BCCI ने ईशान किशन को विजय हजारे ट्रॉफी से क्यों किया बाहर? सामने आई ये बड़ी वजह

Ishan Kishan Rested: ईशान किशन इस वक्त क्रिकेट की दुनिया में चर्चा का विषय बने हुए हैं. उनका बल्ला इस समय जमकर रन बना रहा है और उन्होंने हाल ही में विजय हजारे ट्रॉफी में 34 गेंदों में शतक लगाकर सभी को हैरान कर दिया. लेकिन इसके बावजूद, अगले ही मैच में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया. ऐसा क्यों हुआ?

Why did BCCI drop Ishan Kishan from the Vijay Hazare Trophy
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Ishan Kishan Rested: ईशान किशन इस वक्त क्रिकेट की दुनिया में चर्चा का विषय बने हुए हैं. उनका बल्ला इस समय जमकर रन बना रहा है और उन्होंने हाल ही में विजय हजारे ट्रॉफी में 34 गेंदों में शतक लगाकर सभी को हैरान कर दिया. लेकिन इसके बावजूद, अगले ही मैच में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया. ऐसा क्यों हुआ? क्या उनकी बैटिंग फॉर्म पर असर पड़ा? इस फैसले के पीछे एक दिलचस्प कारण है, जो सीधे तौर पर बीसीसीआई से जुड़ा हुआ है. आइए जानते हैं ईशान किशन के टीम से बाहर होने की असल वजह.

शतक के बाद भी टीम से बाहर क्यों?

ईशान किशन ने जब विजय हजारे ट्रॉफी में शतक जड़ा तो सभी को लगा कि वो अपनी टीम के अगले मैच में भी प्लेइंग इलेवन का हिस्सा होंगे. लेकिन इसके बावजूद उन्हें राजस्थान के खिलाफ मैच में जगह नहीं मिली. झारखंड टीम के कप्तान कुमार कुशाग्र ने इस बारे में बताया कि बीसीसीआई ने उन्हें आराम देने की सलाह दी थी. दरअसल, ईशान किशन को आगामी न्यूजीलैंड टी20 सीरीज और टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए टीम में शामिल किया गया है. बीसीसीआई ने उन्हें चोट से बचाने और पूरी तरह से फ्रेश रखने के लिए इस मैच से बाहर किया है.

बीसीसीआई ने ईशान किशन को आराम देने का निर्णय लिया, ताकि वह अपनी फिटनेस और ताजगी बनाए रखें. ईशान किशन अब 2 जनवरी से टीम से जुड़ेंगे. इस दौरान उन्हें पूरी तरह से फिट और ताजगी से भरपूर रखने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वो आने वाले बड़े मुकाबलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें.

ईशान किशन का बल्ला चल रहा है धमाकेदार

ईशान किशन की बैटिंग फॉर्म पिछले कुछ समय से शानदार रही है. उन्होंने हाल ही में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में झारखंड को चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. इस टूर्नामेंट में उन्होंने 517 रन बनाए थे और उनका स्ट्राइक रेट करीब 200 का था. ईशान ने टूर्नामेंट में 2 शतक और 2 अर्धशतक लगाए थे, साथ ही फाइनल में एक शानदार सेंचुरी ठोकते हुए अपनी टीम को पहली बार यह ट्रॉफी जिताई थी. इसके बाद उन्होंने झारखंड के खिलाफ 39 गेंदों में 125 रन की ताबड़तोड़ पारी खेली थी, जिसमें उन्होंने 14 छक्के मारे थे.

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