पाकिस्तान ने JF-17 से टेस्ट की स्वदेशी फाज मिसाइल, आसमान में भारत को घेरने की तैयारी? देखें Video

पाकिस्तान ने भारत के साथ जारी तनाव के बीच अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की दिशा में एक नया कदम उठाया है. पाकिस्तानी वायुसेना ने पहली बार स्वदेशी फाज हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण किया है.

Pakistan tests indigenous Faaz missile from JF-17 to encircle India
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Faaz Missile: पाकिस्तान ने भारत के साथ जारी तनाव के बीच अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की दिशा में एक नया कदम उठाया है. पाकिस्तानी वायुसेना ने पहली बार स्वदेशी फाज हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण किया है. यह टेस्ट JF-17 लड़ाकू विमान से किया गया. पाकिस्तान का दावा है कि मिसाइल ने परीक्षण के दौरान तय मानकों को पूरा किया.

फाज मिसाइल के परीक्षण के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना को बधाई दी. हालांकि, पाकिस्तान ने अभी इस मिसाइल की तकनीकी क्षमताओं और इसे सेना में शामिल करने की समयसीमा का खुलासा नहीं किया है.

पाकिस्तानी सेना ने क्या बताया?

पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के मुताबिक, फाज मिसाइल का पहला परीक्षण देश की स्वदेशी एयरोस्पेस तकनीक में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. सेना ने इसे पाकिस्तान की सैन्य क्षमता और घरेलू रक्षा तकनीक के विकास में बड़ा कदम बताया.

ISPR का कहना है कि यह मिसाइल पाकिस्तान की सैन्य ताकत और ऑपरेशनल क्षमताओं को बढ़ाने में मदद कर सकती है.

मिसाइल में लगा है टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम

पाकिस्तान के अनुसार, फाज मिसाइल में स्वदेशी उन्नत टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम लगाया गया है. यह तकनीक मिसाइल को उड़ान के अंतिम चरण में लक्ष्य को पहचानने, उस पर लॉक करने और उसकी दिशा में बढ़ने में मदद करती है.

पाकिस्तानी सेना ने दावा किया है कि इस सिस्टम से मिसाइल की लक्ष्य भेदने की क्षमता और सटीकता बेहतर होगी. देश ने इस विकास को अपने शोध, इंजीनियरिंग और तकनीकी प्रयासों का नतीजा बताया है.

फाज मिसाइल की तकनीकी जानकारी अब भी गुप्त

पाकिस्तान ने फाज मिसाइल की रेंज, गति, वारहेड और अन्य तकनीकी विशेषताओं की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है. इसे वायुसेना में कब शामिल किया जाएगा, इस बारे में भी कोई आधिकारिक समयसीमा नहीं दी गई है.

माना जा रहा है कि मिसाइल अभी विकास के शुरुआती चरण में है और इसे पूरी तरह ऑपरेशनल होने में कई साल लग सकते हैं. शुरुआत में इसे JF-17 लड़ाकू विमानों पर तैनात किए जाने की संभावना है.