गुवाहाटी टेस्ट में जो हुआ, उसने भारतीय क्रिकेट फैंस को झकझोर कर रख दिया. बुधवार (26 नवंबर) को भारत को साउथ अफ्रीका के हाथों 408 रनों से करारी शिकस्त मिली, जो टेस्ट इतिहास में उसकी अब तक की सबसे बड़ी रन-अंतर की हार है. इस हार ने सिर्फ सीरीज का नतीजा नहीं बदला, बल्कि यह भी साफ कर दिया कि टीम इंडिया फिलहाल गहरे संकट से गुजर रही है. घर में 0-2 से व्हाइटवॉश — वह भी 25 साल बाद — क्रिकेट जगत के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं है.
गुवाहाटी में शर्मनाक हार के बाद हेड कोच गौतम गंभीर visibly टूटे हुए नज़र आए. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके भविष्य पर फैसला पूरी तरह से बीसीसीआई के हाथ में है. गंभीर ने यह भी याद दिलाया कि उनके नेतृत्व में भारत ने इस साल इंग्लैंड के खिलाफ विदेशी धरती पर 2-2 की बराबरी की थी और चैम्पियंस ट्रॉफी भी जीती थी. उनके शब्द थे. मेरे भविष्य का फैसला बोर्ड करेगा, लेकिन मैं वही व्यक्ति हूं जिसने आपको इंग्लैंड में नतीजे दिलाए और चैम्पियंस ट्रॉफी जिताई. लेकिन यह बयान भी बढ़ते दबाव को कम नहीं कर पाया.
ड्रेसिंग रूम का मनोबल गिरा, गंभीर ने माना—गलती सबकी है
गंभीर ने स्वीकार किया कि ड्रेसिंग रूम में जिम्मेदारी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे सेटअप की होती है. उन्होंने 95/1 से 122/7 तक फिसल जाने को टीम की सबसे बड़ी चूक बताया. उन्होंने कहा कि वह किसी खिलाड़ी को दोषी ठहराने में विश्वास नहीं रखते और गलती सामूहिक है. इस हार ने यह भी दिखाया कि टीम की मानसिक मजबूती और तकनीकी तैयारी दोनों पर अभी काफी काम बाकी है.
गंभीर के कार्यकाल की कड़ी परीक्षा, आंकड़े खुद कहानी कह रहे
गौतम गंभीर की कोचिंग में भारत ने 18 टेस्ट खेले, जिनमें से 10 में उसे हार मिली है. घर में न्यूजीलैंड से 0-3 की हार और साउथ अफ्रीका से 0-2 का हालिया व्हाइटवॉश, दोनों गंभीर के कार्यकाल के सबसे बड़े दाग माने जा रहे हैं. गुवाहाटी की यह 408 रन वाली हार अब भारतीय टेस्ट इतिहास की सबसे खराब हार बन चुकी है.
टीम चयन पर उठ रहे सवाल, ऑलराउंडर्स पर ज़ोर बना विवाद
पिछले कुछ महीनों से गंभीर पर टीम में लगातार बदलाव करने और स्पेशलिस्ट टेस्ट खिलाड़ियों की जगह ज़्यादा ऑलराउंडर्स खिलाने को लेकर आलोचना बढ़ी है. क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिर प्लेइंग इलेवन के बिना टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन संभालना मुश्किल होता है. वर्तमान परिस्थितियों में, बीसीसीआई क्या फैसला लेती है और गंभीर अपना कार्यकाल आगे जारी रखते हैं या नहीं यह अब भारतीय क्रिकेट का सबसे बड़ा सवाल बन चुका है.
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