Sawan: सावन में महिलाएं क्यों पहनती हैं हरी चूड़ियां? माता पार्वती से जुड़ी है यह परंपरा, जानिए इसका महत्व

Sawan 2026: सावन में सुहागिन महिलाओं के हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा केवल श्रृंगार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध माता पार्वती की पूजा, अखंड सौभाग्य की कामना और ज्योतिष में बुध ग्रह से जुड़ी शुभ मान्यताओं से भी माना जाता है.

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Sawan 2026: सावन का महीना आते ही चारों ओर हरियाली, भक्ति और उत्सव का माहौल दिखाई देने लगता है. यह पवित्र महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है तो वहीं सुहागिन महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए विशेष पूजा-अर्चना करती हैं. इस दौरान उनके सोलह श्रृंगार में हरी चूड़ियों का विशेष स्थान होता है. हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि सावन में हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा केवल श्रृंगार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी धार्मिक, सांस्कृतिक और ज्योतिषीय मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं.

कब से शुरू होगा सावन 2026?

वर्ष 2026 में सावन का पावन महीना 30 जुलाई, गुरुवार से शुरू होकर 28 अगस्त, शुक्रवार तक रहेगा. इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा, सोमवार व्रत, रुद्राभिषेक और माता पार्वती की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. इसी दौरान विवाहित महिलाएं पारंपरिक श्रृंगार के साथ हरी चूड़ियां धारण करती हैं और अपने परिवार के सुख-शांति की कामना करती हैं.

माता पार्वती से जुड़ी है हरी चूड़ियों की परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था. उनकी अटूट भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया. मान्यता है कि माता पार्वती ने प्रकृति की हरियाली और हरे रंग को अपने श्रृंगार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया था. तभी से हरे रंग को सौभाग्य, प्रेम और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाने लगा. इसी विश्वास के चलते सावन के महीने में सुहागिन महिलाएं हरी चूड़ियां पहनकर माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करती हैं.

हरा रंग क्यों माना जाता है शुभ?

भारतीय संस्कृति में हरे रंग का विशेष महत्व है. यह रंग हरियाली, समृद्धि, नई शुरुआत, उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. सावन का महीना स्वयं प्रकृति के नवजीवन और हरियाली का प्रतीक होता है, इसलिए इस मौसम में हरे रंग का महत्व और भी बढ़ जाता है. इसी कारण महिलाएं इस दौरान केवल हरी चूड़ियां ही नहीं, बल्कि हरी साड़ी, हरी बिंदी और हरे रंग के अन्य श्रृंगार का भी विशेष रूप से उपयोग करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहती है.

अखंड सौभाग्य की कामना से पहनी जाती हैं हरी चूड़ियां

सावन में हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य अखंड सौभाग्य की कामना भी माना जाता है. सुहागिन महिलाएं माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करते हुए अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में प्रेम व विश्वास बनाए रखने की प्रार्थना करती हैं. मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ हरी चूड़ियां धारण करने से माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है.

ज्योतिष में भी बताया गया है हरे रंग का महत्व

ज्योतिष शास्त्र में हरे रंग का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है. बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, व्यापार, निर्णय क्षमता और संवाद का कारक माना गया है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार हरे रंग का प्रयोग करने से बुध ग्रह के शुभ प्रभावों में वृद्धि हो सकती है. इसी वजह से सावन में हरी चूड़ियां पहनने को केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इससे घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और जीवन में संतुलन तथा समृद्धि बनी रहती है.

आस्था और परंपरा का सुंदर संगम

सावन में हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा भारतीय संस्कृति की उन परंपराओं में शामिल है, जहां आस्था, प्रकृति और पारिवारिक मूल्यों का सुंदर मेल देखने को मिलता है. यह केवल एक श्रृंगार नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रेम और शुभकामनाओं का प्रतीक माना जाता है.

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