IMD Weather Update: देश के कई हिस्सों में तेज गर्मी और उमस ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है. लोग लगातार इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिर राहत कब मिलेगी और मानसून पूरी तरह कब सक्रिय होगा. इसी बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मानसून और बारिश को लेकर नया अपडेट जारी किया है, जिससे तस्वीर कुछ हद तक साफ हुई है.
अगले दिनों में बारिश की उम्मीद
IMD के ताजा अनुमान के अनुसार देश में फिलहाल जो करीब 40 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है, वह अगले 7 से 10 दिनों में होने वाली बारिश से कुछ हद तक कम हो सकती है. हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूरे जुलाई महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है. इसका मतलब है कि शुरुआती राहत के बावजूद मानसून का असर अभी पूरी तरह मजबूत नहीं दिखेगा और कई क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात बने रह सकते हैं.
जुलाई में गर्मी और ज्यादा परेशान कर सकती है
मौसम विभाग के मुताबिक इस बार जुलाई का महीना सिर्फ कम बारिश वाला ही नहीं, बल्कि अपेक्षाकृत ज्यादा गर्म भी रह सकता है. कई राज्यों में तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान जताया गया है, जिससे गर्मी और उमस का असर और बढ़ सकता है. इस स्थिति में लोगों को राहत मिलने में समय लग सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां मानसून की सक्रियता देर से पहुंचती है.
अगले कुछ दिनों में इन राज्यों में पहुंचेगा मानसून
IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, अगले 2 से 3 दिनों के भीतर मानसून उत्तर भारत के कई हिस्सों को कवर कर सकता है. इनमें दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और राजस्थान के कुछ क्षेत्र शामिल हैं. इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी में बन रहे निम्न दबाव क्षेत्र के कारण मौसम प्रणाली और सक्रिय हो सकती है, जिससे जुलाई के शुरुआती दिनों में ओडिशा, पश्चिम बंगाल से लेकर महाराष्ट्र और गुजरात तक मध्य भारत के हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है.
कृषि क्षेत्र के लिए आंशिक राहत की उम्मीद
जुलाई का महीना भारतीय कृषि व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान खरीफ फसलों जैसे धान और मक्का की बुवाई होती है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले 7 से 10 दिनों की बारिश किसानों के लिए कुछ राहत लेकर आ सकती है, खासकर मध्य भारत के उन क्षेत्रों में जहां खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर रहती है. हालांकि, यह राहत सीमित समय के लिए ही होगी क्योंकि कुल वर्षा अभी भी सामान्य से कम रहने की संभावना है.
जून में रही ऐतिहासिक रूप से कम बारिश
IMD ने यह भी बताया कि इस साल जून महीने में देशभर में केवल 99.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो 1901 के बाद से पांचवीं सबसे कम बारिश है. इससे पहले 2009, 1905, 2014 और 1926 जैसे वर्षों में भी इसी तरह की गंभीर कमी देखी गई थी.
आगे की स्थिति पर टिकी नजरें
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त के अंत या सितंबर की शुरुआत में समुद्री प्रणाली IOD (Indian Ocean Dipole) कुछ मजबूत हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो मानसून के अंतिम चरण में बारिश में सुधार देखने को मिल सकता है, लेकिन यह जून और जुलाई में हुई कमी की पूरी तरह भरपाई करने में सक्षम नहीं होगा.
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