India Test Team: जबसे गौतम गंभीर टीम इंडिया के हेड कोच बने हैं, टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम का प्रदर्शन लगातार सवालों के घेरे में है. 6 सीरीज में से भारत ने केवल दो जीती, तीन हारी और एक ड्रॉ रही. न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका ने तो भारत को उसकी ही सरजमीं पर क्लीन स्वीप कर दिया.
साल 2023 के मध्य तक नंबर-1 टीम रही भारत, अब लगातार निराशाजनक प्रदर्शन कर रही है. आइए जानते हैं तीन प्रमुख कारण, जिनकी वजह से टीम इंडिया का टेस्ट खेल झूल रहा है.
1. ऑलराउंडरों की भरमार ने दी मुश्किल
गौतम गंभीर ने टीम में बल्लेबाजी गहराई को बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन इसके चलते गेंदबाजी कमजोर पड़ गई. पहले भारतीय टीम में 6 स्पेशलिस्ट बल्लेबाज और 5 स्पेशलिस्ट गेंदबाज होते थे, जबकि अब कई टेस्ट मैचों में 3 या अधिक ऑलराउंडर खेल रहे हैं.
गुवाहाटी टेस्ट इसका उदाहरण है, जिसमें रवींद्र जडेजा, वाशिंगटन सुंदर और नितीश रेड्डी तीनों ऑलराउंडर थे. सुंदर और रेड्डी दोनों ही बल्ले और गेंद दोनों में संतोषजनक नहीं दिखे. अगर उनकी जगह किसी स्पेशलिस्ट बल्लेबाज या गेंदबाज को उतारा गया होता, तो शायद दक्षिण अफ्रीका सीरीज का नतीजा अलग होता.
2. IPL पर आधारित चयन की नीतियां
पिछले डेढ़ साल में IPL प्रदर्शन के आधार पर कई युवा खिलाड़ी टीम में शामिल हुए. हर्षित राणा इसका प्रमुख उदाहरण हैं, जिनके पास केवल 14 फर्स्ट-क्लास और 27 लिस्ट-A मैचों का अनुभव है. बावजूद इसके उन्होंने KKR के लिए IPL में शानदार प्रदर्शन किया.
इसी तरह नितीश रेड्डी और वाशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ी भी इस श्रेणी में आते हैं. IPL में अच्छे प्रदर्शन का मतलब टेस्ट क्रिकेट में भी सफलता की गारंटी नहीं है, और टीम इंडिया का वर्तमान रिकॉर्ड यही दिखाता है.
3. लगातार बदलता बल्लेबाजी क्रम
भारतीय टेस्ट टीम में लगातार नंबर-3 और मध्यक्रम को लेकर उलझन बनी हुई है. साई सुदर्शन को ड्रॉप कर पहले टेस्ट में सुंदर को नंबर-3 पर खिलाया गया, फिर सुदर्शन को वापस लाया गया और सुंदर को नंबर-8 पर भेजा गया.
नंबर-3 का स्थान टेस्ट में बहुत महत्वपूर्ण होता है, और लगातार बदलाव खिलाड़ियों की मनोवैज्ञानिक स्थिरता को प्रभावित कर रहा है. टी20 टीम में भी यही समस्या देखने को मिली, जैसे संजू सैमसन के साथ ओपनिंग में फेरबदल.
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