अमेरिका की 'हेकड़ी' मिडिल ईस्ट में ध्वस्त! ट्रंप के 'तेवर' पर ईरान के सुप्रीम लीडर की दो टूक- 'झुकेंगे नहीं हम'

पेजेश्कियन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत की संभावनाएं धुंधली नजर आ रही हैं.

Iran Supreme Leader order on Trump attitude Will the Middle East war reach America
ट्रंप-खामेनेई | Photo: ANI

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि वह अमेरिका के साथ बातचीत के पक्ष में हैं, लेकिन इस मुद्दे पर वह सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई के दृष्टिकोण का पालन करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढने के लिए सही रास्ता तलाशना होगा. पेजेश्कियन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत की संभावनाएं धुंधली नजर आ रही हैं.

'बातचीत के पक्षधर बने रहेंगे'

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, पेजेश्कियन ने रविवार को संसद सत्र में भाग लेते हुए कहा, "मैं हमेशा बातचीत के पक्ष में रहा हूं, लेकिन जैसा कि क्रांति के नेता ने कहा, हम संयुक्त राज्य अमेरिका से बात नहीं करेंगे, तो मैंने भी उसी दिशा में कदम बढ़ाया है." उन्होंने कहा कि हालांकि, ईरान को अपने मुद्दों को हल करने के लिए उपयुक्त समाधान ढूंढने होंगे और वे बातचीत के पक्षधर बने रहेंगे, बशर्ते वह सर्वोच्च नेता की नीतियों का पालन करें.

पेजेश्कियन ने यह भी कहा, "मेरे पास अपनी एक राय हो सकती है, लेकिन जब सर्वोच्च नेता एक दिशा निर्धारित करते हैं, तो हमें उसी के अनुसार खुद को ढालना चाहिए और उस ढांचे के भीतर सही मार्ग अपनाना चाहिए."

सुप्रीम लीडर ने क्या कहा था?

7 फरवरी को एक सार्वजनिक भाषण में, अयातुल्ला खामेनेई ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ईरान दुनिया के अन्य देशों से बातचीत करने के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका को इस प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा. उन्होंने यह भी जोड़ा, "अमेरिका के साथ बातचीत से हमारे देश की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, और कुछ लोग यह सोचते हैं कि अगर हम बैठकर बातचीत करेंगे तो समस्याएं हल हो जाएंगी, यह एक गलत धारणा है."

खामेनेई ने यह भी कहा कि इजरायल शासन को भी बातचीत की प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह शासन एक 'आपराधिक और भूमि हड़पने वाला गिरोह' है. इसके बाद, पेजेश्कियन ने खामेनेई के रुख को दोहराया और कहा कि अमेरिका ईरान से बातचीत की कोई इच्छा नहीं रखता, बल्कि वह ईरान को अपनी शर्तों पर झुका देना चाहता है.

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