समुद्र के रास्ते भारत पर हमले की तैयारी? आतंकियों को सीक्रेट ट्रेनिंग दे रहा पाकिस्तान, वीडियो वायरल

लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को कराची के पास चरना द्वीप पर कमांडो ट्रेनिंग दी जा रही है.

Pakistan is providing secret training to Lashkar terrorists Karachi Charna Island
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

पाकिस्तान एक बार फिर भारत के खिलाफ किसी बड़ी आतंकी साजिश की तैयारी कर रहा है? यह सवाल तब उठने लगे हैं, जब एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को कराची के पास चरना द्वीप पर कमांडो ट्रेनिंग दी जा रही है. 'रेजोनेंट न्यूज' की रिपोर्ट के मुताबिक, लश्कर के प्रॉक्सी संगठन पाकिस्तानी मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) से जुड़े लोगों को स्कूबा डाइविंग करते देखा गया है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रेनिंग लेने वाले कुछ आतंकियों की पहचान भी की गई है.

इस खबर ने 26/11 मुंबई हमले की यादें ताजा कर दी हैं. उस हमले में आतंकियों ने समुद्र के रास्ते मुंबई में घुसकर कई जगहों पर हमला किया था. ऐसे में चरना द्वीप पर आतंकियों को समुद्र के अंदर ट्रेनिंग दिए जाने के दावे ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है.

कहां है चरना द्वीप, जहां आतंकियों को दी जा रही ट्रेनिंग?

चरना द्वीप को चूर्णा और छरना द्वीप के नाम से भी जाना जाता है. यह पाकिस्तान के कराची के पास अरब सागर में स्थित है. कराची से पश्चिम की ओर हब नदी के मुहाने से इसकी दूरी करीब 9 किलोमीटर है. यह द्वीप बलूचिस्तान और सिंध प्रांत की सीमा के पास मुबारक गांव के नजदीक मौजूद है.

यह एक निर्जन द्वीप है, जो स्कूबा डाइविंग और स्नोर्कलिंग जैसी गतिविधियों के लिए जाना जाता है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यहां लश्कर के आतंकियों को स्कूबा डाइविंग और कमांडो जैसी ट्रेनिंग दी जा रही है. इससे आशंका जताई जा रही है कि आतंकी समुद्र के रास्ते हमले करने की तैयारी कर सकते हैं.

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा का एक समुद्री विंग भी है, जिसे दावा मरीन विंग या सदा-ए-हुर्रियत के नाम से जाना जाता है. हाल के समय में इस संगठन की गतिविधियों और सीमा पार घुसपैठ की कोशिशों को लेकर भी चिंता जताई गई है.

भारत के किन इलाकों पर हो सकता है खतरा?

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आतंकियों को स्कूबा डाइविंग के साथ कॉम्बैट स्विमिंग यानी पानी के अंदर लड़ने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है. इस तरह की ट्रेनिंग मिलने से वे समुद्र के अंदर लंबे समय तक रह सकते हैं और सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने की कोशिश कर सकते हैं.

अगर आतंकियों को समुद्र के रास्ते हमला करने की ट्रेनिंग दी जा रही है तो भारत के मुंबई, गुजरात और कोच्चि जैसे तटीय शहरों के लिए खतरा बढ़ सकता है. आशंका है कि ऐसे आतंकी नौसैनिक जहाजों, व्यापारिक जहाजों और बंदरगाहों को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं. इसके लिए पानी के अंदर लगाए जाने वाले विस्फोटकों और लिम्पेट माइन्स का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.

इसके अलावा नौसैनिक अड्डों और शिपयार्ड की सुरक्षा के लिए भी इस तरह की ट्रेनिंग चिंता का विषय है. हालांकि, रिपोर्ट में किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है.

आतंकी ट्रेनिंग के लिए चरना द्वीप को ही क्यों चुना गया?

चरना द्वीप को ट्रेनिंग के लिए चुने जाने के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं. यह कराची पोर्ट और पाकिस्तान के समुद्री इलाके के काफी करीब है. यहां तक पहुंचना आसान है और समुद्र में ट्रेनिंग के लिए कई तरह की परिस्थितियां भी मौजूद हैं.

इसके अलावा चरना द्वीप पर बड़ी संख्या में पर्यटक स्कूबा डाइविंग और दूसरी समुद्री गतिविधियों के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में पर्यटकों की भीड़ के बीच संदिग्ध गतिविधियों को छिपाना आसान हो सकता है.

यह द्वीप चारों तरफ से चट्टानों से घिरा है. यहां समुद्र की लहरें और पानी की गहराई भी काफी चुनौतीपूर्ण हैं. ऐसे माहौल में ट्रेनिंग लेने से किसी भी व्यक्ति को मुश्किल समुद्री परिस्थितियों में काम करने का अभ्यास मिल सकता है.

रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि आतंकियों को रात के अंधेरे और खराब मौसम में समुद्र के रास्ते आगे बढ़ने के लिए तैयार किया जा रहा है. अगर ये दावे सही साबित होते हैं तो भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए यह गंभीर चिंता का विषय हो सकता है.