नई दिल्ली, स्पेशल डेस्क: Nirbhaya Case 2012 तेईस वर्षीय पैरामेडिकल की छात्रा के साथ चलती बस में 16 दिसंबर, 2012 की रात को ड्राइवर समेत छह लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था. इस दौरान दरिंदों ने निर्भया के शरीर के साथ भी दरिंदगी की, जिसके बारे में सुनकर लोगों के पैरों तले जमीन खिसक गई थी. सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद निर्भया को दिल्ली के नामी अस्पताल में इलाज भर्ती कराया गया था. कहा जाता है कि दुष्कर्म युवती/महिला के शरीर के साथ-साथ उसकी आत्मा तक को दर्द पहुंचाता है, जिसका एहसास शायद पीड़ित ताउम्र नहीं भूल पाता है.
सामूहिक दुष्कर्म ने आत्मा तक को दुखाया था
यहां पर बता दें कि दरिंदगी की शिकार निर्भया न केवल जीना चाहती थी, बल्कि आरोपियों को सख्त से सख्त सजा भी दिलाना चाहती थी. अस्पताल में इलाज के दौरान भयंकर के दौरान निर्भया ने अपनी मां के साथ कई बातें शेयर की थी. उनमें से एक यह भी थी. निर्भया ने मौत से एक सप्ताह पहले दर्द और इलाज के दौरान यह भी बताया था कि वह क्या करना चाहती है. उसने यह भी कहा था कि दरिंदगी के चलते उसे अपने शरीर से ही नफरत हो गई है.
पर्ची पर लिखी थीं बातें
मौत से कुछ दिन पूर्व निर्भया की हालत कुछ ज्यादा ही खराब हो गई थी. निर्भया की हालत ऐसी नहीं थी कि वह कुछ बोल भी सके. इसके चलते उसने अपनी मां को छोटी-छोटी पर्चियों पर मन की बातें लिख कर बातें शेयर कर रही थी. इनमें एक पर्ची पर उसने लिखा था मां मैं नहाना चाहती हूं. उसने लिखा था- मैं उन दरिंदों की गंदी छुअन को धोना चाहती हूं. निर्भया ने यह भी लिखा था कि मां मैं झरने के नीचे बैठ कर नहाना चाहती हूं. दरिंदों की गंदी छुअन के कारण उसे अपने ही शरीर से नफरत हो गई थी.
मत जाओ छोड़कर, मां लगता है डर
निर्भया ने एक पर्ची में यह भी लिखा था कि आप कहीं मत जाना, मुझे अकेले में डर लगता है. दरअसल, निर्भया के मन में एक अजीब तरह का भय बैठ गया था. इस बारे में एंथ्रोपॉलोजोजिस्ट डा. अनुपमा भारद्वाज का कहना है कि निर्भया को शायद यह अंदाज हो गया था कि वह शायद आगे जी नहीं पाए, इसलिए ऐसी भावना जाहिर की होगी. बता दें कि मौत से सात दिन पहले 22 दिसंबर, 2012 को निर्भया ने अपनी मां को अपनी इच्छा बताई थी जो शायद आखिरी इच्छा बन कर रह गई. वह भरपूर जीना चाहती थी और सभी दरिंदों को सजा दिला चाहती थी.
सिंगापुर में 29 दिसंबर को हुई थी निर्भया की मौत
यहां पर बता दें कि पैरामेडिकल की छात्रा के साथ 16 दिसंबर, 2012 की रात को उस समय दरिंदगी हुई थी जब वह अपने पुरुष मित्र के साथ घर लौट रही थी. घर आने के क्रम में निर्भया अपने दोस्त के साथ बस में सवार हुई थी तब उसे अंदाजा भी नहीं था कि वाहन में 6 दरिंदें भी मौजूद हैं. बस में सफर करने के दौरान सभी छह दरिंदगों (इनमें एक नाबालिग भी था) ने निर्भया के साथ न केवल सामूहिक दुष्कर्म किया, बल्कि उसके साथ के साथ अमानवीयता भी की. इस दौरान उसके प्राइवेट पार्ट को भी चोट पहुंचाई. दिल्ली के नामी अस्पताल में भर्ती निर्भया की हालत में सुधार नहीं होते देखकर इलाज के लिए सिंगापुर के माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था, यहां उसने 29 दिसंबर को रात के करीब सवा दो बज दम तोड़ दिया.