मैक्सिको ने सिर्फ भारत ही नहीं इन देशों पर भी लगाया है टैरिफ, किसे होगा ज्यादा नुकसान?

मेक्सिको के हालिया व्यापारिक फैसले ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल पैदा कर दी है.

Which country will suffer more from Mexico tariffs
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

मेक्सिको के हालिया व्यापारिक फैसले ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल पैदा कर दी है. देश ने भारत सहित पांच प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले आयात पर भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की है. यह फैसला उन देशों पर लागू किया गया है, जिनके साथ मेक्सिको का कोई औपचारिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) मौजूद नहीं है. नए नियमों के तहत कई उत्पादों पर 35 प्रतिशत तक और कुछ चुनिंदा वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया जाएगा.

इस कदम को मेक्सिको की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को संरक्षण देने की नीति के रूप में देखा जा रहा है. सरकार का मानना है कि सस्ते आयात, खासतौर पर एशिया से आने वाले उत्पाद, स्थानीय उद्योगों पर दबाव बना रहे थे.

किन देशों पर लगाया गया टैरिफ?

मेक्सिको के इस फैसले से जिन देशों पर सीधा असर पड़ा है, उनमें शामिल हैं:

  • चीन
  • भारत
  • दक्षिण कोरिया
  • थाईलैंड
  • इंडोनेशिया

ये सभी देश मेक्सिको को बड़े पैमाने पर निर्यात करते हैं और वहां के बाजार में इनका मजबूत दबदबा रहा है. नए टैरिफ लगभग 1,400 अलग-अलग उत्पाद श्रेणियों पर लागू होंगे.

किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर?

टैरिफ के दायरे में आने वाले प्रमुख उद्योगों में शामिल हैं:

  • ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट
  • स्टील और मेटल प्रोडक्ट
  • प्लास्टिक और पेट्रोकेमिकल आइटम
  • टेक्सटाइल और गारमेंट्स
  • फुटवियर
  • इलेक्ट्रॉनिक्स
  • इंडस्ट्रियल मशीनरी

अधिकांश वस्तुओं पर लगभग 35 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है, जबकि कारों और उनके कलपुर्जों जैसे संवेदनशील सेक्टर्स में अधिकतम 50 प्रतिशत तक टैरिफ तय किया गया है. इससे इन उत्पादों की कीमतें मैक्सिकन बाजार में काफी बढ़ जाएंगी.

सबसे ज्यादा नुकसान किस देश को?

सभी पांच देशों पर इस फैसले का असर पड़ेगा, लेकिन सबसे बड़ा झटका चीन को लगने की संभावना है. चीन इन प्रभावित देशों में सबसे बड़ा निर्यातक है और वह कई ऐसे उत्पादों की सप्लाई करता है, जिन्हें मेक्सिको ने सीधे तौर पर निशाने पर लिया है.

विशेष रूप से चीनी ऑटोमोबाइल कंपनियों और उनके पार्ट्स पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया गया है. इसका कारण यह बताया जा रहा है कि हाल के वर्षों में चीनी ब्रांड्स ने मेक्सिको के ऑटो मार्केट में तेजी से विस्तार किया था और करीब 20 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली थी. इसके अलावा चीन के टेक्सटाइल, स्टील, प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों पर भी इस फैसले का गहरा असर पड़ेगा.

भारत पर क्या होगा असर?

भारत इस टैरिफ नीति का मुख्य लक्ष्य नहीं है, लेकिन फिर भी भारतीय निर्यातकों को इससे नुकसान झेलना पड़ सकता है. खासतौर पर ऑटोमोबाइल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला है. मेक्सिको भारत के लिए पैसेंजर कार एक्सपोर्ट का तीसरा सबसे बड़ा बाजार माना जाता है.

नए टैरिफ के चलते भारत से मेक्सिको जाने वाले लगभग 75 प्रतिशत निर्यात पर सीधा असर पड़ने की आशंका है. इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हो सकती है और उन्हें या तो कीमतें बढ़ानी होंगी या फिर मुनाफे में कटौती करनी पड़ेगी.

मेक्सिको का बदलता ट्रेड रुख

मेक्सिको का यह कदम दुनिया भर में उभर रहे उस ट्रेंड को दर्शाता है, जहां देश अपनी घरेलू इंडस्ट्री को बचाने के लिए संरक्षणवादी नीतियों की ओर झुक रहे हैं. मैक्सिकन सरकार का तर्क है कि भारी छूट वाले आयात, खासकर पूर्वी एशिया से आने वाले सस्ते उत्पाद, स्थानीय निर्माताओं के लिए खतरा बन गए थे.

सरकार का मानना है कि यह टैरिफ नीति घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देगी, रोजगार सृजन में मदद करेगी और स्थानीय कंपनियों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से राहत देगी.

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