2024 में भारत, अमेरिका, रूस समेत कई देशों में चुनाव, आर्थिक विकास के लिए बढ़ेगा जोखिम : Moody's

2024 में भारत, अमेरिका, रूस समेत कई देशों में चुनाव, आर्थिक विकास के लिए बढ़ेगा जोखिम : Moody's

नई दिल्ली : कई देशों में 2024 में बड़ी संख्या में होने जा रहे चुनावों से नीति और नीति प्रभावशीलता में बदलाव का खतरा बढ़ने वाला है, वैश्विक रेटिंग एजेंसी  मूडीज ने तर्क दिया कि यह चुनाव सुपरसाइकिल लोन स्थिरीकरण और आर्थिक विकास के लिए जोखिम बढ़ाने वाला है.

नवंबर 2024 में अमेरिकी चुनावों के साथ, कई यूरोपीय देशों और भारत, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और रूस जैसे कई बड़े उभरते बाजारों में इस साल राष्ट्रीय चुनाव होंगे.

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वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज का तर्क

वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपनी नवीनतम क्रेडिट आउटलुक रिपोर्ट में तर्क दिया है कि चुनाव शायद ही कभी संप्रभु क्रेडिट रेटिंग को तुरंत प्रभावित करते हैं, लेकिन इसके परिणामस्वरूप क्रेडिट पर सकारात्मक या नकारात्मक असर हो सकता है - जैसे कि नीति निर्धारण प्रक्रिया और विधायी संरचना में बदलाव - के अनुसार अंततः एक संप्रभु और राजकोषीय प्रक्षेप लिहाज से आर्थिक स्थिति को बदल देता है.

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'चुनाव राजनीति इच्छाशक्ति को करते हैं कमजोर'

मूडीज़ ने रिपोर्ट में कहा, "चुनाव ऐसे महत्वपूर्ण समय पर होत हैं, जब अधिकांश संप्रभु देश कर्ज के बोझ को स्थिर करने की शुरुआत कर रहे हैं."

चुनाव आमतौर पर नए करों और खर्च में किसी भी कमी के लिए राजनीतिक भूख या इच्छाशक्ति को सीमित कर देते हैं.

मूडीज के अनुसार, उच्च ब्याज दरों, कमजोर विकास पूर्वानुमान और खर्च पर सामाजिक और भू-राजनीतिक दबाव को देखते हुए इस वर्ष राजकोषीय कंसोलेडेशन के जोखिम विशेष रूप से ज्यादा हैं.

मूडीज ने कहा, "चूंकि अधिकांश संप्रभु देश अभी अपने ऋण बोझ को स्थिर करने की शुरुआत कर रहे हैं, राजकोषीय अनुशासन में एक टिकाऊ ढील, ऋण ट्रैजेक्टरीज पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है. केंद्रीय बैंकों द्वारा कटौती शुरू करने के बाद भी उच्च-ब्याज दरों का मतलब है कि अतिरिक्त उधार लेने से ऋण सामर्थ्य जल्दी खत्म हो जाएगी."

'नीतिगत फैसलों को चुनाव करेंगे प्रभावित'

इसमें दावा किया गया कि आर्थिक नीतियां, अप्रवासन और सुरक्षा चुनाव परिणामों और नीति डिजाइन को प्रभावित करेंगे.

"कई चुनावों में अप्रवासन चुनाव अभियान का एक प्रमुख मुद्दा होगा, इसे सीमित करने के लिए व्यापक संकल्प लिए जाएंगे. नीतिगत बदलाव के क्रेडिट प्रभाव को साकार होने में समय लगेगा और इसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर श्रम की कम उपलब्धता और धीमी जीडीपी वृद्धि होगी."

इसके अलावा, इसने तर्क दिया कि चुनाव वाले देशों में सरकारें विकास को समर्थन देने के लिए औद्योगिक नीतियों का इस्तेमाल करना जारी रखेंगी, लेकिन संभावित लाभ उनके प्रभावी कार्यान्वयन पर निर्भर करते हैं.

मूडीज ने चल रहे भू-राजनीतिक संघर्षों के स्पष्ट संदर्भ में कहा, "बढ़ती सुरक्षा चिंताएं आर्थिक बिखराव और ध्रुवीकरण को बढ़ा सकती हैं, और उच्च रक्षा खर्च से प्रत्यक्ष राजकोषीय लागत बढ़ सकती है."

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