Who was Osman Hadi: बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसक प्रदर्शनों की गिरफ्त में आ गया है. जुलाई 2024 के जनआंदोलन से उभरे प्रमुख चेहरे शरीफ उस्मान हादी के निधन के बाद देशभर में आक्रोश फूट पड़ा है. राजधानी ढाका से लेकर कई अन्य शहरों तक हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं. देर रात और तड़के तक चले प्रदर्शनों के दौरान आगजनी, तोड़फोड़ और तनावपूर्ण हालात देखने को मिले, जिससे पूरे देश में अस्थिरता का माहौल बन गया है.
हादी की मौत की खबर फैलते ही गुरुवार देर रात ढाका में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर जमा हो गए. प्रदर्शनकारियों ने न्याय की मांग करते हुए नारेबाजी की और कई इलाकों में आगजनी की घटनाएं सामने आईं. हालात जल्द ही राजधानी से बाहर भी फैल गए. अलग-अलग शहरों में अवामी लीग से जुड़ी संपत्तियों को निशाना बनाया गया और कुछ जगहों पर भारतीय राजनयिक परिसरों की ओर मार्च करने की कोशिशें भी हुईं, जिससे सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर आ गईं.
सिंगापुर में इलाज के दौरान तोड़ा दम
शरीफ उस्मान हादी को 15 दिसंबर को गंभीर हालत में सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया था. ढाका में सिर में गोली लगने के बाद उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी. डॉक्टरों ने छह दिनों तक उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन 18 दिसंबर 2025 को उनकी मौत हो गई. सिंगापुर के विदेश मंत्रालय ने भी आधिकारिक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की कि इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी.
ढाका में ऑटो-रिक्शा में हुआ था हमला
यह हमला 12 दिसंबर को ढाका के पलटन इलाके की कलवर्ट रोड पर हुआ था. हादी बैटरी से चलने वाले एक ऑटो-रिक्शा में यात्रा कर रहे थे, तभी अज्ञात बंदूकधारियों ने उनके सिर में गोली मार दी. उन्हें तुरंत ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, बाद में हालत बिगड़ने पर एवरकेयर अस्पताल में भर्ती कराया गया. वहां से बेहतर इलाज के लिए उन्हें एयरलिफ्ट कर सिंगापुर भेजा गया था.
कौन थे शरीफ उस्मान हादी?
शरीफ उस्मान हादी शेख हसीना विरोधी संगठन ‘इंकलाब मंच’ के प्रमुख चेहरों में शामिल थे और फरवरी में होने वाले आगामी चुनावों में ढाका-8 संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे थे. जुलाई 2024 के जनउभार में उनकी भूमिका के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे. इंकलाब मंच ने उस आंदोलन के दौरान शेख हसीना सरकार को सत्ता से हटाने की दिशा में अहम भूमिका निभाई थी.
हादी का जन्म झालोकाठी जिले के नलछिटी उपजिला में हुआ था. वे एक धार्मिक मुस्लिम परिवार से आते थे. उनके पिता मदरसा शिक्षक और स्थानीय इमाम थे. छह भाई-बहनों में सबसे छोटे हादी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई झालोकाठी के एन. एस. कामिल मदरसा से की और आलिम तक शिक्षा प्राप्त की. बाद में उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में दाखिला लिया. वे अपने पीछे पत्नी और एक छोटे बच्चे को छोड़ गए हैं.
बयानों को लेकर अक्सर रहे विवादों में
हादी अपने तीखे और उग्र बयानों के कारण भी चर्चा में रहते थे. बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, हाल ही में उन्होंने तथाकथित ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का एक नक्शा साझा किया था, जिसमें भारत के कुछ क्षेत्रों को शामिल दिखाया गया था. इस कदम को लेकर देश के भीतर और बाहर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं.
हादी के निधन के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की. राष्ट्र के नाम संबोधन में यूनुस ने कहा कि जुलाई आंदोलन के एक निडर योद्धा को देश ने खो दिया है. उन्होंने हादी की हत्या के दोषियों को जल्द से जल्द पकड़ने का भरोसा दिलाया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की.
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