तुर्की के 'खलीफा' एर्दोगन से खौफ में हैं नेतन्याहू, इजरायल ने अमेरिका से लगाई गुहार; समझिए रूस का कनेक्शन

इजरायल ने अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए सीरिया में अस्थिरता बनाए रखने की कोशिश की है.

Netanyahu afraid of Turkiye Erdogan Israel appeals to America Russia connection
एर्दोगन और नेतन्याहू | Photo: ANI

तेल अवीव: 2024 के दिसंबर में सीरिया में एक बड़ा राजनीतिक और सैन्य उलटफेर देखने को मिला, जब बशर अल असद का परिवार, जो दशकों से सत्ता में था, विद्रोही गुटों के सामने घुटने टेकने पर मजबूर हुआ. इन विद्रोही गुटों का नेतृत्व अबु मोहम्मद जुलानी कर रहे थे. असद के सत्ता छोड़ने के बाद से सीरिया में अशांति और संघर्ष जारी है, जहां विभिन्न गुटों के बीच हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. इस स्थिति में इजरायल ने अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए सीरिया में अस्थिरता बनाए रखने की कोशिश की है.

इजरायल ने अमेरिका से लगाई गुहार

इजरायल ने अमेरिका से यह आग्रह किया है कि सीरिया को कमजोर और बिखरा हुआ रखा जाए, ताकि वहां की राजनीति और सुरक्षा में अधिक स्थिरता न आए. इजरायल का मानना है कि इस अस्थिरता से तुर्की के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला किया जा सकता है. इसके अलावा, इजरायल चाहता है कि रूस को अपने सैन्य ठिकाने सीरिया में बनाए रखने की अनुमति दी जाए, जिससे रूस का प्रभाव क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बना रहे.

इजरायली अधिकारियों ने फरवरी में वॉशिंगटन में हुई बैठकें और बाद में अमेरिकी कांग्रेस के साथ बातचीत के दौरान यह विचार व्यक्त किए. यरुशलम पोस्ट के अनुसार, इजरायल का कहना है कि सीरिया में स्थापित होने वाली नई इस्लामी सरकार, तुर्की के समर्थन से, इजरायल के लिए खतरा बन सकती है. यह खतरा इसलिए भी बढ़ सकता है क्योंकि तुर्की के समर्थन से ऐसे गुटों का उदय हो सकता है जो इजरायल के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, जैसे कि हमास.

इजरायल के लिए चिंता का विषय

इजरायल के अधिकारियों के मुताबिक, तुर्की की नीतियों का सीरिया में बढ़ता प्रभाव इजरायल के लिए चिंता का विषय है. इस संदर्भ में, अमेरिकी थिंकटैंक सेंचुरी इंटरनेशनल के फेलो एरॉन लुंड का कहना है कि इजरायल का डर यह है कि तुर्की की सीरिया में प्रभावी भूमिका के कारण हमास जैसे आतंकवादी गुटों का उदय हो सकता है. ऐसे में इजरायल किसी भी हालत में तुर्की को सीरिया में अपनी पकड़ मजबूत करने से रोकना चाहता है.

इसके अतिरिक्त, इजरायली अधिकारियों ने यह प्रस्ताव दिया है कि रूस को सीरिया के महत्वपूर्ण स्थानों पर, जैसे कि टार्टस में अपने नौसैनिक अड्डे और लटाकिया में अपने हवाई अड्डे, को बनाए रखने की अनुमति दी जाए. यह रूस के लिए सीरिया में अपनी सैन्य उपस्थिति को बनाए रखने का एक तरीका होगा, जिससे तुर्की के प्रभाव को संतुलित किया जा सके.

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