किसने बनवाया था तुर्कमान गेट, कितना पुराना है इसका इतिहास? 1976 में पहली बार चला था बुलडोजर

    History Of Turkman Gate: दिल्ली के ऐतिहासिक तुर्कमान गेट का नाम एक बार फिर चर्चा में है. यह मामला एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद गर्माया, जब ऐतिहासिक तुर्कमान गेट के पास स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए बुलडोजर चलाए गए.

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    History Of Turkman Gate: दिल्ली के ऐतिहासिक तुर्कमान गेट का नाम एक बार फिर चर्चा में है. यह मामला एक बार फिर दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद गर्माया, जब ऐतिहासिक तुर्कमान गेट के पास स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए बुलडोजर चलाए गए. इस कार्रवाई ने इलाके में जमकर बवाल मचाया और पुलिस बल की तैनाती, आंसू गैस और पत्थरबाजी के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई. इस घटना ने तुर्कमान गेट को एक बार फिर ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों में लोगों के बीच ताजगी से उजागर किया.

    तुर्कमान गेट का इतिहास

    तुर्कमान गेट, जिसे मुगलों के दौर में शाहजहां ने बनवाया था, पुरानी दिल्ली का एक प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है. 17वीं शताब्दी में बना यह गेट शाहजहां द्वारा बसाए गए शाहजहानाबाद का हिस्सा है, जो दिल्ली के किलेबंद क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहा था. यह गेट न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि एक सांस्कृतिक प्रतीक भी है, जो उस समय की मुगल वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है.

    गेट का नाम प्रसिद्ध सूफी संत शाह तुर्कमान के नाम पर पड़ा है, जिनकी दरगाह पास ही स्थित है. तुर्कमान गेट का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है, जहां हर साल उर्स का आयोजन होता है. इस वजह से यह इलाका सदियों से आबाद रहा है और आज भी अपने धार्मिक महत्व को बरकरार रखे हुए है.

    क्या औरंगजेब का तुर्कमान गेट से कोई संबंध है?

    सामान्यतः यह सवाल उठता है कि औरंगजेब का तुर्कमान गेट से क्या संबंध है, लेकिन इसका कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है. तुर्कमान गेट का निर्माण शाहजहां के शासनकाल में हुआ था, जबकि औरंगजेब शाहजहां का बेटा था. यही कारण है कि गेट का औरंगजेब से कोई सीधा संबंध नहीं है, बावजूद इसके यह भ्रम कभी-कभी सोशल मीडिया पर फैलता है.

    तुर्कमान गेट पर बुलडोजर का पहला एक्शन

    तुर्कमान गेट का नाम 13 अप्रैल 1976 को देशभर में चर्चा में आया था, जब आपातकाल के दौरान संजय गांधी के नेतृत्व में दिल्ली में झुग्गी हटाओ अभियान चलाया गया. इस अभियान के तहत तुर्कमान गेट क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में झुग्गियां हटाई गईं, जिससे इलाके में असंतोष फैल गया. हालांकि, इस निर्णय का स्थानीय लोगों ने विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप 19 अप्रैल 1976 को तुर्कमान गेट पर हिंसक संघर्ष हुआ. इस संघर्ष में पुलिस बल ने लाठीचार्ज किया, आंसू गैस छोड़ी और स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए महिलाओं और बच्चों तक को नहीं बख्शा गया. यह घटना दिल्ली के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई.

    फिर विवादों में आया तुर्कमान गेट

    करीब पांच दशक बाद तुर्कमान गेट फिर से सुर्खियों में है. इस बार कारण है फैज-ए-इलाही मस्जिद और उसके आसपास सरकारी जमीन पर हुआ अवैध अतिक्रमण. इन अतिक्रमणों के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद 6 जनवरी 2026 को यहां फिर से बुलडोजर चलाए गए. इस कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने जमकर विरोध किया, जिसके बाद इलाके में पत्थरबाजी हुई और पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा. पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया. यह घटना तुर्कमान गेट के ऐतिहासिक महत्व को एक बार फिर उजागर करती है और साथ ही यह सवाल खड़ा करती है कि क्या सरकार ऐसे ऐतिहासिक स्थानों की रक्षा करने के लिए कड़े कदम उठा रही है?

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