दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 19 दिसंबर से 30 दिसंबर के बीच विपश्यना ध्यान केंद्र में रहेंगे. इस दौरान वह समाज और लोगों से पूरी तरह दूर रहेंगे. सोशल मीडिया, मोबाइल, घर, परिवार सब कुछ त्याग देंगे. दिल्ली के मुख्यमंत्री 10 दिनों तक विपश्यना केंद्र में स्वयं को जानने की विधि यानी आत्मशुद्धि की विधि अपनाएंगे. ऐसे में आज हम जानेंगे कि विपश्यना क्या है? यह लोगों के लिए कितना महत्वपूर्ण है? आइए जानते हैं.
आत्मशुद्धि का सर्वोत्तम उपाय
विपश्यना एक प्राचीन ध्यान पद्धति है, जिसका अर्थ है 'शून्य की ओर ध्यान' इसे आप आत्मनिरीक्षण एवं आत्मशुद्धि की सर्वोत्तम विधि भी कह सकते हैं. हजारों वर्ष पूर्व महात्मा गौतम बुद्ध ने इसी ध्यान विधि से परम ज्ञान प्राप्त किया था. इतना ही नहीं, उन्होंने अपने अनुयायियों को भी इसका अभ्यास कराया. इस पद्धति को महात्मा और योगी युगों-युगों से करते आ रहे हैं, जबकि महात्मा बुद्ध ने इसे सबसे सरल रूप में लोगों के सामने प्रस्तुत किया था. यह ध्यान विधि आपको स्वयं को जानने में मदद करती है.
यह प्राणायाम और साक्षीभाव का संयुक्त योग है. इस विधि में अपनी सांसों को महसूस करना यानी सांसों की गति को महसूस करना और उसके प्रति जागरूक रहने का अभ्यास किया जाता है. विपश्यना ध्यान के पांच सिद्धांत माने गए हैं. इसके मूल पांच सिद्धांत हैं जानवरों की हिंसा का पूर्ण निषेध, चोरी न करना, ब्रह्मचर्य का पालन करना, अपशब्दों का प्रयोग न करना और नशे से दूर रहना.
कब करना है ध्यान
इस ध्यान विधि को आप सुबह एक घंटा या शाम को एक घंटा कर सकते हैं. अगर आप दोनों समय बिताएंगे तो यह बहुत फायदेमंद साबित होगा. इसका अभ्यास आप सोने से पहले पांच मिनट और सुबह उठने के बाद भी पांच मिनट तक कर सकते हैं.
विपश्यना ध्यान कैसे करें
आप ध्यान की अवस्था में बैठें और अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें. इसे पूरी मानसिकता के साथ करें. सांसों के आने-जाने पर ध्यान केंद्रित करें. महसूस करें कि आपकी नासिका से सांस किस प्रकार अंदर जा रही है, रुक रही है और बाहर आ रही है. प्रारंभिक अवस्था में, चाहे आप उठ रहे हों, बैठ रहे हों, सो रहे हों, जाग रहे हों, बात कर रहे हों या चुप रह रहे हों, नासिका के माध्यम से सांस के आने और जाने को महसूस करें. ऐसा तभी तक करें जब तक आपका ध्यान केंद्रित रहे. इसे जबरदस्ती मत करो.
क्यों करते हैं विपश्यना
विपश्यना ध्यान वास्तव में मन की शांति, तनाव से पूर्ण मुक्ति और सभी प्रकार की मानसिक समस्याओं से राहत पाने के लिए किया जाता है. मन-मस्तिष्क को स्वस्थ रखने का यह अद्भुत प्रयास है. ऐसा करने से मन में नकारात्मकता नहीं आती है. मन में हमेशा शांति बनी रहती है जिससे शरीर भी स्वस्थ रहता है.
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