Bangladesh Political Crisis: बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर बड़े उथल-पुथल की ओर बढ़ती दिख रही है. शेख हसीना सरकार के पतन के बाद जिन उम्मीदों के साथ नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को देश की अंतरिम सत्ता सौंपी गई थी, वही उम्मीदें अब उनके लिए सबसे बड़ा खतरा बनती नजर आ रही हैं. जिन छात्र संगठनों और क्रांतिकारी समूहों ने यूनुस को बदलाव का प्रतीक मानकर सत्ता तक पहुंचाया था, अब वही संगठन उनके खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में हैं. इस उबाल की जड़ है इंकलाब मंच के प्रमुख युवा नेता और प्रवक्ता उस्मान हादी की हत्या.
इस जघन्य हत्या को दो हफ्ते से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है. इसी बात से नाराज इंकलाब मंच ने यूनुस सरकार को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है. संगठन का कहना है कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो अंतरिम सरकार को सत्ता से हटाने के लिए आंदोलन शुरू किया जाएगा. ढाका की सड़कों पर एक बार फिर वही नारे सुनाई देने लगे हैं, जो कुछ महीने पहले शेख हसीना सरकार के खिलाफ गूंज रहे थे. फर्क बस इतना है कि इस बार निशाने पर यूनुस सरकार है.
इंकलाब मंच का खुला ऐलान
सोमवार को इंकलाब मंच की एक अहम बैठक हुई, जिसमें सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया. संगठन के नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि उस्मान हादी की हत्या के बाद सरकार को एक तय समय दिया गया था, लेकिन वह समय सीमा अब खत्म हो चुकी है और पुलिस अब भी खाली हाथ है.
इमरजेंसी प्रेस कॉन्फ्रेंस और विरोध सभा में मंच के नेताओं ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि अगर न्याय नहीं मिला, तो वे इस सरकार को उखाड़ फेंकने से पीछे नहीं हटेंगे. उनका कहना था कि जिन्होंने सरकार बनाना सिखाया है, वे उसे गिराना भी जानते हैं.
यूनुस के लिए क्यों बढ़ी मुश्किलें
मोहम्मद यूनुस के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक मानी जा रही है. बांग्लादेश का हालिया राजनीतिक इतिहास बताता है कि जब छात्र और युवा संगठन किसी एक मुद्दे पर एकजुट हो जाते हैं, तो सबसे मजबूत सरकारें भी टिक नहीं पातीं.
इंकलाब मंच का आरोप है कि जिस अंतरिम सरकार को कानून का राज स्थापित करने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सत्ता सौंपी गई थी, वही सरकार अपने सबसे मजबूत समर्थकों की सुरक्षा तक नहीं कर पा रही है. उस्मान हादी जैसे प्रभावशाली चेहरे की हत्या को संगठन सरकार की विफलता के रूप में देख रहा है.
गृह मंत्रालय और पुलिस प्रशासन पर सवाल
इंकलाब मंच का गुस्सा सिर्फ डॉ. यूनुस तक सीमित नहीं है. संगठन ने गृह सलाहकार और पुलिस प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि समय बीत जाने के बावजूद न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही जांच में कोई ठोस प्रगति दिखाई दी.
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि हत्यारों से जुड़े सुराग मौजूद होने के बावजूद पुलिस निष्क्रिय बनी हुई है. संगठन ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या प्रशासन के भीतर अब भी पुराने शासन के समर्थक बैठे हैं, जो जानबूझकर जांच को कमजोर कर रहे हैं, या फिर मौजूदा सरकार अपराधियों के सामने बेबस हो चुकी है.
आम जनता की सुरक्षा पर उठे सवाल
इंकलाब मंच के नेताओं का कहना है कि जब उस्मान हादी जैसे प्रमुख और चर्चित नेता सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा. उनके मुताबिक, यह स्थिति सीधे तौर पर अंतरिम सरकार की प्रशासनिक अक्षमता को उजागर करती है. संगठन का दावा है कि अगर सरकार अब भी नहीं चेती, तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा और हालात बेकाबू हो सकते हैं.
आंदोलन की चेतावनी और आगे की रणनीति
इंकलाब मंच की धमकी को सिर्फ बयानबाजी मानकर नजरअंदाज करना आसान नहीं है. उस्मान हादी की हत्या के बाद युवाओं में जो आक्रोश है, वह किसी भी वक्त बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है. मंच ने संकेत दिए हैं कि अगर हत्यारे गिरफ्तार नहीं हुए, तो वे सरकारी कामकाज ठप करेंगे, ढाका में बड़े पैमाने पर शक्ति प्रदर्शन करेंगे और प्रमुख सरकारी इमारतों का घेराव करेंगे. इसके साथ ही यूनुस सरकार के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाने और नई राजनीतिक व्यवस्था की मांग करने की भी तैयारी की जा रही है.
राजनीतिक विश्लेषकों की चेतावनी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर इंकलाब मंच सड़कों पर उतरता है, तो अन्य असंतुष्ट छात्र और युवा संगठन भी उनके साथ जुड़ सकते हैं. ऐसी स्थिति में देश एक बार फिर अराजकता की ओर बढ़ सकता है, जिससे निपटना मोहम्मद यूनुस सरकार के लिए बेहद कठिन होगा.
फिलहाल पूरा बांग्लादेश इस सवाल पर टिका है कि क्या यूनुस सरकार समय रहते कार्रवाई कर पाएगी, या फिर हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद देश एक और बड़े राजनीतिक तूफान का गवाह बनने जा रहा है.
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