Indus Waters Treaty: सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद अभी भी जारी है. पहलगाम हमले के बाद भारत ने इस समझौते को निलंबित करने का फैसला लिया था. इसके बाद पाकिस्तान लगातार अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठा रहा है. पाकिस्तानी विशेषज्ञ और मीडिया अपने-अपने तरीके से संधि के नियमों की व्याख्या कर रहे हैं.
पाकिस्तान का कहना है कि भारत इस संधि को अपनी मर्जी से एकतरफा तरीके से नहीं रोक सकता. वहीं, भारत का रुख है कि मौजूदा हालात में सिंधु जल संधि को उसके पुराने रूप में दोबारा लागू नहीं किया जा सकता. इसी बीच पाकिस्तानी मीडिया में यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि अगर भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है तो क्या उसके खिलाफ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.
पैराडाइम शिफ्ट ने सिंधु जल संधि पर क्या कहा?
पाकिस्तानी मीडिया प्लेटफॉर्म 'पैराडाइम शिफ्ट' ने अपनी रिपोर्ट में सिंधु जल संधि को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि किसी अंतरराष्ट्रीय संधि को एकतरफा तरीके से रोकने के लिए कानूनी आधार जरूरी होता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, वियना कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ ट्रीटीज में संधि को निलंबित करने के कुछ प्रावधान हैं. इनमें संधि के गंभीर उल्लंघन की स्थिति, परिस्थितियों में बड़ा बदलाव और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत प्रतिकारात्मक कदम शामिल हैं.
'पैराडाइम शिफ्ट' का दावा है कि भारत ने जिस तरह सिंधु जल संधि को निलंबित किया है, वह इन प्रावधानों के तहत सही नहीं ठहरता. रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल किसी दूसरे मुद्दे को आधार बनाकर किसी संधि से जुड़े दायित्वों को रोकना आसान नहीं है.
पाकिस्तान को बताया पाक-साफ मुल्क
'पैराडाइम शिफ्ट' ने अपनी रिपोर्ट में यह भी दावा किया कि पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि के तहत अपने दायित्वों का उल्लंघन नहीं किया है. रिपोर्ट में कहा गया कि इस मामले में यह देखना जरूरी है कि क्या पाकिस्तान ने संधि में तय किसी जिम्मेदारी को तोड़ा है.
इसमें डेटा साझा करने, नदी परियोजनाओं से जुड़े डिजाइन नियमों और स्थायी सिंधु आयोग के कामकाज जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया है. पाकिस्तानी प्लेटफॉर्म का दावा है कि इन मामलों में पाकिस्तान ने संधि का उल्लंघन नहीं किया.
रिपोर्ट में यह तर्क भी दिया गया है कि पाकिस्तान के खिलाफ किसी दूसरे मामले में लगाए गए आरोपों को सिंधु जल संधि के उल्लंघन के तौर पर नहीं देखा जा सकता.
भारत पर लगाया संधि के उल्लंघन का आरोप
पाकिस्तानी मीडिया ने भारत के उस फैसले पर भी सवाल उठाया है, जिसमें आतंकवाद को लेकर सिंधु जल संधि को निलंबित किया गया. 'पैराडाइम शिफ्ट' का कहना है कि किसी अलग अंतरराष्ट्रीय विवाद या दायित्व को आधार बनाकर एक संधि को रोकना उचित नहीं माना जा सकता.
रिपोर्ट में वियना कन्वेंशन के अनुच्छेद 60 का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी संधि को निलंबित करने के लिए उससे जुड़े गंभीर उल्लंघन का आधार होना चाहिए. रिपोर्ट के अनुसार, अगर किसी असंबंधित विवाद के आधार पर संधियां रोकने की अनुमति दे दी जाए तो कई द्विपक्षीय समझौतों पर इसका असर पड़ सकता है.
पाकिस्तानी मीडिया ने सिंधु जल संधि के मानवीय पहलू का भी जिक्र किया है. उसका कहना है कि यह समझौता बड़ी आबादी की पानी और कृषि जरूरतों से जुड़ा है. इसी वजह से संधि को केवल सामान्य तकनीकी या व्यापारिक समझौते की तरह नहीं देखा जाना चाहिए.