उत्तराखंड में UCC लागू— हलाला, बहुविवाह, तीन तलाक पर लगेगा बैन, 'लिव-इन' से पैदा बच्चों को भी मिलेगा हक

उत्तराखंड के सीएम ने कहा, "हमने राज्य की जनता से जो वादा किया था, उसे हम पूरा कर रहे हैं. आज उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. इससे हर व्यक्ति को लाभ मिलेगा."

उत्तराखंड में UCC लागू— हलाला, बहुविवाह, तीन तलाक पर लगेगा बैन, 'लिव-इन' से पैदा बच्चों को भी मिलेगा हक
राज्य में यूसीसी लागू होने के बाद बोलते हुए सीएम पुष्कर सिंह धामी | Photo- ANI

देहरादून/नई दिल्ली : उत्तराखंड में सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूीसीस) लागू हो गया है. इसे लागू करने वाला वह देश का पहला राज्य बन गया है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी यूसीसी (समान नागरिक संहिता) पोर्टल पर पंजीकरण कराने वाले पहले व्यक्ति बने. उन्होंने इसकी तस्वीरें दिखाई.

इसके साथ हलाला, बाल विवाह, बहुविवाह, तीन तलाक समेत चीजों पर बैन लग जाएगा.

उत्तराखंड के सीएम ने कहा, "हमने राज्य की जनता से जो वादा किया था, उसे हम पूरा कर रहे हैं. आज उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. इससे हर व्यक्ति को लाभ मिलेगा."

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लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा बच्चों को भी मिलेगा अधिकार

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "सभी धर्मों में विवाह की न्यूनतम आयु अनिवार्य कर दी गई है - लड़के के लिए 21 वर्ष और लड़की के लिए 18 वर्ष. पति या पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी पूरी तरह से प्रतिबंधित होगी. समान नागरिक संहिता में संपत्ति के बंटवारे और बच्चों के अधिकारों को लेकर भी स्पष्ट कानून बनाए गए हैं. इन कानूनों के तहत सभी धर्मों और समुदायों में बेटियों को भी संपत्ति में समान अधिकार दिए गए हैं. लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चों को भी संपत्ति में समान अधिकार माना जाएगा... इस कानून में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है. रजिस्ट्रार जोड़े की जानकारी उनके माता-पिता को देगा, यह जानकारी पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी..."

धामी ने कहा, "हमने राज्य की जनता से जो वादा किया था, उसे पूरा कर रहे हैं. आज उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. इससे हर व्यक्ति को लाभ मिलेगा."

उन्होंने कहा, "...अब हर साल 27 जनवरी को उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता दिवस के रूप में मनाया जाएगा..."

तीन तलाक, हलाला, बहुवविवाह पर लगेगी रोक

यूसीसी (समान नागरिक संहिता) के लागू होने पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "समान नागरिक संहिता भेदभाव को समाप्त करने का एक संवैधानिक उपाय है. इसके माध्यम से सभी नागरिकों को समान अधिकार देने का प्रयास किया गया है. इसके लागू होने से सही मायने में महिला सशक्तीकरण सुनिश्चित होगा. इसके माध्यम से हलाला, बहुविवाह, बाल विवाह, तीन तलाक आदि कुरीतियों को पूरी तरह से रोका जा सकेगा...हमने संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत उल्लिखित अपनी अनुसूचित जनजातियों को इस संहिता से बाहर रखा है, ताकि उन जनजातियों और उनके अधिकारों की रक्षा हो सके...आज इस अवसर पर मैं पुनः स्पष्ट करना चाहूंगा कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म या संप्रदाय के विरुद्ध नहीं है, किसी को निशाना बनाने का सवाल ही नहीं उठता."

संविधान का आर्टिकल 44 नीति निर्देशक सिद्धांतों का हिस्सा

संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों का हिस्सा है. भारत के संविधान के भाग IV (अनुच्छेद 36-51) में राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत (DPSP) शामिल हैं. राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत (DPSP) भारत सरकार के लिए दिशा-निर्देश हैं जिनका उद्देश्य लोगों के लिए सामाजिक-आर्थिक न्याय सुनिश्चित करना और भारत को एक कल्याणकारी राज्य के रूप में स्थापित करना है.

सीएम धामी ने कहा, "2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान, जिसे हमने पीएम मोदी के नेतृत्व में लड़ा था - हमने राज्य के लोगों से वादा किया था कि हम सरकार बनने के बाद यूसीसी को लागू करने के लिए काम करेंगे. हमने सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं और अधिनियम (यूसीसी) अब लागू होने के लिए तैयार है... उत्तराखंड यूसीसी लाने वाला पहला राज्य बन गया है - जहां लिंग, जाति या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा - और हम 27 जनवरी को संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत उल्लिखित यूसीसी ला रहे हैं..."

यूसीसी में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार समेत होंगे ये नियम 

उत्तराखंड भारत का पहला राज्य बन गया है, जिसने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की है, जिसका उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और विरासत से जुड़े निजी कानूनों को सरल और स्टैंडराइज्ड करना है. इसके तहत, केवल उन पक्षों के बीच विवाह किया जा सकता है, जिनमें से किसी का कोई जीवित रह रहा जीवनसाथी न हो, दोनों कानूनी अनुमति देने के लिए मानसिक रूप से सक्षम हों, पुरुष की आयु कम से कम 21 वर्ष और महिला की आयु 18 वर्ष पूरी हो चुकी हो और वे मनाही संबंधों के दायरे में न हों.

धार्मिक रीति-रिवाजों या कानूनी प्रावधानों के तहत किसी भी रूप में विवाह की रस्में निभाई जा सकती हैं, लेकिन अधिनियम के लागू होने के बाद होने वाले विवाहों का 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है.

इस तरीके से करा सकते हैं विवाह का रजिस्ट्रेशन

सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 26 मार्च, 2010 से पहले या उत्तराखंड राज्य के बाहर, जहां दोनों पक्ष तब से एक साथ रह रहे हैं और सभी कानूनी पात्रता नॉर्म्स को पूरा करते हैं, विवाह अधिनियम के लागू होने के 6 महीने के भीतर रजिस्टर्ड हो सकते हैं (हालांकि यह अनिवार्य नहीं है).

इसी तरह, विवाह रजिस्ट्रेशन की स्वीकृति और पावती का काम भी तुरंत पूरा किया जाना जरूरी है. आवेदन प्राप्त होने के बाद उप-पंजीयक को 15 दिनों के भीतर उचित निर्णय लेना होता है.

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