6G Mobile Internet: दुनिया जिस तेजी से टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रही है, उसमें मोबाइल नेटवर्क की अगली क्रांति भी जल्द आने वाली है. जहां अब तक हम 5G के विस्तार को देख रहे हैं, वहीं अब अगली पीढ़ी की तकनीक 6G की तैयारी ज़ोरों पर है. मशहूर चिप निर्माता कंपनी Qualcomm ने संकेत दिए हैं कि 2028 की शुरुआत में 6G से लैस डिवाइसेस बाजार में नजर आने लगेंगी.
हालांकि ये शुरुआती डिवाइस कमर्शियल उपयोग के लिए नहीं होंगे, बल्कि 6G की क्षमताओं (Capabilities) का प्रदर्शन करने के उद्देश्य से विकसित किए जाएंगे.
Qualcomm ने क्या कहा?
Qualcomm के CEO क्रिस्टियानो एमॉन ने हाल ही में आयोजित अपने एनुअल विजन की-नोट प्रेजेंटेशन में बताया कि कंपनी इस समय 6G कनेक्टिविटी पर पूरी ताकत से काम कर रही है. उनका कहना है कि अगले तीन वर्षों में पहली बार 6G तकनीक पर आधारित डिवाइसेस का अनावरण किया जाएगा, जिससे इसकी क्षमताओं का मूल्यांकन किया जा सकेगा.
भले ही ये शुरुआती डिवाइसेस आम उपभोक्ताओं के लिए न हों, लेकिन इससे यह साफ संकेत मिलता है कि मोबाइल टेक्नोलॉजी में एक बड़ा बदलाव आने वाला है.
5G और 6G में क्या होगा अंतर?
जहां 5G ने हाई-स्पीड इंटरनेट, लो-लेटेंसी और बड़ी मात्रा में डेटा ट्रांसफर की सुविधा दी है, वहीं 6G इससे कहीं ज्यादा एडवांस और "स्मार्ट" नेटवर्क होगा. 6G केवल एक तेज़ नेटवर्क नहीं होगा, बल्कि यह खुद "सोच" सकेगा. यानी 6G नेटवर्क में Artificial Intelligence (AI) और Machine Learning (ML) की शक्तियां जुड़ी होंगी, जिससे यह न केवल डेटा ट्रांसफर करेगा, बल्कि उसे समझकर निर्णय भी ले सकेगा.
6G की खास टेक्नोलॉजी: Perception और Sensor Data का कमाल
6G नेटवर्क में दो बेहद महत्वपूर्ण क्षमताएं शामिल होंगी:
इन्हें एक उदाहरण से समझिए, मान लीजिए किसी स्मार्ट फैक्ट्री में एक रोबोट धीमी गति से काम कर रहा है. सामान्य नेटवर्क केवल इसकी जानकारी भेजेगा, लेकिन 6G नेटवर्क यह खुद समझने की कोशिश करेगा कि यह गड़बड़ी क्यों हो रही है. नेटवर्क खुद सेंसर डेटा को पढ़ेगा, उसकी वजहों का विश्लेषण करेगा, और संबंधित टीम को अलर्ट भेजेगा. साथ ही संभव हो तो रोबोट की गति खुद ही ठीक भी कर देगा. इसका मतलब है, 6G नेटवर्क केवल एक पाइपलाइन नहीं रहेगा, बल्कि वह स्मार्ट निर्णय लेने वाला सिस्टम बन जाएगा.
होलोग्राफिक कम्युनिकेशन और मिक्स्ड रियलिटी को मिलेगा बूस्ट
6G आने के बाद हम केवल वीडियो कॉल नहीं करेंगे, बल्कि होलोग्राम कॉल यानी थ्री-डायमेंशनल, वास्तविक दिखने वाले लाइव इमेज कॉल्स की तकनीक का इस्तेमाल कर पाएंगे. इसके अलावा वर्चुअल रियलिटी (VR), ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), और मिक्स्ड रियलिटी (MR), जैसी तकनीकें पहले से कहीं अधिक रियल, रेस्पॉन्सिव और इंटरैक्टिव हो जाएंगी.
6G स्मार्टफोन्स की संभावित लॉन्चिंग
टेक्नोलॉजी से जुड़ी रिपोर्ट्स की मानें तो, 6G आधारित कमर्शियल स्मार्टफोन्स 2030 तक बाजार में उपलब्ध हो सकते हैं. यानी अगले 5 सालों में मोबाइल इंडस्ट्री में फिर से एक बड़ा उछाल आने वाला है.
क्या-क्या बदलेगा?
6G केवल नेटवर्क नहीं बदलेगा, इसके साथ-साथ स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग में भी बड़े बदलाव होंगे, जैसे सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी में बदलाव, सर्किट डिज़ाइन्स और एनर्जी एफिशिएंसी में सुधार, और सबसे महत्वपूर्ण, AI-Driven चिप्स का प्रयोग.
5G के बाद अब 6G की तैयारी में जुटी दुनिया
दुनियाभर में इस समय लगभग सभी बड़े देश और टेक्नोलॉजी कंपनियां 6G को लेकर रिसर्च कर रही हैं. अमेरिका, यूरोप, चीन, दक्षिण कोरिया, जापान और भारत तक, सभी ने अपने-अपने स्तर पर 6G मिशन की शुरुआत कर दी है. भारत में भी सरकार और प्राइवेट कंपनियां मिलकर ‘भारत 6G मिशन’ के तहत शोध और डेवलपमेंट पर काम कर रही हैं.
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