Amrita Pritam's partner Imroz dies at 97 देश-दुनिया में अपनी कलम के जरिये लोगों के दिलों पर जादू बिखेरने वालीं अमृता प्रीतम के 'पति' कवि इंदरजीत उर्फ इमरोज (Imroz Death) ने मुंबई में दुनिया को अलविदा कह दिया. वर्ष 2023 ने जाते-जाते एक ऐसे शख्स को छीन लिया, जिसने सिर्फ मोहब्बत बांटी और मोहब्बत की है. एक दौर था जब उनकी यह मोहब्बत एक तरफा थी. यकीन नहीं आएगा, लेकिन पेशे से चित्रकार और कवि इमरोज महान लेखिका अमृता प्रीतम के साथ लिव इन में रहते थे. मोहब्बत को उसके संकुचित दायरे से बाहर निकालकर और खुद में कसकर समेटने वाले इमरोज के ऊपर यह गीत फिट बैठता है, जिसे गुलजार ने लिखा है. 'खामोशी' फिल्म का यह गीत गाया है सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने . यकीन मानिये यह खूबसूरत गीत इमरोज और अमृता प्रीतम की मोहब्बत का अफसाना बयां कर देता है.
हम ने देखी है इन आंखों की महकती खुशबू
हाथ से छूके इसे रिश्तों का इल्ज़ाम न दो
सिर्फ़ एहसास है ये रूह से महसूस करो
प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो
यूं हुई थी इमरोज-अमृता की मुलाकात
यह जगजाहिर है कि अमृता प्रीतम महान गीतकार साहिर लुधियानवी से प्यार करती थीं. प्यार तो खैर साहिर भी अमृता से करते थे, लेकिन इजहार नहीं कर सके. इसके पीछे वजह यह थी कि उनका दिल टूट चुका था और वह शायद इस प्यार को शादी के अंजाम तक नहीं पहुंचाना चाहते थे. मोहब्बत दोनों के बीच जारी थी, लेकिन अमृता की इमरोज से मुलाकात अचानक ही हो गई. दरअसल, लेखिका अमृता को अपने कविता संग्रह 'नगमानी' के लिए कवर डिजाइनर की तलाश थी, वह कलाकार की तलाश में जुटी ही थीं कि अचानक उनकी मुलाकात चित्रकार इमरोज़ से हो गई. इसके बाद मुलाकातों का दौर जारी रहा और इमरोज लेखिका अमृता से प्यार कर बैठे.
लिव में बिताए 40 वर्ष
इमरोज यह भी जानते थे कि अमृता प्रीतम शायर साहिर लुधियानवी से बहुत प्यार करती हैं. बावजूद इसके वह दिल दे बैठे. अमृता यह भी कह चुकी थीं कि वह शादी नहीं करेंगी. इमरोज ने अमृता के जज्बातों का सम्मान किया और 40 वर्ष बिना रिश्ते को नाम दिए साथ रहे. यही वजह रही कि दोनों ने कभी इस रिश्ते को शादी के बंधन में बांधने की कोशिश नहीं की. यह बात बहुत कम ही लोग जानते होंगे कि अमृता प्रीतम उन्हें प्यार से जीत कहकर बुलाती थीं. अमृता की जिंदगी के अंतिम दिनों में इमरोज साए की तरह उनके साथ नजर आए. अमृता के दुनिया को अलविदा कहने के बाद जब भी उनकी जिंदगी पर आधारित नाटक का मंचन होता तो वह दिल्ली में जरूर मौजूद रहते. दिल्ली के नाटककार तारिक हमीद का कहना है कि वह वाकई गजब की शख्सियत थे. उन्होंने हमेशा नाटककारों को प्रोत्साहित किया. अमृता प्रीतम के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन देखने वह जरूर आते थे.
लिखी थी अमृता के लिए कविता
इमरोज दरअसल अमृता से बहुत मोहब्बत करते थे. वह कवि भी थे, लेकिन साहिर जितने बड़े नहीं. उन्होंने अमृता प्रीतम के लिए 'नज्म जारी है' नाम की पुस्तक भी लिखी थी. इसे वर्ष 2008 में प्रकाशित किया गया था. बताया जाता है कि जब अमृता गंभीर रूप से बीमार थीं तो उस दौरान ये कविता इमरोज के लिए लिखी थी.
मैं तैनू फ़िर मिलांगी
कित्थे ? किस तरह पता नई
शायद तेरे ताखियल दी चिंगारी बण के
तेरे केनवास ते उतरांगी.