कौन है नूर वाली महसूद, जिसने पाकिस्तान में मचाई तबाही, कैसे जंग का मैदान बना अफगानिस्तान बार्डर?

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की सीमा एक बार फिर संघर्ष और खून-खराबे की गवाही दे रही है. हाल ही में दोनों देशों के बीच हुई भीषण झड़पों ने दशकों पुरानी दुश्मनी और अविश्वास को फिर से उजागर कर दिया है.

Who is Noor Wali Mehsud who wreaked havoc in Pakistan
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Noor Wali Mehsud: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की सीमा एक बार फिर संघर्ष और खून-खराबे की गवाही दे रही है. हाल ही में दोनों देशों के बीच हुई भीषण झड़पों ने दशकों पुरानी दुश्मनी और अविश्वास को फिर से उजागर कर दिया है. इस पूरे घटनाक्रम में एक नाम लगातार सुर्खियों में है- नूर वाली महसूद, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का वर्तमान सरगना. यह वही चरमपंथी गुट है जिसे पाकिस्तान अपने खिलाफ लगातार होने वाले आतंकी हमलों का जिम्मेदार ठहराता है.

हालांकि नूर वाली महसूद अफगानी नहीं है, लेकिन उसकी मौजूदगी अफगान धरती पर बताई जा रही है. इससे पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. आइए, विस्तार से समझते हैं कि कौन है नूर वाली महसूद, उसकी भूमिका क्या है, और कैसे वह पाकिस्तान के लिए गंभीर चुनौती बन गया है.

सीमा पर हिंसा: हालात हुए विस्फोटक

हाल ही में पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर कई दिनों तक जबरदस्त गोलीबारी हुई. यह टकराव इतना भीषण था कि इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी सीमा झड़प माना जा रहा है. हालांकि बाद में एक अनौपचारिक युद्धविराम लागू हुआ, लेकिन तनाव अभी भी बरकरार है.

पाकिस्तान के सुरक्षा अधिकारियों का दावा है कि इन झड़पों की जड़ टीटीपी और उसके नेता नूर वाली महसूद हैं, जो अफगानिस्तान के अंदर से पाकिस्तान में हमले करवा रहे हैं. अफगान तालिबान की सत्ता के बावजूद, टीटीपी को वहां शरण और समर्थन मिल रहा है, यह पाकिस्तान का आरोप है.

टारगेट पर नूर वाली महसूद

बीते हफ्ते अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक ड्रोन हमला हुआ. इस हमले में एक बख्तरबंद गाड़ी को निशाना बनाया गया, जिसमें माना जा रहा था कि महसूद मौजूद था. पाकिस्तानी अधिकारियों का मानना है कि हमले का टारगेट वही था. हालांकि वह बच निकला या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी.

इस हमले के बाद टीटीपी की ओर से एक ऑडियो संदेश जारी किया गया, जिसमें महसूद की आवाज होने का दावा किया गया. पाकिस्तान ने इस हमले की कोई आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन यह घटना 2022 में अल-कायदा के अयमान अल-जवाहिरी पर हुए हमले के बाद काबुल में सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है.

तालिबान और पाकिस्तान आमने-सामने

अफगान तालिबान ने साफ इनकार किया है कि वह टीटीपी को समर्थन दे रहे हैं. उनका कहना है कि पाकिस्तान खुद इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) जैसे संगठनों को मदद दे रहा है, जो तालिबान का दुश्मन है. दोनों देशों के बीच अब स्थिति "तू-तू, मैं-मैं" की हो गई है.

इन आरोप-प्रत्यारोपों ने सीमा को जंग का मैदान बना दिया है, जहां ना सिर्फ गोली चल रही है, बल्कि कूटनीतिक हमले भी जारी हैं.

कौन है नूर वाली महसूद?

नूर वाली महसूद कोई सामान्य आतंकी नहीं है. वह एक धार्मिक विद्वान, विचारक और रणनीतिकार भी है. वर्ष 2018 में उसने TTP की कमान संभाली, जब उसके पूर्ववर्ती नेता अमेरिकी ड्रोन हमलों में मारे जा चुके थे.

उस समय तक पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई ने टीटीपी को उसके पारंपरिक ठिकानों से खदेड़ दिया था, और संगठन की ताकत लगभग खत्म हो चुकी थी. लेकिन महसूद ने नया जीवन फूंका- संगठन की रणनीति बदली, बिखरे हुए गुटों को जोड़ा और टीटीपी को दोबारा खड़ा किया.

चरमपंथ और विचारधारा का मेल

महसूद ने केवल बंदूक के जरिए नहीं, बल्कि विचारधारा और किताबों के जरिए भी लड़ाई लड़ी. उसने तीन किताबें लिखी हैं, जिनमें से एक 700 पन्नों की बताई जाती है. इन किताबों में वह अपने विद्रोह को ब्रिटिश काल के खिलाफ संघर्ष से जोड़ता है और पश्तून राष्ट्रवाद का सहारा लेता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि वह खुद को पश्तूनों का प्रतिनिधि मानता है और टीटीपी को एक वैचारिक आंदोलन में तब्दील करने की कोशिश कर रहा है, जिसका मकसद एक तालिबान जैसे शासन की स्थापना है.

हालांकि हकीकत यह है कि पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में या देश के अन्य हिस्सों में टीटीपी को जनता का समर्थन नहीं है. वहां के लोग हिंसा से परेशान हैं और महसूद के सिद्धांतों को खारिज करते हैं.

रणनीति में बदलाव: अब सेना ही निशाना

TTP पहले आम नागरिकों को निशाना बनाता था. बाजार, मस्जिदें, स्कूल कुछ भी सुरक्षित नहीं था. 2014 में पेशावर के स्कूल पर हमले में 130 से ज्यादा बच्चों की मौत हुई थी.

इस हमले के बाद महसूद ने अपनी रणनीति बदली. अब संगठन का मकसद है सिर्फ सैन्य और पुलिस ठिकानों पर हमला करना, ताकि आम जनता को प्रभावित ना किया जाए.

हाल ही में एक वीडियो में महसूद ने कहा कि पाकिस्तानी सेना "इस्लाम विरोधी" है और उसने "देश की जनता को 78 सालों से बंधक बना रखा है." ये बयान पाकिस्तान की सेना के खिलाफ सीधी चुनौती हैं.

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और भारत पर आरोप

पाकिस्तानी सेना महसूद को देशद्रोही और आतंकी कहती है, और आरोप लगाती है कि उसे भारत से समर्थन मिल रहा है. हालांकि भारत इन आरोपों को साफ तौर पर नकार चुका है और कहता है कि यह केवल पाकिस्तान की "ध्यान भटकाने की रणनीति" है.

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