Russia Taliban News: रूस की राजधानी मॉस्को में तालिबान सरकार के विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्तकी और रूस के उप प्रधानमंत्री अलेक्सी ओवरचुक के बीच मुलाकात हुई. दोनों नेताओं के बीच व्यापार, ऊर्जा, ट्रांजिट रूट और आर्थिक सहयोग बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई.
रूस अब अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नेटवर्क से जोड़ने में मदद करना चाहता है. इसके अलावा दोनों देशों के बीच राजनीतिक, सुरक्षा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है.
रूस और तालिबान के बीच बढ़ती नजदीकी अचानक नहीं हुई है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लंबे समय से अफगानिस्तान को लेकर अपनी नीति में बदलाव कर रहे हैं. रूस ने तालिबान को अपनी प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की सूची से हटाया और अफगानिस्तान के ‘इस्लामिक अमीरात’ को आधिकारिक तौर पर मान्यता भी दी.
जनवरी 2026 में पुतिन ने तालिबान की ओर से नियुक्त राजदूत गुल हसन के कूटनीतिक दस्तावेज स्वीकार किए थे. इसके बाद मॉस्को में अफगान दूतावास को औपचारिक राजनयिक दर्जा मिल गया. यह तालिबान के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि मानी गई.
किसी सरकार को मान्यता मिलने का क्या मतलब है?
किसी सरकार को आधिकारिक मान्यता मिलने का मतलब है कि कोई देश उसे वैध सरकार के तौर पर स्वीकार करता है. इससे उसके लिए दूसरे देशों के साथ राजनयिक और आर्थिक रिश्ते बनाना आसान हो जाता है.
मान्यता मिलने के बाद व्यापार, निवेश, दूतावास और दूसरे देशों के साथ सरकारी स्तर पर बातचीत के रास्ते खुलते हैं. तालिबान के लिए रूस की ओर से मिली मान्यता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे दूसरे देशों के साथ उसके रिश्तों को भी बढ़ावा मिल सकता है.
रूस के कदम से पाकिस्तान की बढ़ी चिंता
मॉस्को और काबुल के बीच बढ़ती नजदीकी पाकिस्तान के लिए परेशानी बढ़ा सकती है. पाकिस्तान और तालिबान सरकार के बीच पहले से ही रिश्ते तनावपूर्ण हैं और दोनों देशों के बीच बातचीत भी लंबे समय से प्रभावित है.
पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि तालिबान प्रशासन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP को अफगानिस्तान में जगह दे रहा है. सीमा पर झड़पों और हवाई हमलों के कारण दोनों देशों के रिश्ते और खराब हुए हैं.
ऐसे समय में तालिबान को रूस से राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग मिलना पाकिस्तान के लिए एक नई चुनौती बन सकता है. जिस अफगानिस्तान में पाकिस्तान लंबे समय तक अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश करता रहा, वहां अब रूस की भूमिका लगातार बढ़ रही है.
भारत के लिए रूस-अफगानिस्तान की नजदीकी क्यों अहम?
भारत लंबे समय से एक स्थिर और सुरक्षित अफगानिस्तान का समर्थन करता रहा है. रूस और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता सहयोग भारत के लिए भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है.
अफगानिस्तान में स्थिरता आने से मध्य एशिया के साथ व्यापार और संपर्क के रास्ते मजबूत हो सकते हैं. इसके अलावा पाकिस्तान के प्रभाव को लेकर भी क्षेत्रीय समीकरण बदल सकते हैं.
भारत और रूस के पुराने रिश्तों को देखते हुए मॉस्को का काबुल के साथ जुड़ाव नई दिल्ली के लिए भी एक अहम घटनाक्रम है.
बदल रहा है एशिया का रणनीतिक समीकरण
पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच रूस एशिया और मध्य एशिया में नए व्यापारिक साझेदार तलाश रहा है. ऐसे में अफगानिस्तान रूस के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकता है. वहीं तालिबान के लिए रूस जैसे बड़े देश का समर्थन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका है.
रूस और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते रिश्ते आने वाले समय में इस पूरे क्षेत्र की राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं. इसका असर पाकिस्तान, भारत और मध्य एशिया के बीच के रणनीतिक समीकरण पर भी पड़ सकता है.
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