Indus Waters Treaty: पिछले एक हफ्ते से पाकिस्तान में सिंधु जल समझौते को लेकर काफी हलचल मची हुई है. वहां के नेता और अधिकारी लगातार बयान दे रहे हैं और भारत से पानी छोड़ने और बातचीत फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं.
पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने तो इस मुद्दे की तुलना होर्मुज स्ट्रेट जैसे बड़े विवाद से कर दी और यहां तक कहा कि इसका जवाब सैन्य तरीके से भी दिया जा सकता है. अब सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि पाकिस्तान इतनी चिंता में है? और वह इसे सिर्फ पानी का मुद्दा न मानकर अपनी सुरक्षा से जोड़कर क्यों देख रहा है?
1. भारत ने डेटा देना बंद किया
भारत ने मई 2025 में सिंधु जल समझौते को सस्पेंड कर दिया था. इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ नदियों (सिंधु, चिनाब और झेलम) के पानी से जुड़ा डेटा साझा करना बंद कर दिया.
पाकिस्तान का कहना है कि उसने कई बार भारत को पत्र लिखे और बैठकों की मांग की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. पाकिस्तान को अब यह समझ नहीं आ रहा कि नदी में पानी का बदलाव प्राकृतिक है या किसी मानवीय कारण से हो रहा है.
2. पानी को लेकर आरोप
पाकिस्तान का आरोप है कि भारत पानी को अपने हिसाब से कभी रोकता है और कभी छोड़ देता है. उनका कहना है कि जब खेती के लिए पानी की जरूरत होती है, तब पानी कम कर दिया जाता है. और जब फसल तैयार हो जाती है, तब अचानक ज्यादा पानी छोड़ दिया जाता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है.
पाकिस्तान यह भी दावा कर रहा है कि भारत कुछ बैराज और आउटलेट सिस्टम का इस्तेमाल करके पानी के बहाव को अपने अनुसार नियंत्रित कर सकता है, जो उनके लिए चिंता का कारण है.
3. बड़े प्रोजेक्ट से बढ़ी चिंता
भारत पश्चिमी नदियों के पानी का ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. इनमें चिनाब-व्यास लिंक प्रोजेक्ट भी शामिल है. पाकिस्तान का कहना है कि इससे लाखों एकड़-फीट पानी का रुख बदला जा सकता है, जो उनके हिस्से का पानी है.
4. पाकिस्तान की निर्भरता
पाकिस्तान के लिए यह मामला बहुत गंभीर है क्योंकि:
इसलिए उन्हें डर है कि पानी की कमी से खेती, रोजगार और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है.
5. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहुंचा मामला
पाकिस्तान अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश कर रहा है. उनका कहना है कि कानूनी मंचों से उन्हें कुछ फैसले मिले हैं, जिससे वे मानते हैं कि समझौता अभी भी लागू है. लेकिन भारत का रुख साफ है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और हित सबसे ऊपर हैं.
भारत का रुख
भारत का कहना है कि आतंकवाद और पानी साथ-साथ नहीं चल सकते. जब तक सीमा पार गतिविधियों पर रोक नहीं लगती, तब तक पानी से जुड़े फैसले भारत अपने हितों के अनुसार ही लेगा. वहीं पाकिस्तान के लिए यह मुद्दा अब सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि एक बड़ी आर्थिक और सुरक्षा चिंता बन गया है.
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