रूस बनाम NATO की आहट! क्या ‘फादर ऑफ ऑल बम’ से बड़ा हमला करेंगे पुतिन? बड़ी तबाही की आशंका

NATO Russia War: यूक्रेन के साथ लंबे समय से चल रहे युद्ध का असर रूस पर भी दिखाई दे रहा है. बड़े और घातक हथियारों के इस्तेमाल को लेकर बरती गई सावधानी के बीच अब रूस की नजर यूरोप पर होने की चर्चा तेज हो गई है.

Russia vs NATO conflict Putin launch an attack bigger than the Father of All Bombs
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NATO Russia War: यूक्रेन के साथ लंबे समय से चल रहे युद्ध का असर रूस पर भी दिखाई दे रहा है. बड़े और घातक हथियारों के इस्तेमाल को लेकर बरती गई सावधानी के बीच अब रूस की नजर यूरोप पर होने की चर्चा तेज हो गई है. दावा किया जा रहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूरोप और NATO को दबाव में लाने के लिए बड़ा हमला करने की तैयारी कर सकते हैं.

पुतिन जिस हथियार के इस्तेमाल का विकल्प चुन सकते हैं, उसमें रूस का FOAB यानी ‘फादर ऑफ ऑल बम’ भी शामिल है. यह परमाणु हथियार नहीं है और इससे रेडियोएक्टिव रेडिएशन नहीं फैलता, लेकिन इसकी ताकत बेहद ज्यादा बताई जाती है. इसका इस्तेमाल यूरोप के लिए बड़ी चिंता का कारण बन सकता है.

यूरोपीय देशों को भी रूस की संभावित तैयारी की भनक लगने की बात सामने आई है. यूरोपीय इंटेलिजेंस अधिकारियों ने आशंका जताई है कि रूस आने वाले महीनों में NATO की परीक्षा ले सकता है. ऐसी स्थिति में यूरोप के किसी एक देश को निशाना बनाकर NATO की एकता और उसकी प्रतिक्रिया को परखा जा सकता है. हालांकि, रूस की ओर से ऐसे किसी हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

FOAB ने बढ़ाई यूरोप की चिंता

FOAB को लेकर यूरोप में चिंता इसलिए भी है क्योंकि यह बेहद शक्तिशाली गैर-परमाणु बम है. रिपोर्टों में दावा किया गया है कि रूस इसका इस्तेमाल किसी अहम सैन्य ठिकाने या बड़ी फैक्ट्री जैसे लक्ष्य के खिलाफ कर सकता है. इसका मकसद एक ही हमले में भारी नुकसान पहुंचाना और विरोधी देशों पर दबाव बनाना हो सकता है.

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क रूस को बड़ा खतरा बता चुके हैं. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी उनकी चेतावनियों को गंभीर बताया है. फ्रांस में इस मुद्दे पर आपात बैठक भी हुई. NATO रूस से संभावित खतरे को देखते हुए अपनी तैयारियां बढ़ा रहा है, लेकिन FOAB जैसे हथियार के इस्तेमाल की आशंका यूरोपीय देशों के लिए चिंता बढ़ाने वाली है.

क्या है FOAB बम?

FOAB यानी ‘फादर ऑफ ऑल बम’ रूस का बेहद शक्तिशाली गैर-परमाणु हथियार है. इसे वैक्यूम बम भी कहा जाता है. इसमें परमाणु हथियारों की तरह रेडियोएक्टिव रेडिएशन नहीं होता, लेकिन धमाके का असर बेहद विनाशकारी हो सकता है.

इस तरह का बम हवा में फटने के बाद आसपास के वातावरण में मौजूद ऑक्सीजन को तेजी से खींचता है. इससे इलाके में बहुत तेज दबाव बनता है और भारी नुकसान हो सकता है. बंकर या बंद जगहों में मौजूद लोगों पर भी इसका असर पड़ सकता है.

इसके बाद धमाके से तेज शॉकवेव पैदा होती है, जो आसपास की इमारतों और दूसरी संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है. बम से निकलने वाली तेज गर्मी भी बड़े इलाके में आग और तबाही का कारण बन सकती है. रिपोर्टों के मुताबिक FOAB का वजन करीब 7,100 किलोग्राम है और इसकी विस्फोटक क्षमता करीब 44 टन TNT के बराबर बताई जाती है.

FOAB के इस्तेमाल से बढ़ा परमाणु युद्ध का खतरा

FOAB को लेकर सबसे बड़ी चिंता इसके संभावित इस्तेमाल के बाद पैदा होने वाली स्थिति को लेकर है. यह परमाणु बम नहीं है, लेकिन इतने बड़े गैर-परमाणु हमले के बाद NATO और रूस के बीच तनाव काफी बढ़ सकता है. ऐसे हालात में जवाबी कार्रवाई और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

इसी खतरे को देखते हुए यूरोपीय देश अपनी सैन्य तैयारियां मजबूत कर रहे हैं. 19 सितंबर को डेनमार्क के कोपेनहेगन में बैठक हुई, जहां NATO सैन्य समिति के अगले अध्यक्ष का चुनाव किया गया. जर्मनी के जनरल कार्स्टन ब्रेउर को यह जिम्मेदारी दी गई है. यूरोप के NATO सदस्य रूस से संभावित खतरे को देखते हुए अपनी सेनाओं और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में जुटे हैं.

रूस की सीमा के करीब मौजूद तीन बाल्टिक देश भी लगातार सतर्कता बढ़ा रहे हैं. पोलैंड ने भी अपनी सीमा की सुरक्षा के लिए बड़ा प्लान तैयार किया है.

हमले की आशंका से यूरोप के देश अलर्ट

पोलैंड अपनी सीमा को मजबूत करने के लिए स्मार्ट बॉर्डर तैयार कर रहा है. इसके तहत ऑटोमैटिक सायरन सिस्टम लगाए जा रहे हैं, ताकि किसी खतरे की स्थिति में लोगों को समय रहते सुरक्षित जगह पहुंचाया जा सके. सीमा पर थर्मल और इन्फ्रारेड कैमरों के साथ रडार और लेजर सिस्टम लगाने की भी तैयारी है.

पोलैंड सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ाने के साथ AI आधारित ग्राउंड सेंसर भी लगाने की योजना बना रहा है. इन सेंसर से किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत मिल सकेगी. इसके अलावा आधुनिक ड्रोन भी तैनात किए जाएंगे, जो खतरे की स्थिति में निगरानी कर सेना तक लाइव जानकारी पहुंचा सकेंगे.

पोलैंड में भी सतर्कता 

पोलैंड यूक्रेन युद्ध के कारण पहले से ही सतर्क है. उसकी सीमा के पास कई बार ड्रोन गतिविधियां सामने आ चुकी हैं और ऐसे हालात में पोलैंड को अपने फाइटर जेट तक सक्रिय करने पड़े हैं. 13 सितंबर को पोलैंड की सीमा से करीब दो किलोमीटर दूर एक गैस स्टेशन पर भी हमले की खबर सामने आई थी.

फ्रांस को भी रूस की संभावित गतिविधियों को लेकर एक खुफिया रिपोर्ट मिलने की बात कही गई है. इसमें रूस पर बड़े स्तर पर हाइब्रिड वॉर की तैयारी करने का आरोप लगाया गया है. फ्रांस की खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि रूस अगले साल अक्टूबर में इस तरह की गतिविधियां शुरू कर सकता है. हालांकि, इन दावों और संभावित हमले को लेकर अंतिम तस्वीर जांच और आगे आने वाली जानकारी से ही साफ होगी.

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