नई दिल्ली: बच्चों को चिप्स, कुरकुरे, कोल्ड ड्रिंक, समोसे और बर्गर जैसी चीजें काफी पसंद आती हैं. स्कूल की छुट्टी होते ही कैंटीन या आसपास की दुकानों पर बच्चों की भीड़ नजर आना आम बात है. लेकिन अब स्कूलों के आसपास मिलने वाले इन जंक फूड पर रोक लग सकती है. बच्चों को मोटापे और अनहेल्दी खाने की आदत से बचाने के लिए सरकार सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है. देश में बच्चों के बीच बढ़ते मोटापे के मामलों को देखते हुए यह प्रस्ताव तैयार किया गया है.
प्रस्ताव के तहत स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में हाई फैट, शुगर और सॉल्ट (HFSS) यानी ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले जंक फूड की बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है. इस नियम का असर देश के करीब 15 लाख स्कूलों के आसपास की दुकानों और ठेलों पर पड़ सकता है. हालांकि, स्थानीय दुकानदारों के साथ-साथ बड़ी कंपनियों की ओर से भी इस प्रस्ताव को लेकर चिंता जताई जा रही है. सरकार का कहना है कि इसका मकसद बच्चों को कम उम्र से ही स्वस्थ खाने की आदत डालना है.
स्कूलों के आसपास जंक फूड बैन करने की तैयारी
भारत में बच्चों के बीच जंक फूड का चलन लगातार बढ़ रहा है. कम कीमत और आकर्षक विज्ञापनों की वजह से चिप्स, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक और दूसरे पैक्ड फूड बच्चों को आसानी से पसंद आ जाते हैं. कई बच्चे घर के पौष्टिक खाने की जगह पैक्ड स्नैक्स को ज्यादा पसंद करने लगे हैं. इसी आदत को बदलने के लिए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने यह प्रस्ताव तैयार किया है.
प्रस्ताव के मुताबिक, स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में मौजूद दुकानों और ठेलों पर चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट, पिज्जा और बर्गर जैसे HFSS फूड की बिक्री रोकी जा सकती है. FSSAI के मुख्य कार्यकारी रजित पुन्हानी के मुताबिक, इसका मकसद बच्चों में हेल्दी ईटिंग की आदत को बढ़ावा देना है. दुकानदारों को नॉन-HFSS यानी कम फैट, चीनी और नमक वाले हेल्दी प्रोडक्ट बेचने की अनुमति होगी. इससे कंपनियों पर भी अपने प्रोडक्ट की सामग्री और रेसिपी में बदलाव करने का दबाव बढ़ सकता है.
बच्चों में तेजी से बढ़ रहा मोटापा, आंकड़े चिंताजनक
जंक फूड की बढ़ती खपत सिर्फ भारत की समस्या नहीं है. दुनिया के कई देशों में बच्चों में मोटापे के मामले बढ़ रहे हैं. वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 5 से 19 साल की उम्र के ओवरवेट या मोटापे से ग्रस्त बच्चों की संख्या 2015 में करीब 2.8 करोड़ थी. 2025 में यह संख्या बढ़कर करीब 4.1 करोड़ हो गई. अनुमान है कि 2040 तक यह आंकड़ा 5.6 करोड़ तक पहुंच सकता है.
सस्ते जंक फूड की वजह से बढ़ रही बिक्री
बदलती लाइफस्टाइल और कम कीमत में मिलने वाला जंक फूड भी इस समस्या की एक वजह माना जा रहा है. 49 रुपये जैसे कम दाम में मिलने वाले पिज्जा और दूसरे फास्ट फूड बच्चों को आसानी से आकर्षित करते हैं. यही वजह है कि महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में स्कूलों के आसपास ऐसे खाद्य पदार्थ बेचने वाली दुकानों पर कार्रवाई की शुरुआत की गई है.
दूसरे देशों में भी बच्चों को जंक फूड से दूर रखने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं. चिली इसका एक उदाहरण है. वहां कड़े नियम लागू किए जाने के बाद बच्चों में बढ़ते वजन की समस्या में कमी देखी गई है. भारत में भी स्कूलों के आसपास HFSS फूड की बिक्री रोकने का प्रस्ताव इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है.