सभी नागरिकों को BLA ने छोड़ा, दो बड़े अधिकारी समेत 100 से अधिक जवानों को बनाया बंधक; दी ये धमकी

रिहाई के बाद BLA ने यह संदेश दिया है कि वे आम पाकिस्तानी नागरिकों के दुश्मन नहीं हैं.

BLA released all the civilians took more than 100 soldiers including two senior officers hostage
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: Freepik

पाकिस्तान में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन हाइजैक मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA), जो बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई लड़ रही है, ने सभी नागरिक बंधकों को रिहा कर दिया है. इसका मतलब है कि अब ट्रेन में सवार सभी आम नागरिक पूरी तरह से सुरक्षित हैं. हालांकि, 100 से अधिक पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक बलों के जवान अब भी BLA के कब्जे में हैं. यह घटना बलूचिस्तान में विद्रोह की तीव्रता को दर्शाती है और यह संकेत देती है कि अब यह आंदोलन केवल एक ‘निम्न-स्तरीय विद्रोह’ नहीं रह गया है, बल्कि यह पाकिस्तानी प्रशासन के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है.

BLA ने दी धमकी

रिहाई के बाद BLA ने यह संदेश दिया है कि वे आम पाकिस्तानी नागरिकों के दुश्मन नहीं हैं. सूत्रों के मुताबिक, जाफर एक्सप्रेस ट्रेन में करीब 500 यात्री सवार थे, जिनमें से अधिकांश स्थानीय नागरिक थे. बलूच विद्रोहियों ने सभी गैर-सैन्य कर्मियों, उनके परिवारों, महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित रूप से रिहा कर दिया और उन्हें नजदीकी स्टेशन या पाकिस्तानी प्रशासन की मौजूदगी वाले किसी भी स्थान तक जाने का निर्देश दिया. साथ ही, उन्हें चेतावनी दी गई है कि वे लौटकर न आएं.

स्थिति और गंभीर हो सकती है

वहीं, पाकिस्तान प्रशासन इस घटना को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहा है, हालांकि सच्चाई इससे पूरी तरह अलग है. पाकिस्तान सरकार और सेना ने रिहा हुए नागरिकों को अपने ‘कर्म’ के तौर पर पेश किया है, जबकि असल में BLA ने उन्हें रिहा किया है. पाकिस्तान सरकार यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि उसने ही इन नागरिकों को रिहा कराया, जबकि यह पूरी तरह से गलत है. BLA ने पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा बलों के जवानों को अपने कब्जे में रखा है, जिनमें उच्च रैंक के अधिकारी भी शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक, जाफर एक्सप्रेस ट्रेन के एसी डिब्बे में दो पाकिस्तानी सेना के अधिकारी, एक कप्तान और एक मेजर, अपने परिवार के साथ सवार थे.

इसके अलावा, ट्रेन में पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक बलों के अन्य रैंक के जवान भी मौजूद थे, जैसे सूबेदार, नायक, और सिपाही. फिलहाल, पाकिस्तान प्रशासन ने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है कि कितने सैन्य कर्मियों को छोड़ दिया गया है और कितने अब भी विद्रोहियों के कब्जे में हैं. अगर इस मसले पर बलूच विद्रोहियों की मांगों पर पाकिस्तान सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.

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