ओरेकल के दिग्गज संस्थापक लैरी एलिसन, जो दुनिया के दूसरे सबसे अमीर शख्स हैं, अपनी अपार संपत्ति को समाज की भलाई के लिए दान करने की दिशा में कदम बढ़ा चुके हैं. उनकी कुल दौलत करीब 373 अरब डॉलर (लगभग 31 लाख करोड़ रुपये) है, जो AI की लहर पर सवार होकर आसमान छू रही है. यह फैसला न सिर्फ उनकी उदारता की मिसाल है, बल्कि दुनिया भर में चर्चा का विषय भी बन गया है.
AI की जादूगरी: दौलत का रॉकेट लॉन्च
पिछले कुछ महीनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर की तेज रफ्तार ने लैरी एलिसन की संपत्ति को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है. ओरेकल के शेयरों में आई भारी तेजी का श्रेय इसी AI बूम को जाता है, जिसने कंपनी को क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा एनालिटिक्स के मामले में आगे कर दिया. ऊपर से, टेस्ला जैसी इनोवेटिव कंपनियों में उनके निवेश ने भी कमाई का ग्राफ चढ़ाया है. एलिसन की 41% ओरेकल स्टेक और टेस्ला होल्डिंग्स ने उनकी नेट वर्थ को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया, जो सितंबर 2025 तक 373 अरब डॉलर को पार कर चुकी है. यह वृद्धि दर्शाती है कि एलिसन का विजन न सिर्फ टेक जगत को, बल्कि उनकी परोपकारी योजनाओं को भी पावर दे रहा है.
गिविंग प्लेज: 95% दान का साहसी संकल्प
2010 में लैरी एलिसन ने 'गिविंग प्लेज' पहल से जुड़कर एक साहसी वादा किया था अपनी कुल संपत्ति का 95% हिस्सा समाज के लिए दान कर देंगे. लेकिन एलिसन ने साफ कर दिया कि वे पारंपरिक चैरिटी के रास्ते पर नहीं चलेंगे. उनका तरीका अनोखा है अपनी शर्तों पर, अपने विजन से समाज सेवा. यह संकल्प बिल गेट्स और वॉरेन बफेट जैसे दिग्गजों की इस पहल का हिस्सा था, जो अरबपतियों को दान की प्रेरणा देती है. एलिसन का यह वादा आज भी प्रासंगिक है, खासकर जब उनकी दौलत $393 अरब तक पहुंच चुकी है.
एलिसन इंस्टीट्यूट: ऑक्सफोर्ड का 1.3 अरब डॉलर का सपना
एलिसन की परोपकारी दुनिया का सितारा है एलिसन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (EIT), जो ब्रिटेन के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के पास स्थित है. यह संस्थान हेल्थकेयर, फूड सिक्योरिटी, क्लाइमेट चेंज और AI जैसे वैश्विक संकटों पर रिसर्च कर रहा है. 2027 तक पूरा होने वाला इसका नया कैंपस करीब 1.3 अरब डॉलर (लगभग 10,800 करोड़ रुपये) की लागत से बनेगा, जो £1 बिलियन से ज्यादा का निवेश है. EIT का मिशन साइंस को रियल-वर्ल्ड सॉल्यूशंस में बदलना है, और यह ऑक्सफोर्ड को सिलिकॉन वैली जैसा हब बनाने की कोशिश है. एलिसन खुद इस प्रोजेक्ट को नजदीक से मॉनिटर कर रहे हैं.
पुराने दान: अरबों का सफर, लेकिन सवाल भी
लैरी एलिसन का दान का इतिहास लंबा है. उन्होंने साउदर्न कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी को कैंसर रिसर्च सेंटर के लिए 200 मिलियन डॉलर (करीब 1,600 करोड़ रुपये) दिए. एलिसन मेडिकल फाउंडेशन को करीब 1 अरब डॉलर का योगदान किया, जो एजिंग और बीमारियों पर फोकस करता था. लेकिन कई बार आलोचना भी हुई कि उनके प्रत्यक्ष दान वादे से कम रहे. फिर भी, उनके संस्थान और लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट्स अरबों डॉलर की मदद पहुंचा रहे हैं, जो समाज को अप्रत्यक्ष रूप से मजबूत कर रहे हैं.
पिछले साल EIT को आंतरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. 2024 में वैज्ञानिक जॉन बेल को प्रमुख बनाया गया, लेकिन जल्द ही उन्होंने पद छोड़ दिया. इसके बावजूद, एलिसन की टीम मिशन को आगे बढ़ा रही है. एलिसन खुद प्रोजेक्ट के करीब हैं और नए लीडर्स के साथ इसे मजबूत बनाने में जुटे हैं. यह बदलाव दर्शाता है कि बड़े विजन में उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन एलिसन का जुनून नहीं रुकता.
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