना पड़ रहा है. पाकिस्तान के साथ व्यापारिक संबंधों में खटास के बाद देश में आवश्यक दवाओं की आपूर्ति प्रभावित हो गई है. सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान अब तालिबानी सरकार को दवाइयों की आपूर्ति के बहाने राजनीतिक दबाव बनाने में लगा है.
तालिबानी अधिकारियों ने इस संबंध में साफ कहा है कि अफगानिस्तान किसी भी विदेशी दबाव के अधीन नहीं होगा. स्वास्थ्य मंत्री नूर जलाल ने स्पष्ट किया कि देश ने भारत के साथ दवाओं की आपूर्ति के लिए बड़ा समझौता किया है, जिससे स्वास्थ्य क्षेत्र में संकट जल्द ही कम होगा.
भारत के साथ 10 करोड़ डॉलर का दवा समझौता
अफगान सरकार ने भारत के साथ औपचारिक समझौता किया है, जिसके तहत भारत से आवश्यक दवाइयां आयात की जाएंगी. तालिबानी स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, यह समझौता लगभग 10 करोड़ डॉलर का है और भारत की दवा कंपनियों के साथ हुआ है.
नूर जलाल ने कुनार प्रांत में 200-बेड वाले नए अस्पताल का उद्घाटन करते हुए कहा कि देश अब अपने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है. उन्होंने यह भी जोर दिया कि अफगानिस्तान स्वतंत्र है और किसी देश के आदेशों को स्वीकार नहीं करेगा.
स्वतंत्र उत्पादन बढ़ाने की पहल
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अफगानिस्तान में अब करीब 200 दवा निर्माण कंपनियां स्थापित हो चुकी हैं. सरकार स्थानीय उत्पादन बढ़ाने और अन्य कंपनियों को भी दवा निर्माण के लिए प्रोत्साहित कर रही है. हालांकि उन्होंने माना कि मौजूदा उत्पादन पूरी तरह देश की मांग को पूरा नहीं कर पाएगा, इसलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है.
तालिबानी सरकार के इस कदम का उद्देश्य न केवल पाकिस्तान पर निर्भरता कम करना है, बल्कि देश में स्वास्थ्य और औषधीय आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना भी है.
तालिबानी उपप्रधानमंत्री का पाकिस्तान को कड़ा संदेश
इस बीच, तालिबान के उप प्रधानमंत्री मुल्ला गनी बरादर ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि अफगानिस्तान अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा करेगा. उन्होंने कमांडो सैनिकों के ग्रेजुएशन समारोह में स्पष्ट किया कि कोई भी देश अफगान जमीन और संप्रभुता के प्रति गलत नजरिया न रखे.
बरादर ने कहा कि अफगानिस्तान सभी देशों के साथ शांतिपूर्ण और आपसी रिश्ते रखना चाहता है, लेकिन किसी भी हमले या हस्तक्षेप का करारा जवाब दिया जाएगा.
पाकिस्तान के साथ बढ़ते तनाव के कारण
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव पिछले कुछ महीनों में लगातार बढ़ा है. दोनों देशों के रिश्ते विशेष रूप से तब बिगड़े जब पाकिस्तान ने हाल ही में हवाई हमले किए, जिनमें 9 बच्चों सहित 10 लोगों की मौत हुई. तालिबान ने इसे गंभीर उल्लंघन माना है और स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसे हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान ने भारत के साथ दवा समझौते और स्थानीय उत्पादन बढ़ाने की पहल करके पाकिस्तान पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाई है. यह कदम न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में मददगार है, बल्कि तालिबान सरकार के राजनीतिक और रणनीतिक आत्मविश्वास को भी दर्शाता है.
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