Modi Cabinet Expansion: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार और फेरबदल की संभावना तेज हो गई है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आने वाले दिनों में कैबिनेट में नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है, जबकि कई मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. हाल ही में प्रधानमंत्री की केंद्रीय सचिवों के साथ हुई बैठक को भी इसी संभावित बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है.
सचिवों की बैठक के बाद बढ़ी अटकले
मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की. इस दौरान अलग-अलग मंत्रालयों के कामकाज और उपलब्धियों का आकलन किया गया. माना जा रहा है कि सरकार अगले चरण की प्राथमिकताओं और योजनाओं को ध्यान में रखते हुए नई टीम तैयार करने की दिशा में काम कर रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मंत्रालयों के प्रदर्शन की समीक्षा के आधार पर कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वालों को अहम विभाग मिल सकते हैं.
क्यों जरूरी माना जा रहा है कैबिनेट विस्तार?
फिलहाल केंद्र सरकार में कई मंत्री पद खाली हैं. मौजूदा व्यवस्था में प्रधानमंत्री सहित कुल 72 मंत्री कार्यरत हैं, जबकि संवैधानिक सीमा के अनुसार केंद्र सरकार में अधिकतम 81 मंत्री हो सकते हैं. यानी अभी नौ पद पहले से रिक्त हैं. इसके अलावा कुछ अन्य कारण भी कैबिनेट विस्तार की अटकलों को मजबूत कर रहे हैं. कुछ केंद्रीय नेताओं को पार्टी संगठन में नई जिम्मेदारियां मिली हैं, जबकि कुछ मंत्रियों के पद छोड़ने की भी चर्चा है. ऐसे में सरकार के पास नए चेहरों को मौका देने का अवसर बन सकता है.
मानसून सत्र से पहले या बाद में हो सकता है फैसला
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो संसद के मानसून सत्र से पहले ही कैबिनेट विस्तार किया जा सकता है. दूसरी संभावना यह मानी जा रही है कि प्रधानमंत्री के विदेश दौरे से लौटने के बाद मंत्रिमंडल में बदलाव की घोषणा हो सकती है. हालांकि सरकार की ओर से अभी तक किसी आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की गई है.
खराब प्रदर्शन वाले मंत्रियों पर भी हो सकती है कार्रवाई
सरकार के भीतर पिछले लगभग दो वर्षों के कामकाज की समीक्षा की प्रक्रिया भी चर्चा का विषय बनी हुई है. माना जा रहा है कि जिन मंत्रियों का प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा, उनकी जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है. वहीं बेहतर प्रदर्शन करने वाले नेताओं को पदोन्नति या महत्वपूर्ण मंत्रालय मिलने की संभावना भी जताई जा रही है.
सहयोगी दलों को मिल सकता है बड़ा प्रतिनिधित्व
एनडीए में शामिल सहयोगी दलों की राजनीतिक ताकत लगातार बढ़ी है. ऐसे में कैबिनेट विस्तार के दौरान सहयोगी दलों को अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना भी जताई जा रही है. विशेष रूप से उन दलों पर नजर रहेगी जिनका संसद में संख्याबल बढ़ा है. राजनीतिक समीकरणों को मजबूत बनाए रखने के लिए सरकार सहयोगी दलों के कोटे में भी बदलाव कर सकती है.
चुनावी राज्यों का रखा जाएगा विशेष ध्यान
अगले वर्ष कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, गोवा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और मणिपुर जैसे राज्यों में चुनावी माहौल बनने वाला है. ऐसे में माना जा रहा है कि इन राज्यों से आने वाले नेताओं को मंत्रिमंडल में अधिक प्रतिनिधित्व देकर चुनावी रणनीति को मजबूत किया जा सकता है. इससे क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ चुनावी संदेश देने की भी कोशिश होगी.
सामाजिक संतुलन भी रहेगा अहम मुद्दा
कैबिनेट विस्तार में केवल राजनीतिक समीकरण ही नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. सरकार विभिन्न वर्गों और समुदायों को उचित भागीदारी देने की रणनीति पर काम कर सकती है. दलित, ओबीसी, महिला और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नए मंत्रियों का चयन किया जा सकता है. हालांकि अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर करेगा.
फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार
केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और विस्तार को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हैं, लेकिन सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. ऐसे में आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल की पहली बड़ी कैबिनेट रीस्ट्रक्चरिंग में किन नेताओं को मौका देती है और किन मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव होता है.
ये भी पढ़ें- Weather Update: जून के बाद जुलाई में भी कम बरसेंगे बादल; IMD ने गर्मी और बारिश पर जारी किया बड़ा अपडेट