Shivling: शिवलिंग की ये अनसुनी बातें शायद ही जानते होंगे आप, पढ़कर रह जाएंगे हैरान!

Shivling: शिवलिंग की ये अनसुनी बातें शायद ही जानते होंगे आप, पढ़कर रह जाएंगे हैरान!

नई दिल्ली, धर्म डेस्क: सोमवार की दिन भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दिन कई लोग मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल  जल, बेलपत्र, धतूरा आदि  चढ़ाते हैं और पूजा (Mahadev Shivling Puja) करते हैं.  पौराणिक धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शिवलिंग के 6 प्रकार हैं. देवलिंग, स्वयंभू शिवलिंग, मनुष्य शिवलिंग, बर्फ शिवलिंग और असुर लिंग. शिवलिंग को दो प्रकारों में भी भांटा गया है. पहला उल्का और दूसरा पारद शिवलिंग. लेकिन कभी आपने सोचा है कि शिवलिंग का आकार ऐसा क्यों होता है और इसकी स्थापना की वजह क्या है. तो चलिए आपको बताते हैं- 

शिवलिंग का निचला हिस्सा

शिवलिंग को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है. इसमें सबसे नीचे के हिस्से को जमीन से जोड़ा गया है और ये  ब्रह्मा जी को दर्शाता है. इसका मतलब ये है कि सृष्टि के रचनाकार से ही शिवलिंग की शुरुआत  होती है.

शिवलिंग का मध्य और ऊपरी भाग

शिवलिंग के बीच का भाग समतल होता है और सबसे ऊपर का भाग अंडाकार होता है और इसकी पूजा की जाती है. बीच का हिस्सा सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होता है. इसका मतलब सृष्टि की रक्षा करना है. वहीं, ऊपरी भाग भगवान शिव को दर्शाता है यानी अनंतता और उन्नति. 

शिवलिंग पूजा से क्या होता है?

मान्यता है कि शिवलिंग की पूजा करने से पूरे ब्रह्मांड की पूजा हो जाती है. क्योंकि इसमें त्रिदेवों का वास होता है और शिवजी ही पूरे जगत के मूल है. शिव का अर्थ होता है 'परम कल्याणकारी' और लिंग का मतलब होता है 'सृजन'. शिव की कृपा से भक्तों को धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है. शिवलिंग पर अभिषेक करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. शिवलिंग पर दूध, धतूरा, केवड़ा और बेलपत्र चढ़ाने से सभी रोग-दोष दूर होते हैं. 

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी ज्योतिषियों, पंचांग, धार्मिक मान्यताओं, धर्मग्रंथों से लेकर आप तक पहुंचाई गई हैं. हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है. इसके अलावा किसी भी तरह की जिम्मेदारी Bharat 24 नहीं लेगा.