नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में 11 बच्चों की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. सर्दी-जुकाम से राहत देने का दावा करने वाला Coldrif Cough Syrup अब मौत की दवा बन चुका है. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले से जुड़े चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं.
कौन बना रहा था यह सिरप?
इस खतरनाक कफ सिरप का निर्माण Sresan Pharmaceuticals नाम की कंपनी ने किया है, जो चेन्नई में स्थित है. इस कंपनी की शुरुआत वर्ष 1990 में एक प्राइवेट लिमिटेड फर्म के तौर पर हुई थी. सरकारी वेबसाइटों और कारोबारी डेटा प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, इसके निदेशकों के नाम हैं रंगनाथन गोविंदन, रंगनाथन गोविंदराजन, रंगनाथन रानी और गोविंदन बाला सुब्रमण्यम.
कागज़ों पर बंद, लेकिन प्रोडक्शन चालू?
यहां सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस कंपनी ने यह सिरप बनाया, वह कागजों पर सालों पहले बंद हो चुकी थी. कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के रिकॉर्ड बताते हैं कि Sresan Pharmaceuticals Ltd. की अंतिम AGM (Annual General Meeting) 2009 में हुई थी और उसके बाद से किसी प्रकार की बैलेंस शीट या कानूनी फाइलिंग नहीं की गई. ऐसे में सवाल उठता है अगर कंपनी कानूनी तौर पर निष्क्रिय थी, तो दवा कैसे बनाई गई? और उसे बाजार में बेचने की इजाजत किसने दी?
मालिक कौन है?
हालांकि कंपनी के विभिन्न दस्तावेजों और वेबसाइट्स पर चेन्नई के ही पते दिए गए हैं, लेकिन इंडिया मार्ट, दवा पैकेजिंग, और MCA रिकॉर्ड्स में अलग-अलग पतों का उल्लेख है. यानी शक और गहरा हो जाता है कि असली संचालन कहां से हो रहा था और किन हालात में.
बैन और जांच की रफ्तार तेज
मध्य प्रदेश सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए न केवल Coldrif Syrup पर बल्कि Sresan Pharmaceuticals के सभी उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया है. उत्तर प्रदेश में भी ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट ने अपने निरीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे सभी अस्पतालों और फार्मेसीज़ से इस कंपनी के नमूने एकत्र करें. इसके अलावा, केंद्रीय औषधि नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने भी तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का निरीक्षण शुरू कर दिया है.
हर बार की तरह यह सवाल फिर उठता है क्या बच्चों की मौत का जिम्मेदार कोई ठोस सज़ा पाएगा, या मामला जांच की भूलभुलैया में खो जाएगा? इस केस ने ना सिर्फ दवा कंपनियों की निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी बताया है कि कैसे एक "कागज़ों पर बंद" कंपनी भी बाजार में ज़हरीली दवा बेच सकती है.
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